Indian economy growth data transparency: भारत की आर्थिक सेहत और जीडीपी के आंकड़ों को लेकर अक्सर बहस छिड़ी रहती है। अब देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इन आलोचनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत अपने जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान लगाने के लिए उन संदिग्ध तरीकों का इस्तेमाल नहीं करता, जो कई विकसित देश अपनाते हैं। नागेश्वरन ने कहा कि जब देश की ग्रोथ उम्मीद से बेहतर होती है, तभी डेटा पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।
विदेशी तरीकों पर क्यों नहीं उठते सवाल?
नागेश्वरन ने एक वर्कशॉप में कहा कि डेटा जुटाने और अनुमान लगाने की हर पद्धति की अपनी सीमाएं होती हैं। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि हम अपनी विधियों पर तो सवाल उठाते हैं, लेकिन दूसरे देशों के तरीकों पर चुप रहते हैं। नागेश्वरन के मुताबिक, कई विकसित देश 'चेन प्राइस इंडेक्स' जैसी तकनीक अपनाते हैं जिसमें कीमतों का भार बार-बार बदला जाता है। भारत ने जानबूझकर ऐसे संदिग्ध तरीकों से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी हीन भावना को छोड़कर अपनी सांख्यिकीय व्यवस्था (Statistical system) पर भरोसा करना चाहिए।
2026 में बदल जाएगा जीडीपी का आधार वर्ष
सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) अब आंकड़ों को और सटीक बनाने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी में है। मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि 27 फरवरी, 2026 को जीडीपी की एक नई सीरीज जारी की जाएगी। इसमें आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया जाएगा। इसी तरह, खुदरा महंगाई (CPI) का आधार वर्ष भी 2012 से बदलकर 2024 किया जाएगा। औद्योगिक उत्पादन (IIP) के लिए भी नया आधार वर्ष 2022-23 होगा।
आलोचना करना कुछ लोगों के डीएनए में है
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ओर से भारतीय डेटा की गुणवत्ता पर उठाए गए सवालों के बीच सीईए का यह बयान काफी अहम है। नागेश्वरन ने कहा कि सभी सांख्यिकीय आंकड़े अंततः अनुमान ही होते हैं। अगर ये आंकड़े पारदर्शी हैं और अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर दिखाते हैं, तो हमें इनके मूल्यांकन में परिपक्वता दिखानी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग सिर्फ आलोचना करने के लिए तैयार बैठे हैं, यह उनके डीएनए का हिस्सा है और इसे बदला नहीं जा सकता।
नए क्षेत्रों पर भी सरकार की नजर
मंत्रालय अब डिजिटल इकोनॉमी, पर्यटन और संस्कृति जैसे क्षेत्रों के लिए 'सैटेलाइट अकाउंट' बनाने पर काम कर रहा है। इसके लिए राज्यों के साथ मिलकर डेटा जुटाया जा रहा है। सौरभ गर्ग ने कहा कि हमारा मकसद मजबूत और भरोसेमंद डेटा पेश करना है। उन्होंने बताया कि आधार वर्ष बदलने से विकास दर के आंकड़ों पर कोई बहुत बड़ा या अप्रत्याशित असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। भारत 2029 तक वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने वाले 'सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स 2025' के साथ कदम मिलाने की तैयारी कर रहा है।