
Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में आम आदमी को टैक्स के मोर्चे पर बड़ी राहत दी है। इनकम टैक्स में वैसे तो कोई छूट नहीं दी है लेकिन कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जिनसे लोगों को काफी राहत महसूस होगी। खासकर, विदेश में संपत्ति बेचने वाले एनआरआई (NRI) और विदेश में रहने वाले छोटे-मोटे एसेट्स (संपत्ति) का खुलासा न करने वालों को बड़ी छूट मिली है।
सरकार ने छात्रों, टेक प्रोफेशनल्स और विदेश में रहने वाले नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) जैसे छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक वन-टाइम विदेशी संपत्ति खुलासा योजना की घोषणा की। इसके लिए फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स – डिस्क्लोजर स्कीम (FAST–DS) लॉन्च की है। इस स्कीम में 6 महीने का समय मिलेगा। यह वन-टाइम स्कीम उन लोगों के लिए है जिन्होंने पहले विदेश से होने वाली इनकम और एसेट्स का खुलासा नहीं किया था। इसके साथ ही यह उन लोगों के लिए भी जिन्होंने इनकम तो बताई थी और टैक्स भी दिया था, लेकिन विदेशी एसेट्स का खुलासा नहीं कर पाए थे।
इस स्कीम में आने वाले लोगों को दो कैटेगरी में बांटा गया है। एक वो जिन्होंने संपत्ति की कभी घोषणा इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं की। दूसरी कैटेगरी में वो लोग आएंगे, जिन्होंने आय पर टैक्स चुकाया, लेकिन शेड्यूल एफए में कुछ संपत्तियां नहीं बताईं। पहली कैटेगरी में संपत्ति की सीमा 1 करोड़ रुपये तक होगी। वहीं दूसरी सीमा 5 करोड़ रुपये तक होगी। पहली कैटेगरी में आने वालों को 60 फीसदी भुगतान (30 फीसदी टैक्स, 30 फीसदी जुर्माना) देना होगा।
वहीं दूसरी कैटेगरी में एकमुश्त 1 करोड़ जुर्माना चुकाना होगा। दोनों ही कैटेगरी में जेल की सजा या मुकदमे से पूरी छूट मिलेगी। इस उपाय का मकसद वॉलंटरी कंप्लायंस का मौका देकर फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी और रेगुलेटरी कंप्लायंस को बेहतर बनाना है।
बजट में उन लोगों को राहत देने का फैसला लिया गया है, जो विदेश में मौजूद अपनी छोटी-मोटी संपत्ति की जानकारी टैक्स रिटर्न में भूलवश नहीं दे पाए थे। अगर किसी व्यक्ति की गैर-अचल विदेशी संपत्ति की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है और वह उसका खुलासा नहीं करता है तो उस पर अब कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में सजा से छूट मिलेगी। यह नया नियम 1 अक्टूबर 2024 से लागू होगा. जिससे सीमित विदेशी एसेट्स रखने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
अगर किसी टैक्सपेयर पर पेनल्टी लगती है और वह उसके खिलाफ पहली अपीलेट अथॉरिटी में अपील करता है, तो अपील के दौरान लगने वाले ब्याज से उसे छूट मिलेगी। यह राहत इसलिए अहम है क्योंकि कई बार अपील लंबी चलने पर ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती है।
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