US China Relations: चीन ने अमेरिका के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ताइवान को रिकॉर्ड 11.1 अरब डॉलर के हथियार बिक्री पैकेज को मंजूरी दी है। इससे चीन भड़क गया है। जवाब में चीन ने 10 लोगों और 20 अमेरिकी डिफेंस कंपनियों पर बैन लगा दिया है। इन प्रतिबंधित कंपनियों में बोइंग (Boeing) की सेंट लुइस ब्रांच भी शामिल है। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में चेतावनी दी कि ताइवान मुद्दे पर चीन को उकसाने की किसी भी कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन उपायों से कंपनियों और व्यक्तियों की चीन में मौजूद सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाएगा। घरेलू संगठनों और व्यक्तियों को उनके साथ व्यापार करने से रोक दिया जाएगा। इसमें आगे कहा गया है कि इस लिस्ट में शामिल लोगों, जिनमें डिफेंस फर्म एंडुरिल इंडस्ट्रीज के फाउंडर और बैन की गई फर्मों के नौ सीनियर एग्जीक्यूटिव शामिल हैं, पर चीन में एंट्री करने पर भी बैन लगा दिया गया है।
इन कंपनियों पर भी गिरी गाज
इसके अलावा नॉरथ्रॉप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्पोरेशन (Northrop Grumman Systems Corporation) और एल3 हैरिस मैरीटाइम सर्विसेज (L3 Harris Maritime Services) जैसी कंपनियां भी इस कार्रवाई के दायरे में आई हैं। पिछले हफ्ते अमेरिका ने ताइवान को 11.1 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री की घोषणा की थी, जिसके बाद चीन ने ये एक्शन लिया है।
चीन ने दी चेतावनी
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘ताइवान का मुद्दा चीन के मूल हितों का हिस्सा है। चीन-अमेरिका संबंधों में ये ऐसी रेड लाइन है, जिसे क्रॉस नहीं किया जा सकता है।’ बीजिंग ने ताइवान के मामले में किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का कड़ा जवाब देने की बात कही है। चीन ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह ताइवान को हथियार न दे। चीन ने यह भी कहा है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता की मांग करने वाली अलगाववादी ताकतों को गलत संकेत देना बंद करे। बयान में कहा गया कि चीन राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाता रहेगा।
अमेरिका-ताइवान के बीच क्या हुई डील?
हाल ही में अमेरिका ने ताइवान को 11.1 अरब डॉलर से ज्यादा कीमत के हथियार बेचने की मंजूरी दी है। इसमें मिसाइल, तोप, HIMARS लॉन्चर और ड्रोन शामिल हैं। इसे लेकर ही चीन भड़का हुआ है। उसका कहना है कि अमेरिका का ये कदम उसकी संप्रभुता के खिलाफ है। उधर, ताइवान को प्रस्तावित हथियार बिक्री को अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत है।