डिजिटल की लत से जॉब, कमाई और अर्थव्यवस्था को नुकसान! इकोनॉमिक सर्वे में CEA ने जताई चिंता

Economic Survey 2026: इकोनॉमिक सर्वे में बढ़ती डिजिटल लत पर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि बच्चों की मानसिक सेहत बचाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उम्र की जांच और स्क्रीन टाइम की लिमिट पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।

Jitendra Singh
अपडेटेड29 Jan 2026, 07:04 PM IST
Economic Survey 2026: स्मार्टफोन की लत को बड़ी मुसीबत’ बताया गया है।
Economic Survey 2026: स्मार्टफोन की लत को बड़ी मुसीबत’ बताया गया है।

Economic Survey 2026: आज के दौर में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं, लेकिन ये एक बड़ी समस्या भी पैदा कर रहे हैं। संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने डिजिटल एडिक्शन को एक तेजी से बढ़ती मुसीबत बताया है। डिजिटल एडिक्शन के खतरे सिर्फ़ व्यक्तिगत शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह अर्थव्यवस्था और प्रोडक्टिविटी को भी काफ़ी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इकोनॉमिक सर्वे ने पहली बार भारत की अर्थव्यवस्था पर डिजिटल एडिक्शन के गहरे असर के बारे में चेतावनी दी है।

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि ये लत न सिर्फ युवाओं बल्कि बड़े लोगों के दिमागी स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। पढ़ाई में पिछड़ना, काम की जगह पर कम प्रोडक्टिविटी और मानसिक तनाव जैसी दिक्कतें इससे जुड़ी हुई हैं। सर्वे में ऑस्ट्रेलिया, चीन और साउथ कोरिया जैसे देशों के कदमों का जिक्र करते हुए भारत में भी कई तरह के कदम उठाने की बात कही गई है। इसके साथ ही, सरकार के अलग-अलग विभागों की कोशिशों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

डिजिटल की लत से सेहत को नुकसान

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि ऑनलाइन खरीदारी, गेमिंग और साइबर फ्रॉड सीधे आर्थिक चपत लगती है। इस नुकसान के अलावा डिजिटल की लत से रोज़गार, प्रोडक्टिविटी और ज़िंदगी भर की कमाई पर असर पड़ता है। डिजिटल चीजों के ज्यादा इस्तेमाल से एंग्जायटी, स्ट्रेस, डिप्रेशन और नींद नहीं आने की समस्याएं होने लगती हैं। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा पाई जाती है जो कई तरह के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े रहते हैं।

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उम्र के अनुसार पॉलिसी बनाने की जरूरत

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, छोटे बच्चों और युवाओं को इस लत से ज्यादा खतरा है क्योंकि वे आसानी से फंस जाते हैं और गलत चीजें देखने लगते हैं। इसलिए, उम्र के हिसाब से ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने के नियम बनाने चाहिए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को खुद ही उम्र की जांच करने और बच्चों के लिए सही सेटिंग्स रखने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। खासकर सोशल मीडिया, जुआ वाले ऐप्स, ऑटो-प्ले वाली वीडियो और विज्ञापनों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। कुल मिलाकर इकोनॉमिक सर्वे में उम्र आधारित एक्सेस लिमिट पर पॉलिसी बनाने पर जोर दिया गया है।

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कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन

सरकार की ओर यह आकलन ऐसे में समय में किया गया है जब कई देशों में नाबालिग बच्चों के लिए सोशल मीडिया में पाबंदी लगी हुई है। हाल ही में फ्रांस की संसद ने इस बारे में एक बिल भी पास कर दिया है। जल्द ही सीनेट के पास भेजकर इसे कानून बनाया जा सकता है। इस बिल को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का पूरी तरह से समर्थन मिला हुआ है। इसके कानून बनने के बाद 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर पाबंदी लगा दी जाएगी। वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट रखना प्रतिबंधित कर दिया गया है।

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