'बाप ऑफ चार्ट' पर चला SEBI का डंडा, 17 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूलने का आदेश

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने बाप ऑफ चार्ट के मोहम्मद नसीरुद्दीन अंसारी को शेयर मार्केट से बैन कर दिया है। यह घटना साल 2023 की है। सेबी अंसारी से करीब 21 लाख रुपये और उनकी कंपनी गोल्डन सिंडिकेट वेंचर्स से करीब 17.90 करोड़ की वसूली करेगी।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड16 Dec 2025, 09:02 PM IST
सेबी ने 15 दिसंबर 2025 को वसूली के आदेश दिए हैं।
सेबी ने 15 दिसंबर 2025 को वसूली के आदेश दिए हैं। (Livemint)

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने साल 2023 में मोहम्मद नसीरुद्दीन अंसारी को शेयर मार्केट से बैन कर दिया था। अंसारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 'बाप ऑफ चार्ट' नाम से प्रोफाइल चलाते थे। मार्केट रेगुलेटर का आरोप है कि अंसारी का ये प्लेटफॉर्म बिना किसी जरूरी रजिस्ट्रेशन के निवेश और ट्रेडिंग की की सलाह देता था। अब सेबी ने 'बाप ऑफ चार्ट्स' (BoC) के मालिक फिनफ्लुएंसर मोहम्मद नसीरुद्दीन अंसारी और उनकी कंपनी गोल्डन सिंडिकेट वेंचर्स के खिलाफ क्रमशः 21 लाख और 17.90 करोड़ का बकाया न चुकाने पर रिकवरी की कार्यवाही शुरू कर दी है।

सेबी ने इस बारे में 15 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर दिया है। रेगुलेटर ने राहुल राव पदामती से 2.13 लाख का बकाया वसूलने के लिए भी कार्यवाही शुरू कर दी है। बता दें कि चर्चित फिनफ्लुएंसर मोहम्मद नसीरुद्दीन अंसारी को सोशल मीडिया में 'बाप ऑफ चार्ट' (BoC) के नाम से जाना जाता है।

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शेयरों में निवेश की देते थे सलाह

SEBI के मुताबिक, अंसारी शेयर बाजार (Share Market) से जुड़े एजुकेशनल ट्रेनिंग देने की आड़ में शेयरों में ट्रेडिंग की सलाह देते थे। उनके सोशल मीडिया (Social Media) अकाउंट्स बहुत लोकप्रिय थे। वो निवेशकों को यू-ट्यूब, X और टेलिग्राम चैनलों के जरिए अपने कोर्स में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लुभाते थे। ये कोर्स 'बाप ऑफ चार्ट' एप्लीकेशन के जरिए मिलता है।

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बिना रजिस्ट्रेशन के ऐसा काम करना नियमों का उल्लंघन है। रेगुलेटर ने जांच पड़ताल में पाया कि अंसारी और उनकी टीम को करीब 2.5 साल में 3 करोड़ का ट्रेडिंग लॉस हुआ था। इस मामले को उन्होंने अपने ग्राहकों से छिपाया था। कहने का मतलब ये हुआ कि जो निवेश सिखाने और मुनाफे का दावा कर रहा था। वह खुद घाटे में था।

संपत्ति की बिक्री की अनुमति नहीं है

सेबी के 15 दिसंबर के ताजा निर्देश में यह भी कहा गया है कि यह देखते हुए कि डिफॉल्टरों के बैंक खातों से मिलने वाली रकम पर्याप्त नहीं है, इसलिए डिफॉल्टरों को उनकी सभी अचल संपत्तियों और चल संपत्तियों को बेचने, ट्रांसफर करने, अलग करने या गिरवी रखने से रोकना जरूरी है। आदेश में यह भी कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति ऐसी संपत्तियों से कोई फायदा नहीं उठा सकता है, क्योंकि वो सब अटैच मानी जाएंगी। इसके अलावा, डिफॉल्टर्स को दो हफ्ते के भीतर अपनी सभी संपत्तियों को पूरा ब्योरा और अचल संपत्तियों के मूल दस्तावेज सेबी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

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