
Iran-Israel War: ईरान में जारी युद्ध और उससे पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव का असर अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की वजह से भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। आज (19 मार्च 2026) सुबह कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज़्यादा की तेजी दर्ज की गई है। इसकी वजह ये रही कि पश्चिम एशिया में अहम ऊर्जा ढांचे पर हुए नए हमलों से आपूर्ति में बड़े पैमाने पर रुकावट आने का डर बढ़ गया।
संघर्ष का रुख़ अब ऊर्जा ढाँचे को निशाना बनाने की ओर मुड़ गया है। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में थोड़ी-सी भी बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है। ईरान के 18 दिनों के युद्ध के दौरान भारत फरवरी 2026 की तुलना में करीब दोगुनी कीमत पर कच्चा तेल खरीद रहा है। ऐसे में निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
सुबह 6:20 बजे, इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 111.78 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके पिछले बंद भाव से 4.10% ज़्यादा था। NYMEX पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 3.37% बढ़कर 99.57 डॉलर प्रति बैरल हो गया। ब्रेंट क्रूड के दाम 111.863 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए हैं। यह तेजी कितनी व्यापक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड में लगभग 55.95 फीसदी और बीते एक साल में 55.43 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। अमेरिकी बेंचमार्क की बात करें, तो WTI क्रूड भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। यह 3.35 डॉलर (लगभग 3.48 फीसदी) की बढ़त के साथ 99.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है और जल्द ही 100 डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है।
ईरान का साउथ पार्स क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र माना जाता है। इस जगह पर इजराइल की ओर से हमला किया गया है। इसके जवाब में ईरान ने कतर के 'रास लफ़ान' औद्योगिक शहर में हमला किया। यह येक प्रमुख वैश्विक केंद्र है। साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजराइल के हमलों के बाद, कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने कहा कि ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले "वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा हैं"।
कतर एनर्जी ने एक आधिकारिक बयान में हमले की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमले हुए हैं, जिसके बाद तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों को तैनात किया गया। आग पर काबू पाने की कोशिश की गई है और व्यापक नुकसान हुआ है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का सबसे बड़ा असर भारत के आयात बिल पर पड़ता है। अगर कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होती है, तो भारत का आयात बिल करीब 15,000 करोड़ रुपये सालाना बढ़ सकता है। अगर कीमत 69 डॉलर से बढ़कर 142 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो देश का आयात बिल करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये सालाना बढ़ सकता है।
यानी भारत को रोजाना लगभग 288 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। दरअसल, फरवरी 2026 में भारत जितना खर्च कर रहा था, 16 मार्च, 2026 को उससे करीब 288 करोड़ रुपये ज्यादा भुगतान करना पड़ा है।
ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 फरवरी और 11 मार्च के आंकड़ों की तुलना करें तो दुनिया के कम से कम 85 देशों में पेट्रोल की कीमत बढ़ी है। 7 मार्च, 2026 को ईरान युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद पूरे भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये का इजाफा हुआ, जबकि कमर्शियल 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत लगभग 115 रुपये बढ़े।
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