ग्लोबल ट्रेड वॉर, कमजोर होता रुपया और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते पूरी तरह रिस्क-ऑफ मोड में नजर आया। निफ्टी और सेंसेक्स करीब 2.5 पर्सेंट टूटकर हफ्ते के निचले स्तर के आसपास बंद हुए। बाजार की चाल ने साफ कर दिया कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ता ट्रेड टेंशन, एफआईआई का लगातार पैसा निकालना और उम्मीद से कमजोर कॉरपोरेट नतीजों ने मिलकर बाजार पर दबाव बना दिया है। ऐसे माहौल में जानकार जल्दबाजी से दूर रहने और संभलकर चलने की सलाह दे रहे हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समय पूंजी की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, ग्लोबल अनिश्चितता और बजट से पहले के माहौल को देखते हुए हाई-बीटा और ज्यादा जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाना बेहतर है। रियल्टी और एनर्जी जैसे सेक्टर, जो ब्याज दरों और वैश्विक हालात के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं, उनमें अभी दबाव बना रह सकता है। इसके मुकाबले मजबूत बैलेंस शीट वाली बड़ी कंपनियां और डिफेंसिव सेक्टर इस समय ज्यादा सुरक्षित विकल्प माने जा रहे हैं।
उतार-चढ़ाव बने रहने के संकेत
एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि भले ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली हो, लेकिन हर जगह निराशा ही निराशा नहीं है। FMCG, IT, मेटल्स और कुछ PSU बैंकिंग शेयरों में चुनिंदा मौके दिख सकते हैं, क्योंकि इन सेक्टर्स को घरेलू मांग का सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, निवेश यहां भी सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से करने की सलाह दी जा रही है। तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों अहम सपोर्ट लेवल के नीचे फिसल चुके हैं, जिससे आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बने रहने के संकेत मिलते हैं।
क्या है निवेशकों के लिए सलाह
आगे बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों पर टिकी रहेगी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले, ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी और रुपये की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। इसके साथ ही यूनियन बजट और तिमाही नतीजों से भी उम्मीदें जुड़ी हैं। फिलहाल एक्सपर्ट्स की साफ सलाह है कि आक्रामक दांव से बचें, क्वालिटी शेयरों पर फोकस रखें और पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखें। जब तक ग्लोबल मोर्चे पर हालात साफ नहीं होते और कमाई में ठोस सुधार के संकेत नहीं मिलते, तब तक धैर्य रखना ही निवेशकों के लिए सबसे समझदारी भरा कदम होगा।