FDI Rule News: पड़ोसी देशों के लिए सरल हो गया FDI का नियम, लिस्ट में चीन का नाम, पाकिस्तान का भी है क्या?

FDI rule simplification: जब दुनिया भर से निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं तब भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने सोमवार को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के नियम को कुछ देशों के लिए सरल बना दिया है।

एडिटेड बाय Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड10 Mar 2026, 05:07 PM IST
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भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के लिए एफडीआई नियम हुए सरल (सांकेतिक तस्वीर)
भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के लिए एफडीआई नियम हुए सरल (सांकेतिक तस्वीर)

सरकार ने चीन समेत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले सभी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को सरल बना दिया। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया गया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

लिस्ट में चीन-पाकिस्तान, दोनों के नाम

इस प्रेस नोट के तहत जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार से अनिवार्य रूप से मंजूरी लेने की जरूरत है। भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान हैं।

गलवान संघर्ष के बाद चीन से रिश्तों में खटास

भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आए कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत यानी 2.51 अरब अमेरिकी डॉलर है और वह 23वें स्थान पर है। जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई थी।

भारत ने बंद किए चीन के कई ऐप

इसके बाद भारत ने टिक टॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, भारत को चीन से बहुत कम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है, फिर भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना वृद्धि हुई है। चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है।

चीन को भारत से होने वाले निर्यात में कमी

भारत का चीन को निर्यात 2024-25 में 14.5 प्रतिशत घटकर 14.25 अरब डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में यह 16.66 अरब डॉलर था। हालांकि, आयात 2024-25 में 11.52 प्रतिशत बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में यह 101.73 अरब डॉलर था।

व्यापार घाटा 2023-24 के 85 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 99.2 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। भारत का चीन को निर्यात चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान 38.37 प्रतिशत बढ़कर 15.88 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 13.82 प्रतिशत बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया। व्यापार घाटा 92.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

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