
नई दिल्ली: बीते सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों की कीमतों में मजबूती देखने को मिली, जिसका असर भारत के तेल-तिलहन बाजार पर भी पड़ा। इसके चलते सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, कच्चा पाम तेल (सीपीओ), पामोलीन और बिनौला तेल सहित लगभग सभी प्रमुख तेल-तिलहनों के भाव बढ़कर बंद हुए।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी बाजारों में तेजी के साथ-साथ घरेलू मंडियों में किसानों की ओर से कम आवक होने से भी कीमतों को सहारा मिला। इसके अलावा रुपये में कमजोरी आने से आयातित खाद्य तेल पहले की तुलना में महंगे हो गए।
जानकारों के मुताबिक, पहले कई आयातक लागत से तीन से चार प्रतिशत कम कीमत पर खाद्य तेल बेच रहे थे, लेकिन अब यह अंतर घटकर करीब एक से डेढ़ प्रतिशत रह गया है। घाटा कम होने की वजह से आयातित तेलों की कीमतों में भी सुधार देखने को मिला।
फिलहाल सूरजमुखी तेल की कीमतें अन्य खाद्य तेलों की तुलना में काफी अधिक हैं। यह सोयाबीन रिफाइंड और पामोलीन तेल से लगभग 20 रुपये प्रति किलो, मूंगफली तेल से करीब 15 रुपये प्रति किलो और सरसों तेल से 8 से 10 रुपये प्रति किलो महंगा बिक रहा है। यही वजह है कि दूसरे खाद्य तेलों की मांग बढ़ी है।
उद्योगों में भी सोयाबीन रिफाइंड और पामोलीन तेल की खपत बढ़ रही है। दूसरी ओर किसानों को पहले ही अच्छे दाम मिल चुके हैं, इसलिए वे कम कीमत पर फसल बेचने से बच रहे हैं और बाजार में सीमित मात्रा में माल ला रहे हैं।
इसी वजह से पाम और पामोलीन तेल के दामों में भी सप्ताह के दौरान मजबूती दर्ज की गई। महाराष्ट्र के लातूर में कई सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांट किसानों को आकर्षित करने के लिए 15 से 30 अगस्त के बीच खरीद मूल्य बढ़ाकर 7,750 रुपये प्रति क्विंटल तक देने की घोषणा कर चुके हैं।
सरसों की बात करें तो इसकी आवक भी मंडियों में कम बनी हुई है। कम सप्लाई के कारण सरसों और सरसों तेल के दाम बढ़े, हालांकि ऊंची कीमतों की वजह से खरीदारी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है।
मूंगफली की औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे इसके भाव में भी तेजी आई। बाजार में बिनौला तेल की उपलब्धता बेहद कम है, जबकि सूरजमुखी तेल पहले से महंगा है। ऐसे में खाद्य तेल की मांग का बड़ा हिस्सा मूंगफली तेल पूरा कर रहा है, जिससे इसकी कीमतों को समर्थन मिला। कम उपलब्धता के कारण बिनौला तेल भी महंगा हुआ।
सप्ताह के अंत में सरसों दाना 200 रुपये की बढ़त के साथ 7,725 से 7,750 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। सरसों तेल 375 रुपये बढ़कर 15,900 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं, सरसों की पक्की घानी और कच्ची घानी तेल के दाम 50 से 55 रुपये बढ़कर क्रमशः 2,615-2,715 रुपये और 2,615-2,765 रुपये प्रति 15 किलो टिन रहे।
सोयाबीन दाना 175 रुपये की तेजी के साथ 7,175 से 7,225 रुपये प्रति क्विंटल और सोयाबीन लूज 7,025 से 7,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
दिल्ली में सोयाबीन तेल 150 रुपये बढ़कर 15,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इंदौर में इसका भाव 50 रुपये की बढ़त के साथ 15,300 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि सोयाबीन डीगम तेल 75 रुपये चढ़कर 12,050 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।
मूंगफली तिलहन के दाम भी 200 रुपये बढ़कर 6,950 से 7,525 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। गुजरात में मूंगफली तेल 375 रुपये की तेजी के साथ 16,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 60 रुपये बढ़कर 2,560 से 2,860 रुपये प्रति 15 किलो टिन पर बंद हुआ।
कच्चा पाम तेल (सीपीओ) 225 रुपये महंगा होकर 13,625 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। दिल्ली में पामोलीन तेल 125 रुपये बढ़कर 15,525 रुपये प्रति क्विंटल और एक्स-कांडला पामोलीन तेल 150 रुपये की तेजी के साथ 14,325 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
औद्योगिक मांग और सीमित उपलब्धता के चलते बिनौला तेल के दाम भी 150 रुपये बढ़कर 16,000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए।
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