Budget 2026 Defence FDI: रक्षा सेक्टर में FDI 74% तक बढ़ाने पर चर्चा, भारत की कंपनियों को कैसे होगा फायदा?

Budget 2026 Defence FDI: बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 74% करने की तैयारी है। इससे विदेशी कंपनियों को ज्यादा हिस्सेदारी मिलेगी, तकनीक और पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और घरेलू उत्पादन मजबूत होगा। सरकार चाहती है कि भारत आयात पर कम और अपने उत्पादन पर ज्यादा निर्भर बने।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
अपडेटेड28 Jan 2026, 08:37 PM IST
बजट 2026 में रक्षा सेक्टर पर बड़ा फैसला? FDI 74% तक बढ़ाने की तैयारी (सांकेतिक तस्वीर)
बजट 2026 में रक्षा सेक्टर पर बड़ा फैसला? FDI 74% तक बढ़ाने की तैयारी (सांकेतिक तस्वीर)(HT)

Budget 2026 Defence FDI: आगामी बजट से पहले सरकार रक्षा क्षेत्र को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में दिख रही है। सरकार रक्षा उद्योग में विदेशी निवेश यानी एफडीआई को और खुला करने की सोच रही है। इससे उम्मीद है कि भारत को नई तकनीक, ज्यादा पूंजी और मजबूत घरेलू उत्पादन का फायदा मिलेगा।

74% तक बढ़ सकती है FDI सीमा

शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले बजट में मौजूदा लाइसेंस प्राप्त रक्षा निर्माताओं के लिए स्वचालित मार्ग के तहत FDI सीमा को बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने का प्रस्ताव शामिल है। अभी यह सीमा 49 प्रतिशत है। बदलाव के बाद विदेशी निवेशक बिना RBI या सरकार से पहले मंजूरी लिए बहुमत हिस्सेदारी ले सकेंगे।

क्यों जरूरी है यह बदलाव

अधिकारियों ने कहा, "इस कदम का उद्देश्य रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस उद्योग में तकनीकी प्रवाह को बढ़ाना तथा संयुक्त उद्यमों और घरेलू उत्पादन में तेजी लाना है। हमें हाई-टेक रक्षा क्षेत्रों में पूंजी और नई तकनीक दोनों को आकर्षित करने की आवश्यकता है और यह एक ऐसा कदम है जिस पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है।"

नए और पुराने लाइसेंस धारकों में बराबरी

अभी तक सिर्फ नई हाई-टेक कंपनियां ही 74% एफडीआई के लिए आवेदन कर सकती थीं। अब सरकार चाहती है कि पुराने लाइसेंस धारकों को भी वही सुविधा मिले। इससे नियम आसान होंगे और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

‘आधुनिक तकनीक’ की शर्त हटाने पर भी विचार

सरकार 74 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश के लिए लागू ‘आधुनिक तकनीक’ की शर्त को हटाने पर भी विचार कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस शर्त की अलग-अलग व्याख्याओं के चलते कई अहम निवेश अटक जाते थे, जिससे रक्षा उद्योग को नुकसान होता था।

विदेशी दिग्गजों और MSME को फायदा

इस फैसले से लॉकहीड मार्टिन, GE, थेल्स, डसॉल्ट और रोस्टेक जैसी वैश्विक रक्षा कंपनियों के साथ-साथ रक्षा उपकरणों के पुर्जे और सहायक सामान बनाने वाली छोटी भारतीय कंपनियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग में उनकी हिस्सेदारी बढ़ सकती है।

यूरोपीय कंपनियों के लिए भी संकेत

अधिकारियों का कहना है कि हाल में हुए सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते तथा प्रस्तावित सूचना की सुरक्षा समझौते से यूरोपीय रक्षा कंपनियां ज्यादा आश्वस्त महसूस कर सकती हैं और वे इस नई सुविधा का लाभ उठाने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल हो सकती हैं।

आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

भले ही रक्षा बजट बढ़ रहा हो और निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशें जारी हों, लेकिन भारत अब भी अपने करीब 70 प्रतिशत सैन्य हार्डवेयर का आयात करता है। विश्लेषकों के मुताबिक, 74 प्रतिशत तक FDI की अनुमति मिलने से वैश्विक कंपनियां तेजी से नियंत्रण हिस्सेदारी ले सकेंगी, जिससे पूंजी, तेज फैसले और गहरा तकनीक हस्तांतरण संभव होगा।

घरेलू कंपनियों के लिए क्या मायने

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, महिंद्रा, L&T जैसे बड़े समूहों के साथ-साथ कई छोटे और मध्यम लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं के लिए यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है। समर्थकों का तर्क है कि इससे भारत में विश्वस्तरीय रक्षा विनिर्माण केंद्र विकसित हो सकते हैं, आयात पर निर्भरता घटेगी और स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी।

सुरक्षा कवच रहेगा बरकरार

हालांकि, अधिकारियों ने ये भी कहा कि भारतीय कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा कवच लागू रहेगा। यानी भारतीय रक्षा कंपनियों के पूरी तरह विदेशी अधिग्रहण की संभावना कम ही मानी जा रही है।

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