उभर नहीं रहा, उभर चुका है... एक्सपर्ट बोले 20-30 साल में दुनिया की नंबर 1 इकॉनमी बनेगा भारत

डेविड रुबेनस्टीन का कहना है कि मौजूदा दौर में दुनिया एक “बाइपोलर इकोनॉमिक वर्ल्ड” में जी रही है। अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वॉर और तनाव भले ही जारी हो, लेकिन इसके बावजूद भारत तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

Ashutosh Kumar
पब्लिश्ड23 Jan 2026, 02:57 PM IST
भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार
भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार

दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से भारत को लेकर दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों ने बेहद पॉजिटिव संकेत दिए हैं। प्राइवेट इक्विटी की दुनिया के दिग्गज कार्लाइल ग्रुप के को-फाउंडर डेविड रुबेनस्टीन और ब्लैकस्टोन के चेयरमैन एंड CEO स्टीफन श्वार्जमैन, दोनों का मानना है कि आने वाले 20-30 साल में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। इन निवेशकों के मुताबिक, युवा आबादी, स्थिर सरकार, लंबा ग्रोथ रनवे और निवेश के लिए तैयार माहौल भारत को अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से अलग खड़ा करता है। ईटी में छपी एक खबर के अनुसार, दावोस में बातचीत के दौरान यह साफ दिखा कि वैश्विक पूंजी भारत को अब सिर्फ एक उभरता बाजार नहीं, बल्कि भविष्य की सुपरपावर के रूप में देखने लगी है।

भारत तेजी से अपनी जगह बना रहा है

डेविड रुबेनस्टीन का कहना है कि मौजूदा दौर में दुनिया एक “बाइपोलर इकोनॉमिक वर्ल्ड” में जी रही है, जहां अमेरिका और चीन दो सबसे बड़ी ताकतें हैं। अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वॉर और तनाव भले ही जारी हो, लेकिन इसके बावजूद भारत तेजी से अपनी जगह बना रहा है। रुबेनस्टीन के मुताबिक, चाहे अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हों या जो बाइडेन जैसे डेमोक्रेट नेता, चीन को लेकर अमेरिका का रुख अब स्थायी रूप से सख्त हो चुका है। ऐसे माहौल में भारत को बड़ा फायदा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, जबकि चीन की आबादी वन-चाइल्ड पॉलिसी के कारण बूढ़ी और घटती जा रही है। अमेरिका की आबादी भी एजिंग की समस्या से जूझ रही है। यही डेमोग्राफिक एडवांटेज भारत को आने वाले दशकों में दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्था बना सकता है।

भारत पूरी तरह से एमर्ज हो चुका है

दूसरी ओर स्टीफन श्वार्जमैन ने तो साफ शब्दों में कहा कि भारत अब “इमर्जिंग मार्केट” नहीं रहा, बल्कि पूरी तरह से “एमर्ज” हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय अभी करीब 3,000 डॉलर है, जबकि अमेरिका में यह 70,000 डॉलर और चीन में 13,000 डॉलर के आसपास है। इसका मतलब है कि भारत के पास आगे बढ़ने के लिए लंबा रास्ता और अपार संभावनाएं हैं। श्वार्जमैन ने यह भी कहा कि शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का आना-जाना शॉर्ट-टर्म फैक्टर है, जबकि भारत की असली कहानी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की है। साथ ही, उन्होंने AI को बिजली और स्टीम इंजन जैसी क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी बताया और कहा कि भारत इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उठाने वाले देशों में शामिल होगा।

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