
Budget 2026 Expectations: रविवार 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने वाली हैं। इस बार सबसे ज्यादा मिडिल क्लास, नौकरीपेशा, होमबायर्स से लेकर सीनियर सिटीजंस तक, सभी की नजर बजट 2026 पर टिकी हैं। महंगाई, होम लोन, बच्चों की पढ़ाई और हेल्थ खर्च के बीच नौकरीपेशा और व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि बजट में टैक्स का बोझ थोड़ा हल्का हो। सरकार के सामने चुनौती है, राजकोषीय संतुलन भी बनाए रखना और आम टैक्सपेयर्स को राहत भी देना।
मिडिल क्लास की सबसे बड़ी मांग पर्सनल इनकम टैक्स में राहत को लेकर है। खासकर ₹15 लाख तक की सालाना आय वालों को उम्मीद है कि टैक्स स्लैब को और तार्किक बनाया जाएगा। बेसिक टैक्स-एक्सेम्प्शन लिमिट बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है, ताकि छोटे टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा मिल सके। वहीं, ज्यादा कमाने वालों के लिए सरचार्ज कम करने की भी उम्मीद है, क्योंकि मौजूदा टैक्स दरें काफी भारी लगती हैं।
नौकरीपेशा वर्ग स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख या उससे ज्यादा करने की उम्मीद कर रहा है। इसके अलावा नई टैक्स व्यवस्था में 30% वाला टैक्स स्लैब ₹30 लाख तक की आय पर लागू करने की मांग है, ताकि सैलरी बढ़ने पर टैक्स का झटका न लगे और ग्रोथ का फायदा हाथ में बचे।
पुरानी टैक्स व्यवस्था में निवेश करने वाले लोग चाहते हैं कि सरकार इसके भविष्य को लेकर साफ संकेत दे। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इसे अचानक खत्म किया गया, तो इंश्योरेंस, होम लोन और रिटायरमेंट प्लानिंग करने वालों को नुकसान हो सकता है। इसलिए लोग चाहते हैं कि बदलाव धीरे-धीरे हो।
नई टैक्स व्यवस्था में भी 80C, 80D और होम लोन ब्याज जैसी कटौतियों को किसी सीमित रूप में शामिल करने की मांग तेज है। लोगों का कहना है कि कम टैक्स स्लैब अच्छी बात है, लेकिन अगर सेविंग्स, इंश्योरेंस और घर खरीदने पर कोई टैक्स फायदा न मिले, तो नया सिस्टम कई परिवारों के लिए अधूरा रह जाता है।
कई सालों से जॉइंट टैक्सेशन यानी पति-पत्नी के लिए संयुक्त टैक्स की मांग उठती रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे सिंगल-इनकम और मिडिल-क्लास परिवारों का टैक्स बोझ कम हो सकता है, हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं माना जा रहा।
इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग LTCG टैक्स में राहत की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न बेहतर होंगे और लॉन्ग-टर्म निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
AMFI ने बजट 2026-27 में म्यूचुअल फंड-लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम लाने का सुझाव दिया है, जिसमें NPS जैसी टैक्स छूट मिल सके। मकसद है कि लोगों के पास रिटायरमेंट के लिए ज्यादा विकल्प हों और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स मजबूत हों।
वरिष्ठ नागरिक टैक्स-फ्री इनकम लिमिट बढ़ाने, हेल्थ इंश्योरेंस पर ज्यादा छूट और FD व स्मॉल सेविंग्स के ब्याज पर टैक्स राहत चाहते हैं। वहीं NRIs और रिटायर्ड टैक्सपेयर्स की मांग है कि टैक्स पेमेंट, रिफंड और ITR फाइलिंग को और सरल बनाया जाए।
प्रॉपर्टी से जुड़े टैक्स नियमों में भी आसानी की उम्मीद है। जब विक्रेता भारत में रहता है, तो TDS की प्रक्रिया सरल होती है, लेकिन NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर नियम काफी जटिल हो जाते हैं। सिर्फ एक बार की डील के लिए TAN लेना और रिटर्न फाइल करना कई लोगों के लिए परेशानी बन जाता है। अगर इस प्रक्रिया को आसान किया जाए, तो बड़ी राहत मिल सकती है।
अभी अगर सालाना टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो एडवांस टैक्स देना पड़ता है। उम्मीद की जा रही है कि यह सीमा बढ़ाकर 50,000 रुपये की जाए, ताकि छोटे टैक्सपेयर्स पर अनावश्यक दबाव न पड़े। इसके अलावा, विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए टैक्स पेमेंट और रिफंड को ओवरसीज बैंक अकाउंट से आसान बनाने की मांग भी है।
सरकार से उम्मीद है कि टैक्स नीति के जरिए ग्रीन मोबिलिटी को और बढ़ावा मिलेगा। इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों के लिए अलग टैक्स नियम लाने और ईवी लोन पर ब्याज छूट को दोबारा लागू करने की मांग भी बजट से पहले चर्चा में है।
इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग LTCG टैक्स में राहत की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न बेहतर होंगे और लॉन्ग-टर्म निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
ऑटोमैटिक सिस्टम की वजह से छोटे-मोटे अंतर पर भी टैक्स नोटिस आ रहे हैं, जिससे लोग परेशान हैं। टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि मामूली गड़बड़ियों पर नोटिस न भेजे जाएं और अपील से जुड़े मामलों का निपटारा समय पर हो। इससे सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा।
मिडिल क्लास, नौकरीपेशा, सीनियर सिटीजंस और NRIs-सबकी एक ही उम्मीद है कि टैक्स सिस्टम सरल, अनुमान के लायक और भरोसेमंद बने। अगर बजट 2026 में राहत, सरलता और स्थिरता मिलती है, तो यह आम टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
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