Condom Price Hike: सिर्फ किचन नहीं आपके बेडरूम तक पहुंच रहा ईरान-अमेरिका तनाव का असर! बढ़ेंगे कंडोम के दाम, जानें वजह

Condom Price Hike: ईरान-अमेरिका जंग का असर अब भारत की कंडोम इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत के कारण प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है। इससे कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड3 Apr 2026, 02:05 PM IST
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, अब कंडोम बनाना और खरीदना दोनों होगा महंगा (सांकेतिक तस्वीर)
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, अब कंडोम बनाना और खरीदना दोनों होगा महंगा (सांकेतिक तस्वीर)(Freepik)

Condom Price Hike: ईरान-अमेरिका के बीच चल रही जंग का असर अब सिर्फ पेट्रोल, डीजल या गैस सिलेंडर तक सीमित नहीं रहा। धीरे-धीरे इसका प्रभाव उन सेक्टर्स तक पहुंच रहा है, जिनके बारे में आमतौर पर कोई सोचता भी नहीं। अब इस संकट की मार सीधे भारत की कंडोम मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर पड़ने लगी है, जिससे प्रोडक्शन से लेकर कीमतों तक सब कुछ प्रभावित हो सकता है।

युद्ध का कंडोम इंडस्ट्री से क्या लेना-देना?

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर आवाजाही पर पाबंदी लगा दी गई है। यह रास्ता कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई के लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन है। कंडोम बनाने में पेट्रोकेमिकल्स का बहुत बड़ा रोल होता है और इसी रास्ते से आने वाले माल की सप्लाई अब पूरी तरह चरमरा गई है।

कंडोम बनाने के लिए दो मुख्य चीजें बहुत जरूरी हैं:

  • सिलिकॉन ऑयल (Silicone Oil): यह लुब्रिकेशन के काम आता है।
  • एनहाइड्रस अमोनिया (Anhydrous Ammonia): यह वह केमिकल है जो कंडोम को फटने से बचाता है और उसे मजबूती देता है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की वजह से इन दोनों केमिकल्स की सप्लाई चेन टूट गई है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए समय पर माल मंगाना मुश्किल हो गया है।

बढ़ती लागत और घटता मुनाफा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंडोम इंडस्ट्री में कच्चे माल की कमी और लॉजिस्टिक्स में देरी के कारण प्रोडक्शन कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले समय में कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन इससे बिक्री पर भी असर पड़ सकता है।

बड़ी कंपनियों पर मंडराता खतरा

भारत का कंडोम उद्योग कोई छोटा-मोटा सेक्टर नहीं है; यह करीब $860 मिलियन (लगभग 7,000 करोड़ रुपये) का बाजार है, जहां हर साल 400 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स बनाई जाती हैं। इस सप्लाई शॉक का असर भारत की दिग्गज कंपनियों पर पड़ने वाला है:

  • HLL Lifecare Ltd: यह सरकारी कंपनी अकेले साल में 221 करोड़ कंडोम बनाती है।
  • Mankind Pharma और Cupid Ltd: ये कंपनियां भी मार्केट लीडर हैं और कच्चे माल की कमी के कारण इनके प्रोडक्शन प्लान और डिलीवरी शेड्यूल बिगड़ रहे हैं।

पैकेजिंग का बढ़ा खर्च

कच्चे माल की कमी के अलावा, कंडोम की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले PVC फॉयल और एल्युमीनियम फॉयल के दाम भी आसमान छू रहे हैं, जिससे कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन पूरी तरह सिकुड़ गया है।

सरकार का फैसला: प्राथमिकता किसे मिलेगी?

हाल ही में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में सरकार ने संकेत दिए हैं कि पेट्रोकेमिकल संसाधनों के आवंटन में 35% तक की कटौती की जा सकती है। सरकार अब उपलब्ध संसाधनों को उन सेक्टर्स की तरफ मोड़ रही है जिन्हें 'हाई प्रायोरिटी' माना जाता है। ऐसे में कंडोम मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स के लिए कच्चे माल की किल्लत और बढ़ सकती है।

क्या बढ़ेंगे कंडोम के दाम?

ईरान-अमेरिका युद्ध को अप्रैल में दूसरा महीना लग चुका है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध खत्म करने की इच्छा जताई है, लेकिन साथ ही ईरान पर हमले तेज करने के संकेत भी दिए हैं। अनिश्चितता के इस माहौल में एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में कंडोम की कीमतों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर सेल्स (बिक्री) पर पड़ेगा, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिए से एक चिंता का विषय हो सकता है।

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