
केंद्रीय बजट में इस बार सरकार ने अपने खर्च की पूरी तस्वीर सामने रख दी है। निर्मला सीतारमण के इस बजट में साफ दिख रहा है कि फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और आम आदमी से जुड़े सेक्टरों पर है। बजट के आंकड़ों के मुताबिक, सरकार का सबसे ज्यादा खर्च परिवहन और रक्षा जैसे बड़े क्षेत्रों में जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स आने वाले समय में और रफ्तार पकड़ सकते हैं। सरकार का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित देश ही तेज आर्थिक विकास की बुनियाद बनते हैं।
खर्च के आंकड़ों पर नजर डालें तो परिवहन सेक्टर सबसे ऊपर है, जहां करीब 5.98 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके ठीक बाद रक्षा बजट है, जिस पर 5.94 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे साफ है कि सरकार सीमाओं की सुरक्षा और सैन्य क्षमता को मजबूत करने पर कोई समझौता नहीं करना चाहती। वहीं, ग्रामीण विकास के लिए 2.73 लाख करोड़ रुपये और गृह मंत्रालय के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह खर्च ग्रामीण इलाकों में सड़क, आवास, रोजगार और सुरक्षा से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
खेती-किसानी और पढ़ाई-लिखाई को लेकर भी बजट में ठीक-ठाक ध्यान दिया गया है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए 1.62 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश को दिखाता है। वहीं, शिक्षा के लिए 1.39 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का जोर स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट तक सिस्टम को बेहतर बनाने पर है, ताकि युवा आने वाले समय की जरूरतों के हिसाब से तैयार हो सकें।
स्वास्थ्य, शहरी विकास और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर भी इस बजट में पीछे नहीं रहे। स्वास्थ्य क्षेत्र को 1.04 लाख करोड़ रुपये मिले हैं, जिससे अस्पताल, इलाज और मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। ऊर्जा सेक्टर के लिए 1.09 लाख करोड़ रुपये और शहरी विकास के लिए 85,522 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
आईटी और टेलीकॉम, उद्योग, सामाजिक कल्याण और वैज्ञानिक विभागों को भी बजट में हिस्सेदारी मिली है। खास बात यह है कि पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए अलग से 6,812 करोड़ रुपये रखे गए हैं। कुल मिलाकर, यह बजट इस बात का संकेत देता है कि सरकार एक साथ विकास, सुरक्षा और सामाजिक जरूरतों को साधने की कोशिश कर रही है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सके।
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