बजट 2026 की तारीख 1 फरवरी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सैलरीड टैक्सपेयर्स के बीच कन्फ्यूजन बढ़ता जा रहा है। सवाल वही पुराना है कि पुराने टैक्स रेजीम में बने रहें या नए टैक्स रेजीम में शिफ्ट हो जाएं? नए टैक्स सिस्टम में ज्यादा टैक्स-फ्री इनकम लिमिट और कम टैक्स स्लैब होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग पहले ही इसे अपना चुके हैं। हालांकि, जिन लोगों पर होम लोन की EMI है, जो किराया देते हैं, इंश्योरेंस प्रीमियम भरते हैं या PPF-ELSS जैसे लॉन्ग टर्म सेविंग्स में निवेश करते हैं, उनके लिए फैसला अब भी आसान नहीं है। आइए जानते हैं किनके लिए पुराना और नया टैक्स रेजीम बेहतर है। साथ ही विस्तार से एक्सपर्ट्स की राय भी जानते हैं।
पुराने टैक्स रेजीम किनके लिए बेहतर
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, पुराने टैक्स रेजीम की सबसे बड़ी ताकत उसमें मिलने वाली छूट और कटौतियां हैं। Tax2Win के CEO और फाउंडर अभिषेक सोनी बताते हैं कि पुराने सिस्टम में सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है, जिसमें PPF, EPF, ELSS और LIC जैसे निवेश शामिल हैं। इसके अलावा, सेक्शन 80D में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट, HRA और LTA जैसी सुविधाएं, खुद के मकान पर होम लोन के ब्याज की कटौती और सैलरीड लोगों के लिए करीब 50 हजार रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलती है। जिन लोगों के खर्च और निवेश ज्यादा हैं, उनके लिए पुराना सिस्टम आज भी फायदेमंद साबित होता है।
नए टैक्स रेजीम में ज्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन
दूसरी ओर नया टैक्स रेजीम कम टैक्स स्लैब और ज्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन (करीब 75 हजार रुपये) के साथ आता है। हालांकि, इसमें 80C, न 80D, HRA और LTA जैसी ज्यादातर पॉपुलर डिडक्शंस नहीं मिलतीं। नांगिया ग्लोबल के डायरेक्टर संजय कुमार का कहना है कि नया टैक्स सिस्टम धीरे-धीरे पॉपुलर तो हो रहा है, लेकिन लोगों की बदलती पर्सनल जरूरतों की वजह से सही विकल्प चुनना मुश्किल बना हुआ है। खासतौर पर मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स, जो सेविंग्स और होम ओनरशिप पर फोकस करते हैं, अब भी असमंजस में हैं।
क्या चाहते हैं एक्सपर्ट्स
बजट 2026 से टैक्सपेयर्स की उम्मीदें सिर्फ टैक्स स्लैब बदलने तक सीमित नहीं हैं। एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार एक बैलेंस्ड अप्रोच अपनाए। संजय कुमार का कहना है कि अगर नए टैक्स रेजीम में PF, हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन जैसी कुछ जरूरी डिडक्शंस को शामिल किया जाए, तो यह ज्यादा आकर्षक बन सकता है। वहीं, अभिषेक सोनी के मुताबिक, कई लोग पुराने टैक्स रेजीम में डिडक्शन लिमिट बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलता रहे। ईटी में छपी एक खबर के अनुसार, टैक्स फाइलिंग को आसान और नियमों को ज्यादा स्पष्ट बनाने की मांग भी बजट 2026 से जुड़ी बड़ी उम्मीदों में शामिल है।