
E-Way Bill: देश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। इस जनवरी महीने में ई-वे बिल जेनरेशन बढ़कर 13.68 करोड़ से ज्याहा हो गया। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। इस बात की जानकारी GST नेटवर्क पोर्टल के डेटा से मिली है। हालांकि, एक्सपर्ट्स इसे लेकर ज़्यादा उत्साहित नहीं दिख रहे हैं। पिछला ऑल-टाइम हाई 13.84 करोड़ था। इसका मतलब है कि जनवरी में प्रोडक्शन में 1 प्रतिशत से थोड़ी ज़्यादा गिरावट आई है।
हालांकि, यह 2025 के जनवरी की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत और 2024 के जनवरी की तुलना में 42 परसेंट ज़्यादा है। ई-वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट है जो एक पोर्टल पर जेनरेट होता है। इससे सामान की आवाजाही के बारे में सबूत मिलता है। इससे यह भी पता चलता है कि मूविंग सामान पर टैक्स दिया गया है या नहीं।
बता दें कि देश के भीतर 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सामान की आवाजाही के लिए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत अनिवार्य है। इसमें माल, माल भेजने वाला, माल प्राप्त करने वाला और ट्रांसपोर्टर सभी की डिटेल शामिल रहती है। इसका मकसद कर चोरी पर अंकुश लगाना और साथ ही राज्यों में माल की आवाजाही पर रीयल-टाइम पर नजर रखना है।
बिजनेस लाइन में छपी खबर के मुताबिक, टैक्स कनेक्ट के पार्टनर विवेक जालान का मानना है कि ज़्यादा ई-वेबिल जनरेशन देश में मज़बूत आर्थिक गतिविधि और टैक्सपेयर्स के बीच कम्प्लायंस का साफ़ संकेत है। हालांकि, "यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि प्रति खेप ₹50,000 की लिमिट अब बहुत कम है। हालांकि यह लिमिट कई साल पहले तय की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि यह ध्यान देना जरूरी है कि ₹50,000 में GST शामिल है और इसलिए अगर GST 18 फीसदी है, तो टैक्सेबल वैल्यू सिर्फ़ ₹43,000 है। इसलिए, हो सकता है कि अगली GST काउंसिल की मीटिंग में इस लिमिट को अभी से बढ़ाकर कम से कम ₹1 लाख कर दिया जाए। वहीं कुछ राज्यों में इंट्रा-स्टेट मूवमेंट के लिए इतनी ही लिमिट है।
यह ताजा डेटा ऐसे समय में आया है, जब सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार ई-वे बिल फ्रेमवर्क को बदलने के लिए राज्यों के साथ बातचीत कर रही है। इसके साथ ही इस पर GST काउंसिल की अगली मीटिंग में चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। FY26 के इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि GST सुधारों के अगले कदम में ई-वे बिल सिस्टम को सिर्फ़ लागू करने और कंट्रोल करने के टूल के बजाय, स्मूथ लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने वाले के तौर पर फिर से सोचने पर फोकस किया जा सकता है।
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