बैंकों को 150 करोड़ का लगाया चूना, फर्जी कृषि लोन सिंडिकेट में बैंक मैनेजर भी शामिल

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नागपुर जोन ने लोन सिंडिकेट्स का पर्दाफाश किया है जो किसानों को धोखा देकर दस्तावेज जुटाता था और फिर बैंकों से कृषि लोन लिया करता था। ईडी की जांच में पता चला है कि इस गिरोह में बैंक के मैनेजर भी शामिल थे।

एडिटेड बाय Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
अपडेटेड1 Oct 2025, 09:18 PM IST
लोन फ्रॉड के सिंडिकेट्स पर कसा ईडी का शिकंजा। (सांकेतिक तस्वीर)
लोन फ्रॉड के सिंडिकेट्स पर कसा ईडी का शिकंजा। (सांकेतिक तस्वीर)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने किसानों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए और लोन पर लोन लेकर बैंकों को चूना लगाने वाले सिंडिकेट्स पर शिकंजा कसा है। ईडी ने हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर और भंडारा जिलों तथा आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में रमन्ना राव बोल्ला, नूतन राकेश सिंह और उनके सहयोगियों से जुड़े आठ स्थानों पर तलाशी ली। यह तलाशी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत धन शोधन की जांच का हिस्सा थी। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति के कागजात और डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए गए हैं।

महाराष्ट्र पुलिस ने दर्ज की थी एफआईआर

ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत महाराष्ट्र पुलिस की दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के आधार पर अपनी जांच शुरू की। रमन्ना और नूतन सहित आरोपियों पर तत्कालीन कॉर्पोरेशन बैंक (अब यूनियन बैंक) और कई किसानों के साथ कुल 152.90 करोड़ रुपये धोखाधड़ी करने का आरोप है।

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किसानों को धोखा, बैंकों से फर्जीवाड़ा

ईडी की जांच से पता चला कि रमन्ना और उनके सहयोगियों ने कई किसानों से धोखाधड़ी कर आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज प्राप्त किए। उन्होंने किसानों को सरकारी योजना के अंतर्गत फसल खराब होने पर मुआवजा पाने के लिए आवश्यक बैंक खाते खोलने में मदद करने का झूठा वादा किया। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने 10 लाख रुपये की नकदी जब्त की, बैंक बैलेंस और बीमा पॉलिसियों सहित चल संपत्तियों पर रोक लगा दी और 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों की पहचान की।

बैंक मैनेजर भी धोखाधड़ी में शामिल

कॉर्पोरेशन बैंक की उमरखेड़ शाखा के तत्कालीन सहायक प्रबंधक संदीप रेवनाथ जंगाले और अन्य आरोपियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र में उन्होंने 158 किसानों के नाम पर बैंक खाते खोले। प्रत्येक खाते के लिए 49 लाख से 50 लाख रुपये तक लोन स्वीकृत किए गए और रमन्ना इन सभी का गारंटर बना। इसके बाद आरोपियों ने निजी लाभ के लिए लोन की राशि का गबन किया जिससे खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) बन गए। इस वजह से बैंक को कुल 113 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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करोड़ों के लोन लेकर बैंकों को लगाया चूना

इसी तरह नूतन के नेतृत्व वाले एक अन्य सिंडिकेट ने भी यही तरीका अपनाया। उसी बैंक अधिकारी के साथ साजिश कर उन्होंने 54 किसानों के नाम पर कुल 25.07 करोड़ रुपये का लोन उठाया जिसमें नूतन गारंटर थीं। लोन के इन पैसों का भी दुरुपयोग किया गया जिससे खाते एनपीए में बदल गए और बैंक को कुल 39.43 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इनमें 23.03 करोड़ रुपये की मूल राशि और 16.40 करोड़ रुपये का ब्याज शामिल है।

धोखाधड़ी से लिए लोन के पैसों की बंदरबांट

ईडी की जांच से यह भी पता चला कि धोखाधड़ी से प्राप्त धन का उपयोग रमन्ना और नूतन ने अपने, साथ ही अपने परिवार के सदस्यों और उनके द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के नाम पर संपत्तियां अर्जित करने के लिए किया। धोखाधड़ी से प्राप्त धन राशि के एक हिस्से का उपयोग उनके अन्य व्यवसायों के नाम पर लिए गए पिछले ऋणों को चुकाने के लिए भी किया गया। मामले की जांच जारी है।

की टेकअवेज
  • फर्जी बैंक खातों के माध्यम से धोखाधड़ी करने वाले सिंडिकेट की पहचान हुई।
  • बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों के नाम पर लोन स्वीकृत किया गया।
  • धोखाधड़ी के लिए आवश्यक दस्तावेजों का गलत उपयोग किया गया।

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