डाबर के '100%' दावे पर FSSAI की सख्ती, शहद - घी समेत कई प्रोडक्ट्स की बिक्री पर लगी रोक

Dabur FSSAI Notice: फूड रेगुलेटर FSSAI ने डाबर इंडिया को उन खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश दिया है, जिन पर कथित रूप से भ्रामक '100%' दावे किए गए हैं। रेगुलेटर का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं और खाद्य लेबलिंग नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड4 Aug 2026, 10:15 AM IST
FSSAI Crackdown:  कंपनी से 15 दिन के अंदर ATR जमा करने को कहा गया है।
FSSAI Crackdown: कंपनी से 15 दिन के अंदर ATR जमा करने को कहा गया है।

नई दिल्ली: देश की प्रमुख एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों में शामिल डाबर इंडिया (Dabur India) को बड़ा नियामकीय झटका लगा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कंपनी को ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का निर्देश दिया है, जिनकी पैकेजिंग पर '100%' जैसे दावे किए गए हैं। नियामक का मानना है कि इस तरह की ब्रांडिंग उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता, शुद्धता या संरचना को लेकर भ्रमित कर सकती है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब FSSAI खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और विज्ञापन दावों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI की कार्रवाई ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर, ऑर्गेनिक हनी, होममेड कोकोनट मिल्क, तिल का तेल (Sesame Oil) और गाय के घी (Cow Ghee) सहित उन उत्पादों पर केंद्रित है, जिनकी पैकेजिंग पर '100%' का दावा किया गया था। नियामक का कहना है कि ऐसे दावे खाद्य लेबलिंग नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए।

जानिए क्या है पूरा मामला

एफएसएसएआई के मुताबिक डाबर अपनी वेबसाइट और कुछ प्रोडक्ट्स पर “100% नैचुरल”, “100% Pure”, “100% प्योरिटी गारंटीड” और “100% ऑर्गेनिक” जैसे दावे कर रही थी। नियामक का कहना है कि एफएसएस (एडवर्टाइजिंग & क्लेम्स) रेग्युलेशन, 2018 के तहत इस तरह के “100%” दावे अस्पष्ट हैं, इन्हें पूरी तरह सत्यापित नहीं किया जा सकता और ये ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं।

FSSAI का कहना है कि ऐसे दावों को नियमों के अनुरूप और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होना चाहिए। नियामक ने कंपनियों को स्पष्ट और भ्रामकता से मुक्त लेबलिंग अपनाने पर जोर दिया है।

डाबर के लिए क्यों अहम है यह मामला?

डाबर भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक है और शहद, जूस, आयुर्वेदिक तथा फूड कैटेगरी में उसकी मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में नियामकीय कार्रवाई से कंपनी की ब्रांडिंग, मार्केटिंग रणनीति और कुछ उत्पादों की बिक्री पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कंपनी की ओर से आगे कानूनी या नियामकीय प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखा जा सकता है।

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FMCG सेक्टर के लिए क्या संकेत?

जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में FSSAI ने खाद्य उत्पादों पर किए जा रहे दावों, लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों को लेकर निगरानी बढ़ाई है। इससे पूरे एफएमसीजी उद्योग को अपने पैकेजिंग दावों और विज्ञापनों की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है।

पहले भी मिला था नोटिस

एफएसएसएआई ने बताया कि कंपनी को पहले भी नोटिस भेजकर इन दावों में सुधार करने के लिए कहा गया था। हालांकि नियामक के मुताबिक कंपनी की ओर से संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से अब संबंधित प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का निर्देश जारी किया गया है।

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15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

एफएसएसएआई ने डाबर इंडिया को निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों के भीतर बताए कि उसने इस आदेश के पालन के लिए क्या कदम उठाए हैं। इसके लिए कंपनी को एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करनी होगी। फिलहाल यह कार्रवाई भ्रामक दावों और लेबलिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है।

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