अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की लगातार बढ़ती डिमांड की वजह से रुपये के मूल्य में लगातार गिरावट का दौर जारी है। एक डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 90 के पार कर गई है। पिछले कारोबारी सप्ताह में बुधवार के दिन रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई और एक डॉलर की कीमत 90 रुपये 46 पैसे पर पहुंच गया। जिसके बाद से लगातार सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। नई दिल्ली के होटल ताज में आयोजित HT लीडरशिप समिट में शामिल हुईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने रुपये की गिरावट पर पहली बार बयान दिया।
रुपया खुद ढूंढ लेगी अपना रास्ता
शनिवार को दिल्ली में 23वें हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट पर कहा कि रुपया खुद अपना रास्ता ढूंढ लेगी। उन्होंने कहा कि करेंसी लेवल पर बहस में मौजूदा आर्थिक स्थिति को भी शामिल किया जाना चाहिए, सिर्फ रुपये की डॉलर के मुकाबले गिरावट की तुलना करना ठीक नहीं है।
भारतीय आर्थिक फंडामेंटल्स पर ध्यान दें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने कहा कि मौजूदा समय में एक तरफ जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था थमती नजर आ रही है, दुनिया के बड़े-बड़े देशों की जीडीपी ग्रोथ एक प्रतिशत के आसपस नजर आ रही है, ऐसे समय में भारतीय जीडीपी 7 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि जब डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत की तुलना पिछले दशक से की जा रही है तो पिछले दशक की जीडीपी से मौजूदा जीडीपी और आर्थिक स्थिति की भी तुलना की जानी चाहिए।
रुपये की गिरावट से एक्सपोर्ट में लाभ
HT लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि इस समय कुछ लोग सिर्फ डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट की चर्चा कर रहे हैं। ऐसे मौके पर एक्सपोर्ट के मोर्चे पर होने वाले लाभ की भी चर्चा करनी चाहिए। जहां तक रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट की बात है तो जब करेंसी की वैल्यू कम होती है तो स्वाभाविक तर्क ये होता है कि एक्सपोर्टर्स को इसका फायदा उठाना चाहिए। लेकिन इत्तेफाक से कुछ लोग कहते हैं कि US टैरिफ के समय इससे कुछ राहत मिली है। भले ही ये सच हो लेकिन मैं इस उदाहरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं, इसके साथ इकॉनमी की मजबूती का भी आकलन किया जाना चाहिए।
रुपये की गिरावट के कई कारण
HT लीडरशिप समिट में निर्मला सीता रमण ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बाजार में रुपये के मुकाबले डॉलर की अधिक मांग है। इसके अलावा कई और भी कारण है जिसकी वजह से रुपये में गिरावट देखी जा रही है। भारतीय रुपया इन दिनों अपने सबसे निचले स्तर पर है, बुधवार को रुपये ने 90 के स्तर को तोड़ते हुए ऑल-टाइम लो लेवल 90.46 पर पर पहुंच गया था।
विदेशी निवेशकों की बेरुखी भी कारण
वित्त मंत्री ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट की एक और बड़ी वजह भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की बेरुखी है। विदेशी निवेशक पिछले लंबे समय से भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं। शेयर बाजार में FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं जिससे रुपये में गिरावट देखी जा रही है। इसके अलावा दुनिया भर में जारी अनिश्चितता और अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर अटकी बात भी रुपये में गिरावट का एक बड़ा कारण है।
7% से ज्यादा रह सकती है GDP ग्रोथः वित्त मंत्री
HT लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि फाइनेंशियल इयर 2026 में जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत से ज्यादा बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थ व्यवस्था 7 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ उस वक्त दर्ज कर रही है जब पूरी दुनिया की जीडीपी ग्रोथ 3 प्रतिशत से कम है।