अब भारत के बैंकिंग सेक्टर में आ रही विदेशी निवेश की बाढ़, यस बैंक के बाद RBL-एमिरेट्स NBD में डील

Indian banking sector FDI: एमिरेट्स एनबीडी RBL बैंक में 26,850 करोड़ रुपये ($3 अरब) में 60% हिस्सेदारी खरीदेगा। यह बैंकिंग सेक्टर का सबसे बड़ा FDI है। हाल में SMBC और IHC ने भी निवेश किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह भारतीय बैंकिंग में बड़े विदेशी निवेश की शुरुआत है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड20 Oct 2025, 08:32 AM IST
भारतीय बैंकिंग सेक्टर पर लट्टू हुए विदेशी निवेशक
भारतीय बैंकिंग सेक्टर पर लट्टू हुए विदेशी निवेशक(Mint)

Emirates NBD RBL Bank acquisition: भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बहुत बड़ी डील हुई है। दुबई के एमिरेट्स एनबीडी बैंक (Emirates NBD) ने RBL बैंक में कंट्रोलिंग स्टेक (50 प्रतिशत या उससे ज्यादा की हिस्सेदारी) खरीदने का ऐलान किया है। यह $3 अरब का एक बड़ा सौदा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। इस डील से भारत के बैंकिंग सेक्टर में विदेशी निवेश की बाढ़ आ सकती है और इस तरह के कई और सौदे देखने को मिल सकते हैं।

$3 अरब की सबसे बड़ी FDI डील

एमिरेट्स एनबीडी ने शनिवार को जारी एक साझा बयान में बताया कि वह RBL बैंक में 60% हिस्सेदारी के लिए 26,850 करोड़ रुपये (करीब $3 अरब) खर्च करेगा। इस सौदे के लिए अभी शेयरधारकों और रेगुलेटरी मंजूरियों की जरूरत होगी। इसके बाद एमिरेट्स एनबीडी बाकी शेयरधारकों के लिए एक अनिवार्य ओपन ऑफर भी लाएगा। यह भारत के बैंकिंग सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) है।

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हाल के दिनों में बढ़ी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

पिछले सिर्फ 30 दिनों में ही ग्लोबल ग्रुप्स ने भारतीय बैंकों में दो बड़े निवेश किए हैं। 2 अक्टूबर को, IHC से जुड़ी हुई अबू धाबी की इन्वेस्टर एवेनिर इन्वेस्टमेंट ने सम्मान कैपिटल (पहले इंडियाबुल्स कैपिटल) में $1 अरब में 43.46% हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति जताई। इससे पहले, सितंबर महीने में जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्प (SMBC) ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। इसके अलावा, एसएमबीसी ने कार्लाइल ग्रुप इंक से जुड़ी कंपनी सीए बेस्क इन्वेस्टमेंट्स की यस बैंक में 4.2% हिस्सेदारी को भी खरीदने पर सहमत हो गई है। यह डील पूरी होने पर यस बैंक में एसएमबीसी की कुल हिस्सेदारी 24.2% हो जाएगी। जापान की ही कंपनी एमयूएफजी के बारे में भी कहा जा रहा है कि वह एवेंडस कैपिटल में कंट्रोलिंग स्टेक खरदीने की बातचीत कर रही है।

कई ग्लोबल ब्रैंड्स भारत से गए, अब लौटने की बारी

बीते 15-20 वर्षों में वित्तीय क्षेत्र के कई वैश्विक ब्रैंड्स ने भारत में अपना कारोबार कम किया है या पूरी तरह समेट ही लिया है। क्रेडिट सुइस, डॉइचे बैंक, आरबीएस, स्टैंडर्ड चार्टर्ड और सिटी जैसे नाम इनमें शामिल हैं। लेकिन गज कैपिटल (Gaja Capital) के एमडी और सीईओ गोपाल जैन कहते हैं कि माहौल पूरी तरह से बदल रहा है। उनके मुताबिक, दुनियाभर के निवेशकों में भारतीय बैंकिंग सिस्टम को लेकर नजरिया बदल गया है। अब वो भारतीय बैंकिंग सिस्टम में दमखम दिखा रहे हैं। गोपाल जैन कहते हैं, 'सरकारी बैंकों के मुकाबले निजी बैंक के मार्केट शेयर बढ़ रहे हैं, इस कारण उन्हें ज्यादा से ज्यादा पूंजी की जरूरत है। यही वजह है कि स्ट्रैटिजिक और फाइनैंशियल इन्वेस्टर भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं।'

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तेजी भागती भारतीय अर्थव्यवस्था का आकर्षण

फिर तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था भी विदेशी निवेशकों को नजरिया बदलने को मजबूर कर रही है। दरअसल, बैंकिंग सिस्टम का भविष्य देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर ही टिका होता है। आईआईएफल कैपिटल के जॉइंट सीईओ राघव गुप्ता कहते हैं, 'स्थायी निवेश और तेज वृद्धि की चाहत रखने वाले वैश्विक वित्तीय संस्थानों की दृष्टि तेजी से भारत के बैंकिंग सेक्टर पर गड़ रही है। भारत की एक बड़ी आबादी तक अब भी बैंकिंग सिस्टम की पहुंच बाकी है। यह देखते हुए बैंकिंग सेक्टर पर दांव लगाना फायदेमंद दिख रहा है। ऊपर से तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और फाइनेंशियल सिस्टम के लिए संगठित नियम-कानून भी विदेशी निवेशकों को लुभा रहे हैं।'

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5 साल में लाभ करीब दोगुना होने की उम्मीद

यही वजह है कि आने वाले दिनों में भारत के बैंकिंग सेक्टर में कई और डील होने की संभावना बन रही है। विदेशी निवेशक या तो भारतीय वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी खरीदेंगे, ब्रैंड के तौर पर साझेदारी करेंगे या फिर फिनटेक कंपियों के साथ सहयोग के जरिए भारत में निवेश करेंगे। यूबीएस की हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत के फाइनैंशियल सर्विसेज इंडस्ट्री का लाभ सालाना 13 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से वित्त वर्ष 2030 तक 11.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा जो वित्त वर्ष 2025 में 6.1 लाख करोड़ रुपये है।

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