भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी जो अनुमान से भी ज्यादा है। जापानी ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा का कहना है कि इससे भारत को नीतिगत स्तर पर संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
क्यों भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला 7.8% का चौंकाने वाला ग्रोथ रेट?
नोमुरा का कहना है कि महंगाई में नरमी और ट्रंप प्रशासन के टैरिफ वॉर के बाद निर्यात बढ़ने के कारण भारत को 7.8% की वृद्धि हासिल हुई है। उसने कहा कि जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि मजबूत अंतर्निहित मांग का संकेत नहीं है क्योंकि इसे कम मुद्रास्फीति और निर्यात में बढ़त से बढ़ावा मिला है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि हाई टैरिफ का असर सितंबर के बाद दिखाई देगा।’
नोमुरा ने बताया, भारत को क्या करना चाहिए
ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि निर्यातकों का समर्थन करने और घरेलू मांग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत कदम आवश्यक है। नोमुरा के मुताबिक, 2025 के अंत तक रेपो रेट में आधा प्रतिशत की कटौती करके इसे पांच प्रतिशत करना, निर्यात में विविधता लाना, प्रभावित निर्यातकों को राजकोषीय और ऋण सहायता देना और सुधार प्रोत्साहन शामिल हैं।
नोमुरा ने बढ़ाया भारत के जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान
नोमुरा ने कहा, ‘आर्थिक चक्र को लेकर हमारा नजरिया बदला नहीं है, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही की उच्च जीडीपी वृद्धि को देखते हुए हम सांख्यिकीय रूप से वित्त वर्ष 2025-26 के अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को छह प्रतिशत से संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर रहे हैं।’
नोमुरा ने यह भी कहा कि तीसरी तिमाही में वृद्धि दर तेजी से घटकर छह प्रतिशत रहने का अनुमान है और चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में यह और कम होकर 5.6 प्रतिशत पर आ सकती है।
(वार्ता की खबर से इनपुट के साथ)