G RAM G Scheme: विकसित भारत - जी राम जी कानून बनने के बाद खेती के दिनों में 125 दिनों की गारंटी वाली इस योजना के तहत काम नहीं दिया जाएगा। 'मनरेगा' की जगह लेने वाली 'विकसित भारत - जी राम जी' विधेयक के अध्याय 6 में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि खेती के 60 दिनों में योजना के तहत काम नहीं दिया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में खेती की स्थिति सुधरने की उम्मीद है जो मनरेगा के लागू होने के बाद से मजदूरों के घोर अभाव के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
जी राम जी कानून का अध्याय 6 क्या कहता है?
प्रस्तावित कानून की धारा 6(1) कहती है, ‘इस अधिनियम या इसके तहत बनाए गए नियमों में कुछ भी होने के बावजूद, कृषि के चरम मौसमों के दौरान पर्याप्त कृषि श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, ऐसे चरम मौसमों के दौरान कोई भी काम शुरू या निष्पादित नहीं किया जाएगा, जैसा कि सब सेक्शन 2 के तहत अधिसूचित किया जा सकता है।’
धारा 6(2) में राज्यों को नोटिफिकेशन की अनुमति
अब सब सेक्शन क्या है, यह भी जान लीजिए। सेक्शन 6 का सब-सेक्शन 2 राज्य सरकारों की अधिसूचना के बारे में बात करता है। यह कहता है, ‘राज्य सरकारें वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की कुल अवधि को पहले से नोटिफाई करेंगी, जिसमें बुवाई और कटाई के चरम कृषि मौसम शामिल होंगे, जिसके दौरान इस अधिनियम के तहत कोई भी काम नहीं किया जाएगा।’
स्थानीय स्तर पर जारी होगा नोटिफिकेशन
सब-सेक्शन 3 में कहा गया है कि जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है ताकि किसी खास इलाके में खेती की वहां के विशेष समय का ध्यान रखा जा सके।
उप-धारा 3 कहती है, ‘राज्य सरकार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, जिनमें जिले, प्रखंड या ग्राम पंचायतें शामिल हैं, के लिए अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर सकती है, जो कृषि-जलवायु क्षेत्रों, कृषि गतिविधियों के लोकल पैटर्न या अन्य प्रासंगिक कारकों पर आधारित होंगी, और ऐसी प्रत्येक अधिसूचना इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए बाध्यकारी प्रभाव रखेगी।’
संबद्ध संस्थाओं पर प्रावधानों को लागू करने की जिम्मेदारी
धारा 6 की उप-धारा 4 में कहा गया है कि योजना से संबंद्ध सभी प्राधिकरण ऊपर की बातों को सौ प्रतिशत लागू करेंगा। इसमें कहा गया है, ‘नियोजन और निष्पादन की जिम्मेदारी: इस अधिनियम के तहत कार्यों की योजना बनाने, स्वीकृत करने या निष्पादित करने के लिए जिम्मेदार सभी प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी कार्य केवल अधिसूचित चरम कृषि मौसमों के बाहर ही किए जाएं।’
खेती के वक्त मजदूरों की कमी अब पूरी होने की उम्मीद
कुल मिलाकर देखें तो प्रस्तावित कानून की धारा 6 यह सुनिश्चित करने के लिए है कि घनघोर खेती के मौसमों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त खेति करने के लिए मजदूर उपलब्ध रहें, ताकि खेती से जुड़े काम में कोई बाधा न आए।