अगर आप अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए अभी से प्लानिंग करने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। दरअसल, भारत में उच्च शिक्षा की लागत महंगाई से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट जैसे कोर्स की फीस हर साल 10 से 12 पर्सेंट तक बढ़ रहे हैं। जबकि महंगाई दर 4 से 6 पर्सेंट के आसपास है। इसी वजह से अब कई माता-पिता बच्चों के छोटे होने से ही निवेश शुरू कर रहे हैं। कोलकाता के आकाश समंता अपने पांच साल के बेटे के लिए PPF में निवेश कर रहे हैं। वहीं, बेंगलुरु के रोशन सेठी ने इक्विटी म्यूचुअल फंड SIP, इंश्योरेंस और किराये की आमदनी को जोड़कर पढ़ाई की मजबूत तैयारी कर ली है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ जल्दी निवेश शुरू करना काफी नहीं है, सही प्लानिंग ज्यादा जरूरी है। भविष्य की लागत का अंदाजा लगाना इसका पहला कदम है। मान लीजिए आज किसी इंजीनियरिंग कोर्स की फीस 20 लाख रुपये है, तो 13 साल बाद यही खर्च बढ़कर करीब 70 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में निवेश का तरीका भी सोच-समझकर चुनना चाहिए। फाइनेंशियल प्लानर्स मानते हैं कि म्यूचुअल फंड को शिक्षा प्लान का ‘ग्रोथ इंजन’ बनाना चाहिए क्योंकि लंबे समय में यही महंगाई को मात दे सकते हैं। वहीं, इंश्योरेंस का काम सुरक्षा देना है, न कि रिटर्न कमाना।
सुकन्या समृद्धि योजना बेहतर ऑप्शन
लड़की के लिए सुकन्या समृद्धि योजना एक सुरक्षित विकल्प मानी जाती है। इसमें गारंटीड और टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। हालांकि, इसमें पैसा निकालने की शर्तें सख्त होती हैं। वहीं, हाल में शुरू हुई NPS वात्सल्य योजना को लेकर राय बंटी हुई है। यह मार्केट से जुड़ी स्कीम है, लेकिन इसमें 20 पर्सेंट पैसा एन्युटी में फंस जाता है, जो पढ़ाई जैसे बड़े खर्च के वक्त ज्यादा काम का नहीं होता। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह स्कीम रिटायरमेंट के लिए बेहतर है, शिक्षा के लिए नहीं।
समय रहते करें जोखिम कम
जोखिम कम करने के लिए निवेश का संतुलन समय के साथ बदलना जरूरी है। जब बच्चे की कॉलेज में एंट्री में 15 साल बाकी हों, तब 70 से 80 पर्सेंट पैसा इक्विटी में रखा जा सकता है। 10 साल बाकी रहने पर इक्विटी घटाकर 60 पर्सेंट कर देनी चाहिए। और जैसे-जैसे लक्ष्य नजदीक आए, पैसा सुरक्षित विकल्पों जैसे डेट फंड, FD या कैश में शिफ्ट कर देना चाहिए। दो साल पहले इक्विटी से बाहर निकलना समझदारी है, ताकि बाजार गिरने पर पढ़ाई का सपना प्रभावित न हो। कुल मिलाकर, सही प्लानिंग, संतुलित निवेश और समय पर जोखिम घटाने से माता-पिता बच्चों की पढ़ाई को लेकर निश्चिंत रह सकते हैं।