अडानी vs SEC: अमेरिका में रिश्वत और निवेशकों को गुमराह करने के आरोपों पर केस ने पकड़ी रफ्तार

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रही सिक्योरिटीज फ्रॉड की कार्रवाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। करीब एक साल से अटकी यह कानूनी प्रक्रिया अब आगे बढ़ने के रास्ते पर है।

Ashutosh Kumar
अपडेटेड31 Jan 2026, 04:19 PM IST
अदाणी समूह चेयरमैन गौतम अदाणी
अदाणी समूह चेयरमैन गौतम अदाणी

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रही सिक्योरिटीज फ्रॉड की कार्रवाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। करीब एक साल से अटकी यह कानूनी प्रक्रिया अब आगे बढ़ने के रास्ते पर है। आने वाले समय में यह मामला अमेरिकी अदालत में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है। मामला भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा है। कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक, अडानी पक्ष और अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के बीच एक अहम सहमति बनी है, जिससे केस को आगे बढ़ाने में आ रही बड़ी अड़चन दूर हो गई है।

अडानी परिवार ने दी सहमति

कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, अडानी परिवार ने इस बात पर सहमति दी है कि SEC उन्हें समन और शिकायत की कॉपी उनके अमेरिका स्थित वकीलों के जरिए सौंप सकता है। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने एक विस्तारित कानूनी टाइमलाइन पर भी सहमति जताई है, जिसके तहत अगली कानूनी दलीलें और जवाब चरणबद्ध तरीके से दाखिल किए जाएंगे। इस समझौते के बाद अब मामला सीधे कूटनीतिक अड़चनों से निकलकर कोर्टरूम की बहस में प्रवेश कर गया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक अडानी ग्रुप, गौतम और सागर अडानी के अमेरिकी वकीलों और SEC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

2024 से कार्रवाई शुरू

दरअसल, SEC ने नवंबर 2024 में अडानी ग्रुप के दोनों प्रमोटर्स के खिलाफ यह कार्रवाई शुरू की थी। हालांकि, यह मामला एक साल से ज्यादा समय तक आगे नहीं बढ़ सका। वजह यह रही कि अमेरिकी नियामक संस्था द्वारा भेजे गए समन को भारत सरकार ने दो बार प्रक्रिया संबंधी खामियों का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया। भारत में इस तरह के मामलों में कानून मंत्रालय के तहत आने वाला लीगल अफेयर्स डिपार्टमेंट नोडल एजेंसी की भूमिका निभाता है, जिससे पूरा मामला अटक गया था।

कानूनी लड़ाई लंबी चल सकती है

कानूनी जानकारों का कहना है कि अब अडानी पक्ष द्वारा अमेरिकी वकीलों के जरिए समन स्वीकार करने से यह गतिरोध खत्म हो गया है। तय प्रक्रिया के अनुसार, अब अडानी पक्ष के पास 90 दिन होंगे, जिनमें वे अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं या केस खारिज करने की याचिका दे सकते हैं। इसके बाद SEC को 60 दिन और फिर अडानी पक्ष को 45 दिन का समय मिलेगा। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह मामला संवेदनशील और जटिल है, इसलिए इसकी कानूनी लड़ाई लंबी चल सकती है।

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