नई दिल्ली: पिछले सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजार में दाम मजबूत रहे। इसका कारण विदेशों में बाजारों की मजबूती, रुपये में गिरावट, सर्दी का मौसम और शादी-विवाह के कारण बढ़ी मांग रही। हालांकि दाम बढ़ने के बावजूद सूरजमुखी और मूंगफली जैसे कुछ तिलहन अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बिक रहे हैं।
महाराष्ट्र में मांग बढ़ने और किसानों की कम बिकवाली के चलते सोयाबीन प्लांटों ने सोयाबीन के दाम 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिए। इससे सोयाबीन का भाव करीब 5,300 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है, जो इसके MSP 5,328 रुपये के करीब है। रुपये के कमजोर होने से आयातित तेल महंगे पड़े, जिससे घरेलू बाजार को भी समर्थन मिला।
सरकार ने आयातित खाद्य तेलों के शुल्क मूल्य में बढ़ोतरी की है। कच्चे पामतेल का शुल्क मूल्य 41 रुपये और सोयाबीन डीगम का 24 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। इससे भी तेलों के दामों को सहारा मिला।
सरसों की पैदावार इस बार अच्छी बताई जा रही है। विदेशी बाजारों की मजबूती और सर्दी की मांग से इसके दाम बढ़े हैं, लेकिन ऊंचे भाव और आने वाली नई फसल को देखते हुए खरीद सीमित है। तेल मिलें और व्यापारी इसमें सावधानी से कारोबार कर रहे हैं।
सोयाबीन की मांग मजबूत है, जबकि आयात घटा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसके दाम बढ़े हैं और रुपया कमजोर है, जिससे सोयाबीन तेल और तिलहन में तेजी बनी रही। मूंगफली में भी सर्दियों में साबुत खाने और अच्छे तेल की मांग बढ़ने से सुधार आया, लेकिन इसके भाव अभी MSP से नीचे हैं।
पाम और पामोलीन तेल के दाम भी बढ़े, हालांकि सर्दियों में इनकी मांग कमजोर रहती है। नमकीन बनाने वाली कंपनियों की मांग बढ़ने से बिनौला तेल के दामों में भी तेजी देखी गई। कुल मिलाकर, बीते सप्ताह लगभग सभी तेल-तिलहन के दाम बढ़े रहे, जिनमें विदेशी बाजार, मौसम, मांग और रुपये की कमजोरी का अहम योगदान रहा।