CEA on Falling Rupee: रुपये में गिरावट से सरकार क्यों नहीं है परेशान, आर्थिक सलाहकार ने दिया जवाब

CEA on Falling Rupee: भारतीय करेंसी गिरते हुए बुधवार को 90.30 प्रति डॉलर के लाइफ टाइम लो-लेवल को छू गई, लेकिन केंद्र सरकार इस गिरावट से ज्यादा परेशान नहीं है। ऐसा क्यों है, इसकी वजह चीफ इकनॉमिक एडवाइजर ने बताई है। आइये चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेश्वरन ने क्या कहा।

Jitendra Singh
अपडेटेड4 Dec 2025, 06:43 PM IST
CEA on Falling Rupee: अगले साल तक रुपये में सुधार की उम्मीद है।
CEA on Falling Rupee: अगले साल तक रुपये में सुधार की उम्मीद है। (Livemint)

CEA on Falling Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। बुधवार को यह फिसलते हुए 90 प्रति डॉलर के अब तक के निचले स्तर पर आ गया। पिछले कुछ दिनों से इसमें गिरावट का सिलसिला जारी था। अब यह रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंच गया है। रुपये के जमीन पर आने से बहुत से लोग चिंतित नजर आए। लेकिन इस गिरावट से सरकार की नींद खराब नहीं हो रही है। यानी रुपये के गिरावट में सरकार को कोई टेंशन नहीं है।

चीफ इकनॉमिक एडवाइजर (Chief Economic Adviser) वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) का कहना है कि रुपये की कमजोरी फिलहाल न तो महंगाई बढ़ा रही है और न ही निर्यात (Export) पर कोई निगेटिव असर डाल रही है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले साल तक इसमें सुधार होगा।

रुपये में 5% की गिरावट

बता दें कि वर्ष 2025 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 5 फीसदी की गिरावट आई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी और बैंकों द्वारा डॉलर की निरंतर खरीद के बीच बुधवार को कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 34 पैसे गिरकर 90.30 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अनुपस्थिति ने स्थानीय इकाई पर और दबाव डाला है।

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अगले साल सुधार की उम्मीद क्यों

CEA नागेश्वरन ने उम्मीद जताई कि डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति (Rupee Vs Us Dollar) अगले साल बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू फैक्टर्स इसमें सुधार ला सकते हैं। विदेशी फंड्स की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों और भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी जैसे कारणों से रुपये पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही बाजार में यह भी चर्चा है कि RBI की ओर से रुपये को रोकने के लिए कोई बड़ा दखल नहीं दिया जा रहा है। लेकिन CEA को भरोसा है कि यह स्थिति लंबे समय तक रहने वाली नहीं है।

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अर्थव्यवस्था मजबूत

रुपये के लगातार कमजोर होने से चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। बढ़ते FDI, महंगाई दर (Inflation) के काबू में रहने और मजबूत सर्विस सेक्टर ग्रोथ से संकेत मिलता है कि रुपये की कमजोरी फिलहाल किसी बड़े संकट में बदलने वाली नहीं है। उम्मीद है कि अगले साल के शुरुआत से रुपये की हालत में सुधार शुरू हो जाएगा।

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