EV Demand in India: पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल और ईंधन कीमतों में आई तेजी ने भारतीय ग्राहकों की पसंद बदलनी शुरू कर दी है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी और सीईओ शैलेश चंद्र के अनुसार, अमेरिका - ईरान युद्ध के बाद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बुकिंग 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गई है। मांग में अचानक आए इस उछाल को देखते हुए कंपनी EV की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है।
2.5 गुना तक बढ़ी EV बुकिंग
टाटा मोटर्स का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी की प्राथमिकताओं पर पड़ा है और बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। कंपनी के मुताबिक, EV बुकिंग में 2 से 2.5 गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए टाटा मोटर्स अगले 3 से 4 महीनों में अपनी EV उत्पादन क्षमता 50 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य मासिक उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 15,000 यूनिट तक पहुंचाना है। हालांकि यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपोनेंट सप्लायर्स कितनी तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा पाते हैं।
ईंधन महंगा, EV का गणित मजबूत
ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि जब पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं तो इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल परिचालन लागत पारंपरिक वाहनों के मुकाबले अधिक आकर्षक हो जाती है। हाल के हफ्तों में ईंधन कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने EV की लागत संबंधी बढ़त को और मजबूत किया है।
भारतीय EV बाजार को मिल सकता है बड़ा बूस्ट
टाटा मोटर्स भारतीय EV बाजार की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है। ऐसे में यदि मौजूदा मांग बनी रहती है तो देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को नया बूस्ट मिल सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची ईंधन कीमतें और बढ़ता चार्जिंग नेटवर्क आने वाले महीनों में EV अपनाने की रफ्तार को और तेज कर सकते हैं। शैलेश चंद्र ने बताया कि सिर्फ पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है।
ऐसे में ग्राहकों को अब हर महीने ज्यादा खर्च उठाना पड़ रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पेट्रोल 10 रुपये प्रति लीटर महंगा होता है और कोई व्यक्ति महीने में 100 लीटर पेट्रोल इस्तेमाल करता है, तो उसका मासिक खर्च करीब 1,000 रुपये बढ़ जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर एंट्री लेवल कार खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ता है।
EV और CNG गाड़ियों की तरफ बढ़ा रुझान
कंपनी का मानना है कि अगर फ्यूल की कीमतें आगे भी ऊंची बनी रहती हैं तो लोग तेजी से EV और CNG गाड़ियों की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं। खासकर वे ग्राहक जो हर महीने के खर्च को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं। शैलेश चंद्र ने कहा कि बहुत कम लोग अपनी कार खरीदने की योजना पूरी तरह टालेंगे, लेकिन कई ग्राहक अब पेट्रोल कार की जगह एंट्री लेवल EV या CNG कार चुनने पर विचार कर रहे हैं।
भारत में तेजी से बदल रहा है ऑटो मार्केट
जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और तेज हो सकती है। बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्च को देखते हुए लोग अब ऐसी गाड़ियों को चुन रहे हैं जिनकी रनिंग कॉस्ट कम हो। आने वाले समय में EV और CNG सेगमेंट भारतीय ऑटो बाजार में और मजबूत हो सकते हैं।