
Adani-Sahara Property Deal: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की उस याचिका पर सुनवाई की गई, जिसमें अम्बी वैली और सहारा शहर जैसी संपत्तियों को अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को बेचने की अनुमति मांगी गई है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सहारा की याचिका पर विचार करने से पहले सभी पक्षों से विवादित और विवादित नहीं होने वाली संपत्तियों की डिटेल मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी संपत्तियों का टाइटल क्लियर नहीं है और कई पक्षों ने इन संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा किया है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय, सेबी और अमिकस क्यूरी से भी इस याचिका पर जवाब देने को कहा है जबकि सहारा को कर्मचारियों के दावों की जांच करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली एक विशेष पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश तब आया जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार को महाराष्ट्र में एंबी वैली और लखनऊ में सहारा शहर सहित इन परिसंपत्तियों को अडानी समूह को बेचने के सहारा के प्रस्ताव की समीक्षा करनी चाहिए।
अडानी ग्रुप ने अदालत में कहा कि वह इन 88 संपत्तियों को एक साथ डील (comprehensive deal) के रूप में खरीदने को तैयार है, भले ही उन पर दावे लंबित हों। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह सभी लंबित मामलों के बावजूद यह डील करना चाहती है। अदालत ने सहारा को अगली सुनवाई से पहले कर्मचारियों के दावों की समीक्षा करने और केंद्र सरकार, सेबी और न्यायमित्र के साथ समन्वय (coordinate) करने का भी आदेश दिया है। अदालत ने न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफड़े को भी संपत्तियों पर मौजूदा दावों की जांच करने और एक विस्तृत चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को फिर से होगी। कहा जा रहा है कि उस समयअदालत अपना फैसला सुना सकती है, जिसमें अडानी प्रॉपर्टीज को प्रस्तावित बिक्री के लिए मंजूरी मिलेगी या नहीं। सुनवाई के दौरान अडानी प्रॉपर्टीज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी लंबी मुकदमेबाजी से बचने के लिए एक बार में सभी 88 संपत्तियों का अधिग्रहण करने को तैयार है, भले ही कुछ संपत्तियां विवादों से घिरी हुई हों। सहारा की याचिका में जिन 88 संपत्तियों की लिस्टिंग की गई है, उनमें एंबी वैली सिटी (महाराष्ट्र), होटल सहारा स्टार (मुंबई), सहारा शहर (लखनऊ), सहारा गंज (लखनऊ) और कई राज्यों में जमीन के कई बड़े हिस्से शामिल हैं।
सहारा ने कहा है कि बिक्री से मिले पैसे सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा किए जाएंगे। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिए थे। इन पैसों से वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (optionally fully convertible debentures - OFCDs) के निवेशकों को भुगतान किया जा सकेगा। सुनवाई के दौरान सहारा के कर्मचारियों ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उन्हें अब तक वेतन और बकाया भुगतान नहीं मिला है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सहारा से कर्मचारियों के दावों की जांच करने का निर्देश दिए हैं।
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