
AI In UPI: भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति को नई रफ्तार देने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बड़ा हथियार बनाया जा रहा है। वैसे भी कोडिंग हो या कामों का ऑटोमेशन, AI टूल्स का इस्तेमाल अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर हो रहा है। अब ऐसा लगता है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) UPI के अगले बड़े दौर के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल करना चाहता है, क्योंकि देश में डिजिटल पेमेंट सर्विस लगातार बढ़ रही है। इसके लिए NPCI एक मेगा प्लान बनाने की तैयारी में है।
NPCI के एमडी और सीईओ दिलीप असबे ने एक बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। उनके मुताबिक रोज 1 अरब ट्रांजैक्शन और अगले 50 करोड़ नए यूजर्स को जोड़ने में AI की भूमिका बड़ी रहने वाली है। इसके लिए NPCI, केंद्रीय बैंक और सरकार मिलकर काम कर रही है। असबे ने TechCrunch से बातचीत करते हुए कहा कि जब हम UPI के अगले दौर को देखेंगे, तो AI का बहुत असरदार तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा और इसमें नए यूज़र्स तक पहुंचना भी शामिल है।
उन्होंने यह भी बताया कि वॉइस असिस्टेंट की मदद से यूज़र्स के लिए UPI प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ना आसान हो सकता है। दिलीप असबे ने आगे कहा कि ऑनबोर्डिंग को आसान बनाने के लिए हमें वॉइस और मल्टीलिंगुअल (कई भाषाओं वाले) समाधानों के लिए AI का इस्तेमाल करना चाहिए। NPCI ने 2023 में वॉइस असिस्टेंट पर आधारित एक इंटरैक्टिव सिस्टम लॉन्च किया था। हालांकि, असबे ने माना कि अभी तक इसे ज्यादा लोगों ने अपनाना शुरू नहीं किया है।
NPCI का मानना है कि AI डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसकी मदद से संदिग्ध लेनदेन, साइबर धोखाधड़ी और फर्जी या म्यूल खातों (Mule Accounts) की पहचान तेजी से की जा सकेगी। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल लेनदेन का जोखिम कम होगा।
AI के जरिए डिजिटल फुटप्रिंट का विश्लेषण कर ऐसे ग्राहकों और छोटे कारोबारियों की पहचान की जा सकेगी, जिनके पास पारंपरिक क्रेडिट इतिहास नहीं है लेकिन उनका डिजिटल लेनदेन रिकॉर्ड मजबूत है। इससे उन्हें लोन और अन्य वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अस्बे का कहना है कि यूपीआई (UPI) के अगले विकास चरण में AI की भूमिका बेहद अहम होगी। यह तकनीक न केवल डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाएगी, बल्कि धोखाधड़ी की पहचान, फर्जी खातों पर निगरानी, नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और छोटे कारोबारियों तक आसान क्रेडिट पहुंचाने में भी मदद करेगी। NPCI का मानना है कि AI की मदद से यूपीआई देश के अगले करोड़ों उपभोक्ताओं तक पहुंच बना सकेगा।
NPCI के भीम (BHIM) ऐप को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भी नई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। NPCI चाहता है कि बाजार में स्वस्थ मुकाबला बना रहे। इसके लिए किसी भी ऐप के मार्केट शेयर को 30 प्रतिशत पर सीमित करने की योजना 31 दिसंबर 2026 से लागू होने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय उत्पादों को भीम प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ सके।
यूपीआई पहले ही दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों में शामिल है। NPCI का मानना है कि AI आधारित नवाचारों, वॉयस पेमेंट, बहुभाषी इंटरफेस और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों की मदद से डिजिटल भुगतान को अगले स्तर तक ले जाया जा सकता है। इससे न केवल लेनदेन की संख्या बढ़ेगी बल्कि वित्तीय समावेशन को भी नई मजबूती मिलेगी।
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