अब चीनी कंपनी भी निकली दगाबाज! मुकेश अंबानी की रिलायंस को दिया इतना बड़ा 'धोखा'

चीन धोखे की फितरत से बाज नहीं आ रहा है। उसने पहले तो सीमा विवाद को किनारे करते हुए नजदीक आने का संकेत दिया, लेकिन अपनी कंपनियों को टेक्नॉलजी ट्रांसफर करने से रोक दिया। अब मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को नई रणनीति पर काम करनी पड़ रही है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड21 Jan 2026, 05:50 PM IST
मुकेश अंबानी
मुकेश अंबानी (ANI)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वॉर छेड़ा तो भारत और चीन ने दूरियां कम करने के संकेत दिए। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सामने आई तस्वीर ने अमेरिकी प्रशासन को अच्छा-खासा झटका दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया था कि अमेरिका ने भारत को चीन के हाथों खो दिया।

धोखे की फितरत से बाज नहीं आ रहा है चीन

भारत और चीन ने एक-दूसरे पर लगाए प्रतिबंधों में ढील देने का सिलसिला शुरू किया, लेकिन चीन तो चीन है, वह फिर रंग दिखाने लगा है। चीन की बैटरी बनाने वाली कंपनी श्यामेन हिथियम एनर्जी स्टोरेज टेक्नॉलजी को ने मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. से किया करार तोड़ दिया। चीनी कंपनी के इस धोखे से रिलयांस के बड़े प्रॉजेक्ट को फिलहाल तगड़ा झटका लगा है।

चीनी कंपनी ने आरआईएल से तोड़ा करार

इकनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, मुकेश अंबानी को तो रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध से नुकसान हुआ और अब लिथियम आयन बैटरी बनाने की तकनीक साझा करने पर चीन की पाबंदी ने नई मुश्किल खड़ी कर दी। श्यामेन हिथियम एनर्जी स्टोरेज टेक्नॉलजी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को सेल टेक्नॉलजी का लाइसेंस देने से इनकार कर दिया।

भारत में लिथियम आयन सेल बनाने के लिए आरआईएल और इस चीनी कंपनी के बीच पार्टनरशिप पर बातचीत चल रही थी। इसके तहत चीनी कंपनी अपने भागीदार आरआईएल को सौर ऊर्जा का भंडारण और इसके इस्तेमाल से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की टेक्नॉलजी ट्रांसफर करती। लेकिन चीनी कंपनी श्यामेन हिथियम एनर्जी स्टोरेज टेक्नॉलजी ने बातचीत के बीच से ही कदम वापस खींच लिया।

भारत को निर्भर बनाए रखना चाहता है चीन

ईटी पर प्रकाशित आर्टिकल के लेखक एंडी मुखर्जी ने इस बात की आशंका जताई है कि चीन इलेक्ट्रिक वेहिकल्स इंडस्ट्री (ईवी इंडस्ट्री) के लिए जरूरी बैटरी बनाने की टेक्नॉलजी ट्रांसफर पर भी बैन लगाएगा। दरअसल, चीन चाहता है कि भारत कभी लिथियम आयन सेल और ईवी बैटरी बनाने के मामले में अपने पांव पर कभी खड़ा नहीं हो सके ताकि भारत को उसकी बिक्री बेधड़क होती रहे। भारत में लिथियम आयन सेल का आयात ढाई गुना बढ़कर 3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें 75 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले चीन की है। यानी चीन के लिए भारत लिथियम आयन सेल या ईवी बैटरी का बड़ा मार्केट है।

चीन चाहता है कि बदलते दौर में भी भारत की निर्भरता उस पर कायम रहे। इस कारण सिर्फ आरआईएल नहीं, बल्कि एक्साइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी अन्य कंपनियों के लिए भी चीनी कंपनियों से टेक्नॉलजी हासिल करने की राह में कठिनाइयां बढ़ने वाली हैं। इसी तरह, अमारा राजा एनर्जी और मोबिलिटी लिमिटेड जैसी कंपनियों के सामने भी बड़ी चुनौती है। इन दोनों कंपनियों का फिलहाल गोशन हाई टेक कंपनी की एक इकाई हेफेई के साथ लाइसेंसिंग एग्रीमेंट है।

चीनी कंपनी के बिना आगे बढ़ रही है आरआईएल

उधर, रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि उसने चीनी कंपनी की पार्टनरशिप के बिना भी अपने प्रॉजेक्ट पर आगे बढ़ने के विकल्प पर काम कर रही है। आरआईएल 40 गीगीवाट आवर बैटरी स्टोरेज सिस्टम असेंबली और सेल मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री लगा रही है। कंपनी ने अपनी ताजा तिमाही नतीजों की रिपोर्ट में कहा है कि उसे प्रॉडक्शन लाइन के लिए जरूरी इक्विपमेंट मिल चुके हैं और वह अपनी वार्षिक भंडारण क्षमता 100 गीगावाट आवर तक ले जाने की योजना पर काम कर रही है।

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