क्या बजट 2026 में होगा चीन का इलाज? रेयर अर्थ मैग्नेट पर बड़ा दांव खेल सकती है मोदी सरकार

रेयर अर्थ मैग्नेट को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार बजट 2026 में चीन पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट पर बड़ा कदम उठा सकती है।

Ashutosh Kumar
अपडेटेड20 Jan 2026, 01:13 PM IST
रेयर अर्थ मैग्नेट
रेयर अर्थ मैग्नेट

रेयर अर्थ मैग्नेट को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, आगामी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2026 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि सरकार इस बजट में चीन पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट पर बड़ा कदम उठा सकती है। बता दें कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, मोबाइल फोन, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे अहम सेक्टरों में रेयर अर्थ मैग्नेट की मांग लगातार बढ़ रही है। फिलहाल भारत इस जरूरत का बड़ा हिस्सा चीन से आयात करता है, जिससे सप्लाई चेन पर खतरा बना रहता है। ऐसे में बजट 2026 को चीन पर निर्भरता घटाने का बड़ा मौका माना जा रहा है।

क्या है लोगों की उम्मीद

सरकार की प्लानिंग सिर्फ खनन तक सीमित नहीं हो सकती। माना जा रहा है कि बजट में पीएलआई स्कीम, टैक्स छूट, आसान लाइसेंसिंग और विदेशी टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप जैसे कदमों की घोषणा हो सकती है। इसके साथ ही सार्वजनिक और निजी कंपनियों को मिलकर रेयर अर्थ मैग्नेट की पूरी वैल्यू चेन तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इससे न सिर्फ आयात कम होगा, बल्कि देश में रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे।

क्या है एक्सपर्ट की राय

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार बजट 2026 में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव देती है, तो यह भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि यह एक लंबी दौड़ है और नतीजे तुरंत नहीं मिलेंगे। फिर भी, बजट में की गई मजबूत शुरुआत भारत को आने वाले सालों में इस अहम सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

ग्लोबल सप्लाई पर चीन का दबदबा

चीन इस सेक्टर में दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है। ग्लोबल सप्लाई पर उसका दबदबा है। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में जब-जब जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा, तब-तब भारत समेत कई देशों को चिंता हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी चीन के पास दुनिया का करीब 70 पर्सेंट रेयर अर्थ मैग्नेट माइनिंग कैपेसिटी है। जबकि रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग की लगभग 90 पर्सेंट ताकत भी अपने हाथ में रखे हुए है।

कुछ ऐसी है भारत की स्थिति

भारत के पास दुनिया के रेयर अर्थ भंडार का 6 से 8 पर्सेंट यानी लगभग 69 लाख टन मौजूद है। हालांकि, इसके बावजूद वैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी 1 पर्सेंट से भी कम है। वजह यह है कि भारत अभी वैल्यू चेन के निचले हिस्से तक ही सीमित है। यानी कच्चा माल बाहर जाता है और ज्यादा कीमत वाले उत्पाद वापस मंगाने पड़ते हैं, जिससे भारत को असली आर्थिक फायदा नहीं मिल पाता।

7,280 करोड़ रुपये की मंजूरी

केंद्र सरकार ने इस दिशा में कदम उठाते हुए पिछले महीने ही घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत देश में रेयर अर्थ मैग्नेट बनाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। इस फैसले की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार का लक्ष्य हर साल 6,000 टन रेयर अर्थ मैग्नेट की उत्पादन क्षमता तैयार करना है।

कहां-कहां होता है इसका इस्तेमाल

रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर हाई-टेक इंडस्ट्री तक हर जगह हो रहा है। ये इलेक्ट्रिक मोटर और जनरेटर की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि हार्ड डिस्क ड्राइव में डेटा स्टोरेज के लिए बेहद जरूरी होते हैं। मेडिकल सेक्टर में MRI मशीन इन्हीं मैग्नेट पर काम करती है। वहीं, हेडफोन, माइक्रोफोन जैसे ऑडियो डिवाइसेज में बेहतर साउंड क्वालिटी के लिए इनका इस्तेमाल होता है।

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