
Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को देश का आम बजट पेश करने वाली हैं। इससे पहले सेक्टर और इंडस्ट्री की बजट 2026 से उम्मीदें बढ़ गईं हैं। ऐसे सीफूड इंडस्ट्री में मौजूदा समय में संकट के दौर से गुजर रहा है। उसे कई तरह की चुनौतियों का सामना करन पड़ रहा है। सीफूड को US टैरिफ की मार से डिमांड और वर्किंग कैपिटल में कमी का सामना करना पड़ रहा है। भारत दुनिया में झींगा का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। लेकिन ट्रंप के टैरिफ की वजह ये पहले स्थान पर खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में एक्सपोर्टर और रेगुलेटरी से इस चुनौती से निपटने के लिए नए बाजार की तलाश में डूबी हुई हैं।
सीफ़ूड सेक्टर के लोग अब आने वाले बजट 2026 का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस इंडस्ट्री को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), इनपुट सब्सिडी, कोल्ड स्टोरेज के लिए बजट सपोर्ट और डिजिटल अपनाने से कुछ राहत मिलेगी।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, जानकारों ने उम्मीद जताई है कि इंडस्ट्री को प्रीमियम फिश फीड और फिश हाइड्रोलाइसेट जैसे कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में राहत मिल सकती है। पिछले साल के यूनियन बजट में इसके एनालॉग प्रोडक्ट्स के मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के लिए फ्रोजन फिश पेस्ट (सुरिमी) पर BCD को 30 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया गया था।
इंडस्ट्री ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए तालाब बनाने, बीज, चारा और जरूरी उपकरणों को कवर करते हुए 60-70% तक इनपुट सब्सिडी की मांग की है। इसके साथ ही इंडस्ट्री PMMSY और इससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए ज़्यादा बजट चाहती है ताकि कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग सुविधाओं और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंफ्रास्ट्रक्चर सहित ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सके।
वहीं कैप्टन फ्रेश के फाउंडर उत्तम गौड़ा का कहना है कि भारत सीफूड के जरिए कृषि क्षेत्र में लंबी छलांग लगा सकता है। भारत ने साबित कर दिया है सीफूड इंडस्ट्री दुनिया के कुछ सबसे डिमांडिंग बाजारों के लिए बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन कर सकता है। अब अगला कदम है प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन का है। केंद्रीय बजट 2026–27 में इसमें कई तरह के बदलाव किए जा सकते हैं। पहला ‘ब्रांड इंडिया’ फंड बनाना होगा, ताकि भारत का सीफ़ूड एक प्रीमियम पहचान बना सके।
दूसरा, वैल्यू-एडेड प्रोसेसिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव, जिससे हम कच्चे जमे हुए उत्पादों से आगे बढ़कर रेडी-टू-ईट या टेबल-रेडी उत्पाद बना सकते हैं। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता निगरानी को प्रोत्साहन दे सकते है। इससे इससे उच्च मानकों वाले अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंच मजबूत होगी, जिससे आमदनी में इजाफा होगा।
बता दें कि भारत के दक्षिणी तटीय राज्य आंध्र प्रदेश झींगा उत्पादन और निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ करीब 3 लाख किसान झींगा पालन में लगे हुए हैं। किसान खारे पानी के तालाबों में लाखों रुपये लगाकर उच्च क्वालिटी का झींगा पैदा करते हैं, लेकिन टैरिफ के बाद निर्यातकों ने किसानों से खरीद की कीमतों में लगभग 20% की कटौती कर दी है। इससे किसानों का पूरा मुनाफा खत्म हो गया और कई किसान अब वैकल्पिक काम जैसे मछली पालन की तरफ रुख करने पर मजबूर हैं।
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