
बड़ी टेक कंपनियां 2026 में एआई पर करीब 650 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही हैं। ये चार बड़ी अमेरिकी कंपनियां गूगल की पैरेंट अल्फाबेट, एमेजॉन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट शामिल हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने देश की बड़ी टेक कंपनियों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। ट्रंप प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले चिप्स पर टैरिफ में छूट दे सकती है। इससे एमेजॉन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
फाइनेंशियल टाइम्स (FT) में छपी खबर के मुताबिक, US डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर, ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के इन्वेस्टमेंट में कटौती की तैयारी कर सकती है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि TSMC ने US में फैक्ट्रियां बनाने के लिए 165 अरब डॉलर निवेश करने की तैयारी की है। FT ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस मामले में TSMC ने किसी भी तरह के सवालों का जवाब देने से मना कर दिया है। वहीं खबर लिखे जाने तक कॉमर्स डिपार्टमेंट और व्हाइट हाउस ने कोई जवाब नहीं दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस घरेलू चिप इंडस्ट्री में 250 अरब डॉलर के निवेश के बदले ताइवान से इंपोर्ट पर टैरिफ को 15 फीसदी तक कम करने पर सहमत हो गया है, जिसमें TSMC समेत उन कंपनियों को छूट दी गई है जो अपने US एक्सपेंशन प्लान से जुड़ी हुई हैं। रिपोर्ट में कॉमर्स डिपार्टमेंट के एक आउटलाइन का हवाला देते हुए कहा गया है कि US में ताइवानी कंपनियों के सेमीकंडक्टर प्लांट्स के लिए, कंस्ट्रक्शन के समय प्लान की गई कैपेसिटी का 2.5 गुना टैरिफ फ्री इंपोर्ट किया जा सकता है। जिन ताइवानी कंपनियों के अमेरिका में पहले से प्लांट है, उन्हें अपनी कैपिसिटी का 1.5 गुना बिना टैरिफ के इंपोर्ट करने की इजाजत होगी।
ऐसा लगता है कि “रिबेट प्रोग्राम” का मकसद TSMC को अपना ज़्यादा प्रोडक्शन US में शिफ्ट करने के लिए मजबूर करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे TSMC को अगले टैरिफ लगने पर अपने US कस्टमर्स को छूट देने की इजाज़त मिलेगी। वहीं सूत्रों का कहना है कि अभी तक प्लान फाइनल नहीं हुआ है और न ही ट्रंप ने इस पर साइन किए हैं। अधिकारी ने FT को बताया, “इसके सामने आने के बाद जो कुछ भी होता है, हम उस पर पैनी नजर रखे हुए हैं। फिलहाल US में इंपोर्ट किए गए और फिर चीन को एक्सपोर्ट किए गए कुछ ही चिप्स (जैसे AMD और Nvidia) पर ट्रंप ने नेशनल सिक्योरिटी कारणों का हवाला देते हुए 25% टैरिफ लगाया है।
यह योजना आसान नहीं मानी जा रही है। अमेरिका चाहता है कि ताइवान अपनी करीब 40 फीसदी चिप उत्पादन क्षमता अमेरिका शिफ्ट करे, लेकिन ताइवान इसे नामुमकिन बता रहा है। ताइवानी अधिकारियों का कहना है कि दशकों में बना उनका सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम कहीं और ले जाना संभव नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह योजना लागू होती है, तो इससे वैश्विक चिप सप्लाई और AI इंडस्ट्री दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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