पहली बार भारत में एयरबस की बोर्ड मीटिंग, विमानों का सिर्फ खरीदार नहीं अब मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा देश

एयरबस बोर्ड की बैठक वैश्विक विमानन (Global Aviation) और एयरोस्पेस बाजार (Aerospace Market) के तौर पर भारत के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है। कंपनी न सिर्फ भारत को एक बड़ा बाजार मानती है, बल्कि इसे अपने वैश्विक ऑपरेशन (Global Operations) के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र यानी 'स्ट्रैटेजिक हब' भी मान रही है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड25 Sep 2025, 12:33 PM IST
भारत में एयरबस की मैन्युफैक्चरिंग लाइन बढ़ाने का प्लान (सांकेतिक तस्वीर)
भारत में एयरबस की मैन्युफैक्चरिंग लाइन बढ़ाने का प्लान (सांकेतिक तस्वीर)(Mint)

Airbus Board Meeting Delhi: यूरोप की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी एयरबस का बोर्ड (Airbus board) पहली बार भारत की राजधानी दिल्ली में रणनीतिक बैठक कर रहा है। आमतौर पर एयरबस बोर्ड की ऐसी बैठकें यूरोप या उन देशों में होती हैं, जहां कंपनी की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स (Manufacturing units) हैं। उदाहरण के लिए 2018 में यह बैठक चीन में हुई थी, जहां एयरबस के A320 फैमिली एयरक्राफ्ट (Airbus A320 Family Aircraft) के लिए एक फाइनल असेंबली लाइन (Final Assembly Line) है। ऐसे में एयरबस डायरेक्टर्स का दिल्ली में ऐनुअल ऑफ-साइट स्ट्रैटिजी सेशन (Annual Off-site Strategy Session) के लिए आना एक बड़ा कदम है।

एयरबस पर भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का दबाव

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 'मेक-इन-इंडिया' पहल के तहत एयरोस्पेस कंपनियों पर स्थानीय स्तर पर विनिर्माण (Local Manufacturing) शुरू करने के लिए लगातार दबाव बना रही है। भारतीय एयरलाइन्स कंपनियों ने 1,500 से ज्यादा पैसेंजर और कार्गो प्लेन ऑर्डर किए हैं। इस कारण मोदी सरकार एयरबस और बोइंग (Airbus and Boeing) जैसी कंपनियों से देश में एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने को कह रही है।

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विमानन कंपनियों के लिए स्ट्रैटिजिक हब बन रहा है भारत

एयरबस के एक प्रवक्ता ने इस दौरे को भारत के लिए एक बड़ा संकेत बताया। प्रवक्ता ने कहा कि यह दौरा दर्शाता है कि भारत एयरबस के लिए रणनीतिक महत्व (Strategic Importance) का देश है। भारत केवल एक तेजी से बढ़ते बाजार (Vibrant and Growing Market) के रूप में ही नहीं, बल्कि वैश्विक संचालन (Global Operations) के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी महत्वपूर्ण है। प्रवक्ता ने यह भी कहा, 'हम भारत को अपनी ग्लोबल वैल्यू चेन (Global Value Chain) में और ज्यादा इंटीग्रेट कर रहे हैं। यह दौरा भारत के भरोसेमंद पार्टनर (Reliable Partner) के तौर पर एयरबस की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।'

बड़े ग्राहकों और सरकारी अधिकारियों से मिलेंगे एयरबस बोर्ड मेंबर्स

दिल्ली में होने वाली इस बैठक के दौरान एयरबस बोर्ड के सदस्य सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ अपने दो सबसे बड़े भारतीय ग्राहकों इंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया (Air India) के टॉप अधिकारियों से भी मिलेंगे। ये दोनों एयरलाइन्स आने वाले कुछ सालों में एयरबस से 1,000 से ज्यादा प्लेन लेने वाली हैं। इंडिगो ने 2023 में 500 एयरबस A320 फैमिली जेट्स का ऑर्डर दिया था, जो कमर्शियल एविएशन इतिहास (Commercial Aviation History) का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर है। इसके अलावा एयरबस, एयर इंडिया के साथ मिलकर इस क्षेत्र की सबसे बड़ी पायलट ट्रेनिंग फैसिलिटी (Pilot Training Facility) में से एक स्थापित कर रही है, जिसमें 10 फुल फ्लाइट सिमुलेटर (Full Flight Simulators) होंगे।

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भारत में मैन्युफैक्चरिंग लाइनें स्थापित कर रहा है एयरबस

एयरबस पिछले कुछ सालों में भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट (Manufacturing Footprint) बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कंपनी गुजरात के वडोदरा में एक मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C-295 के लिए और कर्नाटक के कोलार में सिविलियन हेलीकॉप्टर्स (Civilian Helicopters) के लिए मैन्युफैक्चरिंग लाइनें स्थापित कर रही है। हालांकि, कमर्शियल जेट्स (Commercial Jets) के लिए चीन की तरह असेंबली फैसिलिटी (Assembly Facility) लगाने के बजाय एयरबस का फोकस भारत से कंपोनेंट सोर्सिंग (Component Sourcing) बढ़ाने पर है। एयरबस के भारत में 40 से ज्यादा सप्लायर्स हैं, जिनसे वह वर्तमान में 1.4 बिलियन डॉलर के कंपोनेंट खरीदती है। कंपनी की योजना 2030 तक इसे बढ़ाकर 2 बिलियन डॉलर करने की है।

भारत में पूरी असेंबली लाइन क्यों नहीं लगाना चाहती है एयरबस?

एयरबस के सीईओ गुइलॉम फॉरी (Guillaume Faury) ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि भारत में फाइनल असेंबली लाइन अगली जनरेशन के प्लेन (Next Generation of Planes) के लिए विचाराधीन हो सकती है, लेकिन मौजूदा जेनरेशन के लिए यह भारत और एयरबस दोनों के लिए फायदेमंद नहीं है। फॉरी ने तर्क दिया था, 'भारत को अपनी क्षमता का आकलन करना चाहिए, न कि यह देखना चाहिए कि दूसरे क्या करते रहे हैं। फाइनल असेंबली लाइन पूरे एयरक्राफ्ट का केवल 7% होती है, लेकिन सोर्सिंग बढ़ाने से कंपनियों का एक इकोसिस्टम (Ecosystem) बनता है, जो जॉब्स पैदा करता है।' बोर्ड के सदस्य इस दौरान टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL), हैदराबाद और डाइनेमैटिक्स टेक्नोलॉजीज (Dynamatics Technologies), कर्नाटक का भी दौरा करेंगे, जो फिलहाल एयरबस के ग्लोबल टियर 1 सप्लायर्स हैं।

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विमानन कंपनियों पर बढ़ रहा लोकल सप्लायर्स का भरोसा

डाइनेमैटिक टेक्नोलॉजीज के सीईओ और एमडी उदयंत मल्होत्रा (Udayant Malhoutra) ने एयरबस के इस भरोसे पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इससे उनकी कंपनी जैसे सप्लायर्स के लिए ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट्स (Contracts) और बिजनेस आने की उम्मीद है। मल्होत्रा ने बताया, 'हम एडवांस्ड इंजीनियरिंग (Advanced Engineering) और क्वॉलिटी क्राफ्ट्समैनशिप (Quality Craftsmanship) के मिश्रण के साथ ग्लोबल बेस्ट-वैल्यू (Global Best-Value) दे सकते हैं। इससे कॉस्ट बढ़ाए बिना प्रॉडक्ट्स को बेहतर किया जा सकता है।'

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