Cancer Drug Shortage: कैंसर की दवाओं के बढ़ेंगे दाम, केंद्र सरकार ने दी कीमत बढ़ाने की मंजूरी

Cancer Drug Shortage In India: केंद्र सरकार ने कैंसर की आवश्यक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इससे प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाओं पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा। इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर रोगियों के इलाज के खर्च को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

Jitendra Singh( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
अपडेटेड10 Jun 2026, 08:21 PM IST
Cancer Drug Shortage In India: कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवाएं महंगी हो जाएंगी।
Cancer Drug Shortage In India: कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवाएं महंगी हो जाएंगी।

Cancer Drug Shortage In India: देश में कैंसर इलाज व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ महत्वपूर्ण दवाओं की कीमत बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) जैसी जीवनरक्षक दवाओं की भारी कमी देशभर के अस्पतालों और कैंसर केंद्रों में महसूस की जा रही है। सरकार का मानना है कि कीमतों में संशोधन से दवा निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और बाजार में आपूर्ति सुधर सकेगी।

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल्स ने 7 जून को नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के मेंबर सेक्रेटरी को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया, "माननीय मंत्री (रसायन और उर्वरक) ने इन दवाओं के लिए DPCO, 2013 के पैरा 19 का इस्तेमाल करने की सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।

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कीमतों में बदलाव को पैरा 19 के तहत मंज़ूरी दी गई थी। यह एक खास प्रावधान है जो सरकार को सामान्य कीमत-नियंत्रण व्यवस्था से हटकर दखल देने की इजाज़त देता है, जब उसे लगता है कि जरूरी दवाओं की उपलब्धता या उन्हें किफायती बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है।

क्यों पैदा हुआ कैंसर की दवाओं का संकट?

पिछले कुछ महीनों से देशभर में सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की उपलब्धता लगातार घट रही है। ये दोनों प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाएं हैं और फेफड़े, सर्वाइकल, ओवेरियन, सिर एवं गर्दन, ब्लैडर तथा कई अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं का विकल्प सीमित है और कई मामलों में ये इलाज का सबसे प्रभावी हिस्सा होती हैं।

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प्लैटिनम की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी

दवा उद्योग के अनुसार इस संकट की सबसे बड़ी वजह प्लैटिनम की रिकॉर्ड कीमतें हैं। पिछले एक वर्ष में प्लैटिनम की कीमत लगभग 2,000 प्रति ग्राम से बढ़कर 5,000 प्रति ग्राम से ऊपर पहुंच गई है। चूंकि इन दवाओं के निर्माण में प्लैटिनम प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है। उद्योग जगत का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य सीमा के कारण कंपनियां बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा पा रही थीं, जिससे कई निर्माताओं के लिए उत्पादन घाटे का सौदा बन गया।

सरकार ने किन दवाओं को दी राहत?

रिपोर्ट के अनुसार दवा कंपनियों ने करीब 82 दवाओं की कीमतों में संशोधन की मांग की थी। अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श के बाद फिलहाल चार महत्वपूर्ण दवाओं के लिए मूल्य वृद्धि को मंजूरी दी गई है। इनमें कैंसर उपचार से जुड़ी दवाएं भी शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना और बाजार में उपलब्धता बढ़ाना है।

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अस्पतालों में प्रभावित हो रहा इलाज

देश के कई बड़े अस्पतालों और कैंसर केंद्रों ने दवाओं की कमी को लेकर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मामलों में मरीजों की थेरेपी टालनी पड़ रही है या उपलब्ध स्टॉक को लंबे समय तक चलाने के लिए डोज में बदलाव करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि यह संकट लंबा खिंचता है तो हजारों मरीजों के इलाज पर असर पड़ सकता है।

मरीजों की बढ़ सकती है आर्थिक चुनौती

हालांकि कीमत बढ़ाने का फैसला आपूर्ति सुधारने के लिए लिया गया है, लेकिन इससे मरीजों का खर्च भी बढ़ सकता है। कैंसर का इलाज पहले ही काफी महंगा माना जाता है और दवा कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवारों की जेब पर पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को आपूर्ति बहाल करने के साथ-साथ मरीजों के लिए राहत उपायों पर भी विचार करना चाहिए।

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दवा कंपनियों को क्या मिलेगा फायदा?

फार्मा कंपनियों का कहना है कि बढ़ी हुई कीमतें उत्पादन को फिर से बढ़ाया जाएगा। कुछ कंपनियों ने लागत बढ़ने के कारण उत्पादन कम कर दिया था, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से निर्माण रोक दिया था। कीमतों में संशोधन के बाद उत्पादन क्षमता बढ़ने और बाजार में दवाओं की उपलब्धता सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।

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