भारत को 'डेड इकॉनमी' बताने वाले ट्रंप के अमेरिका की दुर्दशा, 'शटडाउन' से एयरपोर्ट्स ऑपरेशन पर संकट

US Shutdown: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहा था, लेकिन सच्चाई में अमेरिका बदहाली झेलने को मजबूर है। ट्रंप सरकार अपने विभागों के संचालन के लिए पैसे नहीं दे पा रही है। इस कारण अमेरिका के एयरपोर्ट्स पर उड़ानों में कटौती की जा रही है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड7 Nov 2025, 10:02 AM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।(AP)

India-US Economy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकॉनमी' कहा था। कुछ महीने नहीं बीते कि अमेरिकी अर्थव्यस्था की बदहाली सामने आ गई। ट्रंप ने जब भारत को डेड इकॉनमी कहा, तब से न जाने कितने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत को वैश्विक आर्थिक प्रगति का अगुवा करार दिया है। लेकिन अब अमेरिका में आर्थिक संकट गहराने के संकेत मिलने लगे हैं। 'शटडाउन' के कारण अमेरिका के 40 हवाई अड्डों के पूर्ण संचालन में दिक्कत शुरू हो गई है।

अमेरिका के 40 हवाई अड्डों पर कई उड़ानें होंगी कैंसल

एयरलाइनों को दी गई लिस्ट के अनुसार, अमेरिका में न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस और शिकागो सहित कुल 40 हवाई अड्डों पर सरकारी 'शटडाउन' के कारण शुक्रवार से उड़ानें कम हो जाएंगी। संघीय विमानन प्रशासन (FAA) ने बुधवार को घोषणा की कि वह यात्रा सुरक्षा बनाए रखने के लिए 40 हवाई अड्डों पर वायु यातायात को 10 प्रतिशत तक कम करेगा, क्योंकि 'शटडाउन' के कारण हवाई यातायात नियंत्रकों पर तनाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। शटडाउन का अर्थ है कि अमेरिका में सरकारी कामकाज के लिए पर्याप्त फंडिंग उपलब्ध नहीं है।

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अमेरिका के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स भी प्रभावित

प्रभावित होने वाले हवाई अड्डों में अमेरिका के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे आते हैं। इनमें अटलांटा, डेनवर, डलास, ऑरलैंडो, मियामी और सैन फ्रांसिस्को शामिल हैं। न्यूयॉर्क, ह्यूस्टन और शिकागो जैसे कुछ सबसे बड़े शहरों में कई हवाई अड्डे प्रभावित होंगे। एफएए उन हवाई यातायात नियंत्रकों पर दबाव कम करने के लिए उड़ानों में कटौती कर रहा है जो 'शटडाउन' के दौरान बिना वेतन के काम कर रहे हैं और लगातार काम से छुट्टी ले रहे हैं।

सरकारी कर्मियों को वेतन नहीं दे पा रही है ट्रंप सरकार

नियंत्रकों को पहले ही एक वेतन नहीं मिल पाया है और अगले सप्ताह भी उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला है क्योंकि 'शटडाउन' लंबा खिंच रहा है और उन पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। एफएए उड़ानों में देरी कर रहा है क्योंकि हवाई अड्डों या उसके अन्य प्रतिष्ठानों में नियंत्रकों की कमी है। एयरलाइनों ने कहा कि वे यात्रियों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम से कम करने की कोशिश करेंगी।

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संकट में एयरलाइंस कंपनियां, यात्रियों को वापस करेगी पैसे

यूनाइटेड एयरलाइंस ने कहा कि वह 737 जैसे छोटे विमानों का उपयोग करने वाले छोटे क्षेत्रीय मार्गों पर उड़ानों में कटौती पर ध्यान केंद्रित करेगी। यूनाइटेड एयरलाइंस और डेल्टा एयरलाइंस, दोनों ने कहा है कि वे उन यात्रियों को रकम वापसी की पेशकश करेंगी जो यात्रा नहीं करना चाहते, भले ही उन्होंने ऐसे टिकट खरीदे हों जिनका आमतौर पर रिफंड नहीं होता।

हजारों उड़ानें होंगी रद्द, मुश्किल में यात्री

विशेषज्ञों का अनुमान है कि सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों उड़ानें रद्द हो सकती हैं। 1 अक्टूबर से 'शटडाउन' शुरू होने के बाद से वायु यातायात नियंत्रक बिना वेतन के काम कर रहे हैं। सरकारी खर्चों के लिए जब पैसा खत्म हो जाता है, तो संसद से पैकेज को मंजूरी दिलानी होती है और ऐसा नहीं होने पर ‘शटडाउन’ लागू हो जाता है।

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ट्रंप जान लें भारत की अर्थव्यवस्था का हाल

इधर, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत के वृद्धि दर के अनुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। तो एशियन डेवलपेंट बैंक (ADB) ने पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान जताया है। एडीबी का कहना है कि भारतीय निर्यात पर अमेरिकी शुल्क का प्रभाव विशेष रूप से दूसरी छमाही की संभावनाओं को कम करेगा।

दूसरी तरफ, डेलॉयट इंडिया ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था के 6.7-6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया। उसने बढ़ती मांग एवं नीतिगत सुधारों को भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज वृद्धि का कारक बताया।

पहली तिमाही में 7.8% की दर से बढ़ी थी भारतीय अर्थव्यवस्था

ध्यान रहे कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत मजबूत घरेलू मांग और सतर्क व्यापक आर्थिक तथा वित्तीय नीतियों के दम पर वैश्विक जीडीपी वृद्धि में लगभग पांचवें हिस्से का योगदान करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों की वजह से भारत ने बाहरी आर्थिक संकटों का सफलतापूर्वक सामना किया है।

(न्यूज एजेंसियों एपी, वार्ता और भाषा से इनपुट के साथ)

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