Dollar vs Rupee: आयातकों की लगातार डॉलर मांग के कारण रुपये में गिरावट देखने को मिल रही है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 0.4 फीसदी कमज़ोर हो गया। मंगलवार को भारतीय रुपया और गिर गया, जबकि फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले पर फोकस होने के कारण डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई। ब्लूमबर्ग के अनुसार, सोमवार को घरेलू करेंसी डॉलर के मुकाबले 9 पैसे गिरकर 88.33 पर खुला। इस साल अब तक करेंसी में 3.18 फीसदी की गिरावट आई है।
आयातकों की ओर से महीने के अंत में डॉलर की बढ़ती मांग और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी के चलते मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 88.40 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। स्थानीय मुद्रा 14 अक्टूबर के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई, लेकिन कुछ गिरावट के बाद इसमें कुछ कमी आई। ट्रेडर्स का मानना है कि इस सुधार का श्रेय भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप को दिया जा सकता है।
अक्टूबर के शुरुआत में रुपये में रिकवरी
रॉयटर्स में छपी खबर के मुताबिक, महीने की शुरुआत में सेंट्रल बैंक के मजबूत दखल के कारण रुपये में थोड़ी रिकवरी हुई थी, लेकिन लगातार इंपोर्टर्स की हेजिंग और 88 से नीचे गिरने के बाद इस पर दबाव बना हुआ है। एक बड़े प्राइवेट बैंक के ट्रेडर ने कहा कि NDF मार्केट में पोजीशन की मैच्योरिटी से डॉलर की बिड्स में बढ़ोतरी एक और मुश्किल है जिससे रुपये को अब और ज्यादा संघर्ष करना पड़ सकता है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप से आने वाले दिनों में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। कारोबारियों का कहना है कि आरबीआई की तरफ से डॉलर बिकवाली की काफी हद तक रुपये को मदद मिली और एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।
डॉलर में भी कमजोरी
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपया 88.34 प्रति डॉलर पर खुला और बाद में 88.40 के स्तर तक फिसल गया। सोमवार को भी रुपया 36 पैसे टूटकर 88.19 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस बीच, अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले 0.12% गिरकर 98.66 पर आ गया।
डॉलर इंडेक्स 98.6 पर थोड़ा नीचे था, लेकिन महीने के आखिर तक इसमें लगभग 1% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस बीच, एशियाई करेंसीज़ में मिला-जुला कारोबार हुआ। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील को लेकर उम्मीदों से ऑफशोर चीनी युआन एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।