
देश के अलग-अलग हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़ताल और फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म जमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल के स्पष्टीकरण के दौर के बीच नेता राजनीतिक रोटियां भी सेंकने में जुटे हैं। नए साल के अवसर पर क्विक कॉमर्स कंपनियों के पास ऑर्डर की बाढ़ आ जाती है, तभी डिलिवरी वालों के एक तबके ने हड़ताल की घोषणा कर दी।
उन्होंने जेप्टो, स्विगी, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर डिलिवरी पर्सन के शोषण का आरोप लगा रहे हैं। इस खींचतान के बीच यह जानना बेहद जरूरी है कि केंद्र सरकार ने पुराने श्रम कानूनों की जगह हाल ही में जो श्रम संहिताएं पेश की हैं, उनमें गिग वर्कर्स के लिए क्या-क्या अधिकार दिए गए हैं और उन अधिकारों को हासिल करने के क्या उपाय हैं। इन अधिकारों को जानकर ही शोषण से बचा जा सकता है।
नई श्रम संहिताओं में पहली बार गिग वर्क, प्लेटफॉर्म वर्क और एग्रीगेटर को पहली बार परिभाषित किया गया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि नए श्रम कानूनों में देश के करोड़ों असंगठित कामगारों और गिग वर्कर्स को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के प्रावधान हैं, जो पहले के कानूनों में नहीं थे।
इन कानूनों के तहत, अब गिग वर्कर्स को भी मुख्यधारा की सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। उन्हें न केवल न्यूनतम वेतन सुनिश्चित हुई है, बल्कि दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं की भी गारंटी दी गई है। आइए नए श्रम कानूनों में गिग वर्कर्स के लिए प्रमुख प्रावधानों पर एक नजर डालते हैं।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलेगा। इसके लिए केंद्र सरकार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए समय-समय पर उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाएगी और अधिसूचित करेगी, जिनमें निम्नलिखित से संबंधित मामले शामिल होंगे...
सामाजिक सुरक्षा निधि: गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स सहित 40 करोड़ असंगठित कामगारों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया जाएगा, जिससे व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने में मदद मिलेगी।
ईएसआईसी से जुड़ने का अवसर: नए तकनीक से जुड़े प्लेटफॉर्म एवं गिग वर्कर्स को ईएसआईसी से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN): ईएसआईसी, ईपीएफओ और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए एक सार्वभौमिक खाता संख्या (UAN) होगी, जो आधार से जुड़ी होगी।
सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कोष का लाभ लेने के लिए कामगारों को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसकी मुख्य शर्तें और जरूरी दस्तावेज निम्नलिखित हैं...
उम्र की सीमा: पंजीकरण के लिए कामगार की आयु कम से कम 16 वर्ष होनी चाहिए।
आधार कार्ड: पहचान और पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड सबसे महत्वपूर्ण है।
आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर: ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन और भविष्य के अपडेट्स के लिए सक्रिय मोबाइल नंबर।
बैंक खाते का विवरण: सामाजिक सुरक्षा का पैसा सीधे खाते में भेजने के लिए बैंक खाता (IFSC कोड सहित) जरूरी है।
स्व-घोषणा (Self-Declaration): कामगार को खुद यह घोषित करना होगा कि वह गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर के तौर पर कार्यरत है।
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN): पंजीकरण के बाद कामगार को एक विशिष्ट UAN नंबर अलॉट किया जाएगा, जो उसकी डिजिटल पहचान होगी।
सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल और फिजिकल दोनों विकल्प दिए हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया इस प्रकार है...
पोर्टल पर विजिट करें: सरकार द्वारा अधिसूचित आधिकारिक सोशल सिक्योरिटी पोर्टल या ई-श्रम पोर्टल पर जाना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए यहां क्लिक करें।
विवरण दर्ज करें: आधार नंबर के जरिए लॉगिन करें। इसके बाद अपनी व्यक्तिगत जानकारी, काम का प्रकार और बैंक डिटेल्स भरें।
जो श्रमिक खुद ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर सकते, वे सरकार द्वारा स्थापित सुविधा केंद्रों (Facilitation Centres) या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जा सकते हैं।
सहायता के लिए हेल्पलाइन: रजिस्ट्रेशन में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या या पोर्टल की जानकारी के लिए सरकार ने एक समर्पित नेशनल टोल-फ्री नंबर 14434 जारी किया है। यह नंबर कई भाषाओं में जानकारी प्रदान करता है। खास बात है कि यह टोल फ्री नंबर रविवार को भी काम करता है। टोल फ्री हेल्पलाइन की सुविधा लेने के लिए यहां क्लिक करें।
पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने पर कामगार को एक डिजिटल कार्ड मिलेगा, जिसमें उनका UAN नंबर होगा। यह कार्ड पूरे देश में मान्य होगा।
पोर्टेबिलिटी: यदि कोई कामगार एक राज्य छोड़कर दूसरे राज्य में काम करने जाता है, तो भी उसका UAN और जमा लाभ बरकरार रहेंगे।
बीमा और पेंशन: पंजीकरण के बाद ही कामगार दुर्घटना बीमा (Accident Insurance) और वृद्धावस्था पेंशन (Old Age Protection) के लिए पात्र होगा।
सरकारी योजनाओं तक सीधी पहुंच: भविष्य में शिक्षा, आवास और स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी किसी भी सरकारी योजना का लाभ सीधे UAN के जरिए मिलेगा।
इन योजनाओं का वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा पूर्णतः या आंशिक रूप से, राज्य सरकार द्वारा आंशिक रूप से, एग्रीगेटर्स के योगदान से, या लाभार्थियों या एग्रीगेटर्स से एकत्र किए गए योगदान से, या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व निधि से, या किसी अन्य स्रोत से किया जा सकता है।
एग्रीगेटर्स का योगदान: एग्रीगेटर्स का योगदान वार्षिक टर्नओवर के 1-2% की दर से होगा, जो गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भुगतान की गई/देय राशि के 5% तक सीमित होगा।
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