
Budget 2026 Updates in Hindi: केंद्रीय बजट पेश होने की तारीख नजदीक आ गई है। इस सप्ताह के अंतिम दिन यानी रविवार को बजट पेश किया जाएगा। दरअसल, इस बार 1 फरवरी की तारीख रविवार को ही पड़ रही है, इसलिए छुट्टी के दिन ही बजट पेश किया जाएगा। रविवार को देश के प्रमुख शेयर बाजार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) भी खुले रहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से छेड़े गए व्यापार युद्ध (Trade War) ने भारत के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस ट्रेड वॉर की चुनौतियों से उबरने की बखूबी कोशिशें की हैं। अब बजट की बारी है तो सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी ट्रेड वॉर की बची-खुची चिंताओं को भी काफूर करने के लिए केंद्र सरकार क्या-क्या कदम उठाएगी। आइए बजट से जुड़ी उम्मीदों और अन्य खास अपडेट्स से आपको रू-ब-रू करवाते हैं। आप बस जुड़े रहिए मिंट हिंदी के साथ।
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गोल्ड इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सोने को सिर्फ ज्वेलरी नहीं बल्कि निवेश के रूप में भी देखना चाहिए। जानकारों का कहना है कि सोने पर आयात शुल्क और टैक्स में बार-बार बदलाव से कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं, जिससे आम लोगों को झटका लगता है। SGB स्कीम को फिर से चालू करना भी जरूरी है। यह स्कीम पहले निवेशकों के लिए आकर्षक थी, क्योंकि इसमें सरकार 2.5% ब्याज देती थी और टैक्स में भी फायदा था। 2024 में यह बंद हो गई थी।
सरकार पिछले कुछ सालों से नए टैक्स सिस्टम को आगे बढ़ा रही है। न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स रेट कम हैं लेकिन कोई छूट या कटौती नहीं है। अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स नए सिस्टम में जा चुके हैं और सरकार नहीं चाहती कि पुराने सिस्टम के फायदे बढ़ाकर लोगों को वापस उसी तरफ खींचा जाए। ऐसे में कहा जा रहा है कि सरकार पुराने टैक्स रिजीम को खत्म कर सकती है। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार 80C की लिमिट बढ़ा सकती है। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि इसे 3 लाख रुपये किया जा सकता है या फिर इसे महंगाई से जोड़ा जा सकता है। बता दें कि Section 80C सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला टैक्स फायदा है जिसमें पीएफ, लाइफ इंश्योरेंस, ELSS, बच्चों की फीस और होम लोन का प्रिंसिपल शामिल होता है। लेकिन इसकी लिमिट आज भी 1.5 लाख रुपये ही है। यह लिमिट 2014 के बाद कभी नहीं बदली। आज के समय में यह रकम मिडल क्लास परिवारों के लिए काफी कम लगती है।
खुद के घर पर होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। यह लिमिट भी 2014 के बाद से नहीं बदली, जबकि घरों की कीमत और लोन दोनों काफी बढ़ चुके हैं। आज बड़े शहरों में 2 लाख की लिमिट बहुत कम लगती है। ऐसे में रियल एस्टेट बॉडी ने सरकार से यह छूट 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने की मांग की है। अगर ऐसा होता है घरों की बिक्री में इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं। यह बचत और निवेश का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना अब 1.5 से 1.6 लाख रुपये के बीच पहुंच गया है। ऐसे में यूनियन बजट 2026-27 को लेकर लोगों की नजरें सरकार की ओर टिकी हुई हैं। गोल्ड इंडस्ट्री के लोग चाहते हैं कि बजट में ऐसे बदलाव हों, जिससे घरेलू बचत में बंद पड़ा सोना अर्थव्यवस्था में आए, ज्वेलरी सस्ती हो और निर्यात को बढ़ावा मिले।
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर ने सरकार से मजबूत नीतिगत समर्थन की उम्मीद जताई है। इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों के अनुसार शहरी विकास, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कॉरिडोर में पूंजीगत खर्च जारी रहना जरूरी है। समय पर फंड जारी होने, तेज प्रोजेक्ट क्लीयरेंस और आसान कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था से प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ेगी।
शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक उत्पादकता और जलवायु अनुकूलन से जोड़ते हुए आवास, जल और स्वच्छता योजनाओं पर जोर देने की बात कही गई है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का मानना है कि अब भारत को केवल असेंबली से आगे बढ़कर कंपोनेंट, डिजाइन और आरएंडडी पर फोकस करना चाहिए।
रिटेल और फुटवियर उद्योग ने जीएसटी युक्तिकरण, सस्ती फाइनेंसिंग, ऑटोमेशन और स्किल डेवलपमेंट की मांग की है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके।
इस वर्ष के बजट को लेकर एसएस इनोवेशन्स इंटरनेशनल के संस्थापक, चेयरमैन और सीईओ डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने कहा, “यूनियन बजट से पहले मेडिकल टेक्नोलॉजी और सर्जिकल रोबोटिक्स सेक्टर एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। मजबूत क्लिनिकल विशेषज्ञता, उन्नत इंजीनियरिंग क्षमता और लागत प्रभावी समाधान भारत को वैश्विक मेडटेक मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। इस क्षमता को साकार करने के लिए स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहन, कंपोनेंट-लेवल मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती और सर्जिकल रोबोटिक्स व एआई-आधारित हेल्थकेयर तकनीकों को तेजी से अपनाने की जरूरत है। घरेलू रूप से निर्मित मेडिकल उपकरणों पर जीएसटी का युक्तिकरण, आर एंड डी टैक्स इंसेंटिव में बढ़ोतरी, दीर्घकालिक और किफायती पूंजी तक बेहतर पहुंच, साथ ही रेगुलेटरी एवं निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को गति देगा। एक ‘मेड-इन-इंडिया’ सर्जिकल रोबोटिक्स कंपनी के रूप में हमारा मानना है कि सही नीतिगत ढांचा भारत को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली मेडिकल टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व दिला सकता है।”
भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ने आगामी केंद्रीय बजट में कर नियमों में राहत की मांग की है। उनका कहना है कि कर छूट की समयसीमा बढ़ाने और पूंजीगत लाभ कर कम करने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बची राशि से कारोबार व तकनीक में निवेश किया जा सकेगा।
उद्योग जगत के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 से सभी निवेशकों के लिए एंजेल टैक्स पूरी तरह खत्म करने की घोषणा से निवेश माहौल बेहतर हुआ है। अब स्टार्टअप विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर में राहत चाहते हैं, जो फिलहाल करीब 12.5 प्रतिशत है।
स्टार्टअप नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत हुए सुधारों को आगे बढ़ाने में बजट अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, आयकर कानून की धारा 80-आईएसी के तहत मिलने वाली 100 प्रतिशत आयकर छूट की समयसीमा को 2030 से आगे बढ़ाने की भी मांग की जा रही है।
इसके अलावा, सेवा और निर्माण क्षेत्र के स्टार्टअप सस्ते ऋण, ब्याज सब्सिडी और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की सुविधा चाहते हैं। ट्रैक्सन के अनुसार, 2025 में भारतीय टेक स्टार्टअप्स ने 10.5 अरब डॉलर का निवेश जुटाया, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम है।
आगामी केंद्रीय बजट से पहले घरेलू इस्पात उद्योग ने सरकार से हरित इस्पात को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। हरित इस्पात भारत के कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाता है। उद्योग संगठनों ने हरित इस्पात उत्पादन में धातु कबाड़ (स्क्रैप) के अधिक उपयोग और जीएसटी के तहत रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) को पूरी कबाड़ आपूर्ति श्रृंखला पर लागू करने का सुझाव दिया है, जिससे कर चोरी रुके और कारोबार आसान हो।
भारतीय इस्पात संघ का कहना है कि कम-कार्बन तकनीक और वैकल्पिक कच्चे माल को बढ़ावा देना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार में अब कम-कार्बन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए स्पष्ट खरीद नीति, सरकारी समर्थन और वित्तीय सहायता जरूरी है, ताकि शुरुआती अधिक लागत की भरपाई हो सके।
रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, हरित ऊर्जा अपनाने से इस्पात संयंत्रों के उत्सर्जन में 13–22 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खरीद और नीतिगत समर्थन से भारत में हरित इस्पात का बड़े स्तर पर विस्तार संभव है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 3.3 प्रतिशत हो गया है, जबकि पिछले तीन वर्षों में यह 3 प्रतिशत पर बना हुआ था। RBI के अनुसार, केंद्र सरकार की पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत राज्यों ने 50 साल के ब्याज-मुक्त ऋण अधिक मात्रा में लिए, जिससे घाटा बढ़ा। यह ऋण राज्यों की सामान्य उधारी सीमा से अलग है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों का पूंजीगत खर्च 2023-24 और 2024-25 में जीडीपी के 2.7 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जबकि 2025-26 में इसके 3.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। RBI ने यह भी बताया कि महामारी के बाद राज्यों की कुल बकाया देनदारियां ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और मार्च 2026 तक यह जीडीपी के 29.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती हैं।
RBI ने जनसंख्या संरचना के प्रभाव पर भी ध्यान दिलाया। युवा आबादी वाले राज्यों के पास बेहतर राजस्व और विकास के अधिक अवसर हैं, जबकि बुजुर्ग आबादी वाले राज्यों पर बढ़ते खर्च और घटते कर आधार के कारण वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। ऐसे राज्यों को स्वास्थ्य, पेंशन और श्रम नीतियों में सुधार की जरूरत है।
रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने आगामी आम बजट में राष्ट्रीय किराया आवास मिशन शुरू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि डेवलपर्स और किरायेदारों दोनों को कर प्रोत्साहन मिलना चाहिए। क्रेडाई ने किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव, 45 लाख रुपये की मूल्य सीमा हटाने और होम लोन पर ब्याज कटौती की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का सुझाव दिया है। निकाय के अनुसार, बढ़ते शहरीकरण के बावजूद किराया आवास क्षेत्र अविकसित है। अध्यक्ष शेखर पटेल ने मजबूत किराया पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरत बताई। साथ ही, उद्योग का दर्जा और विदेशी निवेश के लिए एकल खिड़की व्यवस्था की भी मांग की गई।
