बीते हफ्ते सभी तेल-तिलहन की कीमत में विदेश में सुधार और जाड़े की मांग बढ़ने से हुई मजबूत

पिछले सप्ताह विदेशों में मजबूती, रुपये की कमजोरी, सर्दी और शादी-विवाह की मांग से देश के तेल-तिलहन बाजार में दाम बढ़े। सोयाबीन, सरसों, मूंगफली व पाम तेल मजबूत रहे, हालांकि कुछ तिलहन अब भी एमएसपी से नीचे बिके।

Manali Rastogi( विद इनपुट्स फ्रॉम Bhasha)
पब्लिश्ड18 Jan 2026, 12:54 PM IST
बीते हफ्ते सभी तेल-तिलहन की कीमत में विदेश में सुधार और जाड़े की मांग बढ़ने से हुई मजबूत
बीते हफ्ते सभी तेल-तिलहन की कीमत में विदेश में सुधार और जाड़े की मांग बढ़ने से हुई मजबूत

नई दिल्ली: पिछले सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजार में दाम मजबूत रहे। इसका कारण विदेशों में बाजारों की मजबूती, रुपये में गिरावट, सर्दी का मौसम और शादी-विवाह के कारण बढ़ी मांग रही। हालांकि दाम बढ़ने के बावजूद सूरजमुखी और मूंगफली जैसे कुछ तिलहन अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बिक रहे हैं।

यह भी पढ़ें | वुड मैकेंजी की ग्लोबल टॉप 10 लिस्ट में शामिल हुई भारत की ये कंपनी

महाराष्ट्र में मांग बढ़ने और किसानों की कम बिकवाली के चलते सोयाबीन प्लांटों ने सोयाबीन के दाम 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिए। इससे सोयाबीन का भाव करीब 5,300 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है, जो इसके MSP 5,328 रुपये के करीब है। रुपये के कमजोर होने से आयातित तेल महंगे पड़े, जिससे घरेलू बाजार को भी समर्थन मिला।

सरकार ने आयातित खाद्य तेलों के शुल्क मूल्य में बढ़ोतरी की है। कच्चे पामतेल का शुल्क मूल्य 41 रुपये और सोयाबीन डीगम का 24 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। इससे भी तेलों के दामों को सहारा मिला।

यह भी पढ़ें | अमेरिका में ट्रांसफार्मर आपूर्ति के लिए सीजी पावर को मिला 900 करोड़ का ऑर्डर

सरसों की पैदावार इस बार अच्छी बताई जा रही है। विदेशी बाजारों की मजबूती और सर्दी की मांग से इसके दाम बढ़े हैं, लेकिन ऊंचे भाव और आने वाली नई फसल को देखते हुए खरीद सीमित है। तेल मिलें और व्यापारी इसमें सावधानी से कारोबार कर रहे हैं।

सोयाबीन की मांग मजबूत है, जबकि आयात घटा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसके दाम बढ़े हैं और रुपया कमजोर है, जिससे सोयाबीन तेल और तिलहन में तेजी बनी रही। मूंगफली में भी सर्दियों में साबुत खाने और अच्छे तेल की मांग बढ़ने से सुधार आया, लेकिन इसके भाव अभी MSP से नीचे हैं।

यह भी पढ़ें | गंभीर श्रेणी में दिल्ली का वायु प्रदूषण, जानें ग्रैप 4 में क्या हैं पाबंदियां

पाम और पामोलीन तेल के दाम भी बढ़े, हालांकि सर्दियों में इनकी मांग कमजोर रहती है। नमकीन बनाने वाली कंपनियों की मांग बढ़ने से बिनौला तेल के दामों में भी तेजी देखी गई। कुल मिलाकर, बीते सप्ताह लगभग सभी तेल-तिलहन के दाम बढ़े रहे, जिनमें विदेशी बाजार, मौसम, मांग और रुपये की कमजोरी का अहम योगदान रहा।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़बिजनेसबीते हफ्ते सभी तेल-तिलहन की कीमत में विदेश में सुधार और जाड़े की मांग बढ़ने से हुई मजबूत
More
बिजनेस न्यूज़बिजनेसबीते हफ्ते सभी तेल-तिलहन की कीमत में विदेश में सुधार और जाड़े की मांग बढ़ने से हुई मजबूत