अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एक नया 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। पहले से ही भारत पर 25% टैरिफ लागू था और अब इसके बाद कुल टैरिफ 50% तक पहुंच जाएगा। अमेरिका का आरोप है कि भारत ने रूस से डायरेक्ट या इन-डायरेक्ट तौर पर तेल खरीदा है और ये अमेरिका की विदेश नीति के खिलाफ है।
रूस से सस्ता तेल, लेकिन अब महंगा पड़ सकता है
व्हाइट हाउस के मुताबिक, भारत या तो सीधे रूस से तेल खरीद रहा है या किसी तीसरे देश के जरिए, जिससे ये "इनडायरेक्ट इंपोर्ट" माना जाएगा। अमेरिका के मुताबिक ऐसा करना उसके 2022 वाले Executive Order 14066 का उल्लंघन है, जिसमें रूस से एनर्जी प्रोडक्ट्स के आयात पर बैन लगाया गया था।
भारत ने दिया ये जवाब
भारत सरकार ने अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने के फैसले को नाइंसाफी बताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से आए बयान में कहा गया है कि ये फैसला "अनुचित, अन्यायपूर्ण और बेवजह" है। MEA ने आगे कहा, "हम पहले ही अमेरिका को बता चुके हैं कि भारत जो भी तेल या अन्य सामान आयात करता है, वो बाजार की स्थितियों पर आधारित होता है। हमारा मकसद है देश की 140 करोड़ जनता की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखना।"
सरकार ने अमेरिका के इस कदम को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा, “ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका भारत पर टैरिफ थोप रहा है, जबकि दुनिया के कई देश अपने-अपने हित में ऐसे ही फैसले ले रहे हैं।”
नया टैक्स कब से लागू होगा?
यह नया 25% टैक्स ट्रंप के हस्ताक्षर वाले आदेश के 21 दिन बाद, यानी 27 अगस्त 2025 से लागू हो जाएगा। हालांकि, ऐसे सामान जो 17 सितंबर 2025 से पहले अमेरिका पहुंच जाएंगे और पहले ही रवाना हो चुके हैं, उन्हें इस अतिरिक्त टैक्स से छूट दी जाएगी।
पहले भी लगा था टैक्स
ये पहली बार नहीं है जब भारत पर टैरिफ लगाया गया हो। अप्रैल 2025 में भी ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% टैक्स लगाया था। तब इसकी वजह भारत का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा (ट्रेड सरप्लस) बताई गई थी। लेकिन इस बार कारण साफ है, रूस से एनर्जी डील। ट्रंप ने कहा है कि भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदकर उसे बाजार में बेच रहा है और मुनाफा कमा रहा है।
किन चीजों पर नहीं लगेगा टैक्स?
इस आदेश में कुछ अहम चीजों को राहत भी दी गई है। खासकर, मिनरल्स (खनिज पदार्थ) और उनके उत्पादों को इस बढ़े हुए शुल्क से फिलहाल छूट दी गई है।
अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश सीधे या इन-डायरेक्ट तरीके से रूस से तेल ले रहे हैं, उनके साथ भी ऐसा ही हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति इस आदेश को और सख्त या लचीला भी बना सकते हैं, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित देश अमेरिका के साथ सहयोग करते हैं या नहीं। ट्रंप प्रशासन यह कदम रूस पर दबाव बनाने और यूक्रेन युद्ध रोकने के मकसद से उठा रहा है।
कौन-सा तेल माना जाएगा 'रूसी'?
जो भी कच्चा तेल या पेट्रोलियम प्रोडक्ट रूस से निकला हो, वहीं नहीं बल्कि जो भी कहीं से आता हो लेकिन अगर उसका सोर्स रूस से जुड़ा हो, तो वो ‘रूसी तेल’ की कैटेगरी में आएगा। चाहे वो किसी तीसरे देश से ही क्यों न आया हो।
अब अमेरिकी कस्टम और बॉर्डर एजेंसियों को आदेश दिया गया है कि वे इन टैरिफ्स को लागू करें और निगरानी रखें। भारत ने फिलहाल रूस से सस्ते तेल की खरीद को अपनी मजबूरी बताया है और न्यूट्रल रुख अपनाया है। लेकिन इस नए अमेरिकी कदम से भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में जरूर खटास आ सकती है।
भारत को फिलहाल दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ सस्ती एनर्जी की जरूरत और दूसरी तरफ अमेरिकी दबाव। अगर दोनों देशों में बातचीत नहीं हुई, तो यह व्यापार युद्ध और गहरा हो सकता है।