वेदांता की लौह अयस्क खनन इकाई सेसा गोवा ने सरकार से निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क के संवर्धन के लिए प्रोत्साहन देने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि इससे प्रसंस्करण को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाया जा सकता है। लौह अयस्क संवर्धन के जरिए अशुद्धियां हटाकर अयस्क को इस्पात उत्पादन योग्य बनाया जाता है। भारत में 2030 तक इस्पात की मांग 30 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है। संवर्धन से घरेलू आपूर्ति मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा और राजस्व में इजाफा होगा। सेसा गोवा ने शुल्क, नियामक देरी और निर्यात शुल्क हटाने पर भी जोर दिया है।
आने वाला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी अहम रहने वाला है। इस दौरान कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर पर फैसला और आम बजट 2026-27 बाजार की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये-डॉलर की चाल और वैश्विक व्यापार से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार को प्रभावित करेंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को आम बजट पेश करेंगी।
यह दिन रविवार है, लेकिन इस दिन बीएसई और एनएसई खुले रहेंगे। इस हफ्ते एक्सिस बैंक, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, आईटीसी, एनटीपीसी और बजाज ऑटो जैसी बड़ी कंपनियों के नतीजे आएंगे। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों, फेड के फैसले और व्यापार नीतियों पर रहेगी। हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा है। एफपीआई की लगातार बिकवाली से बाजार की धारणा कमजोर बनी हुई है। निवेशकों को बजट से राजकोषीय घाटा नियंत्रण और इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा व रेलवे में निवेश बढ़ने की उम्मीद है।
स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया के एमडी और सीईओ पीयूष अरोड़ा ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की रफ्तार बनाए रखने के लिए आगामी आम बजट में नीतिगत निरंतरता, बेहतर अवसंरचना और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इकोसिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ईवी से जुड़े कुछ शुल्क मुद्दों के समाधान से उद्योग को फायदा होगा। अरोड़ा ने सीमा शुल्क सुधारों और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को भी अहम बताया, जिससे वैश्विक कारोबार आसान होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि कंपनी भारत में स्थानीय स्तर पर उत्पाद विकसित कर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए प्रासंगिक वाहन बनाती रहेगी।
केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले आई एक नई अध्ययन रिपोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अधिक खर्च की लंबे समय से उठ रही मांग को ठोस आधार दिया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सामाजिक-आर्थिक कारक चिकित्सा खर्च बढ़ा रहे हैं और इलाज तक पहुंच में असमानता और गहरी होती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आय वृद्धि, शहरीकरण, शिक्षा स्तर, मुद्रास्फीति और जीवन प्रत्याशा, इन सभी का स्वास्थ्य देखभाल खर्च पर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। निष्कर्ष बताते हैं कि भारत की विकास यात्रा स्वयं संरचनात्मक रूप से स्वास्थ्य देखभाल लागत को ऊपर की ओर धकेल रही है, जिससे निजी देखभाल पर निर्भर परिवारों पर असमान रूप से प्रभाव पड़ रहा है। इस अध्ययन में परिवारों के चिकित्सा खर्च को कम करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अधिक राशि आवंटन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की घोषणा की उम्मीद है, जिसे 1 जनवरी,2026 से लागू किया जा सकता है। राज्यों को मिलने वाले करों के हिस्से में भी 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरी तरफ, व्यक्तिगत करदाताओं के लिए, जिन्हें पिछले साल 12 लाख रुपये तक की आयकर छूट और बाद में जीएसटी दरों में कटौती से बड़ी राहत मिली थी, इस बार मानक कटौती यानी स्टैंडर्ड डिडक्शन में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।
इस बार बजट से उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सीमा शुल्क ढांचे में जीएसटी की तर्ज पर बड़े बदलाव और कई अन्य सुधार देखने को मिल सकते हैं। सीमा शुल्क व्यवस्था में सुधार के तहत दरों को कम करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया जा सकता है। साथ ही विवादों में फंसे लगभग 1.53 लाख करोड़ रुपये को सुलझाने के लिए एक माफी योजना भी लाई जा सकती है। रक्षा क्षेत्र के लिए बजट आवंटन बढ़ने की संभावना है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
वित्त मंत्री 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर और अनिश्चित भू-राजनीतिक माहौल की पृष्ठभूमि में 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा पूर्ण बजट होगा जबकि वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट पेश करने की तैयारी कर रही हैं और इस काम में वित्त मंत्रालय के नौकरशाहों की एक अनुभवी टीम उनकी सहायता कर रही है। इनमें आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर, राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव और व्यय सचिव वुमलुनमंग वुअलनाम शामिल हैं। इनके अलावा, वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू, सार्वजनिक उद्यम विभाग सचिव के मोसेस चालई एवं निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) सचिव अरुणिष चावला भी वित्त मंत्री की सहायता में जुट हैं। बजट निर्माण की प्रक्रिया में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।
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