
ताइवान की कंपनी हों हाई प्रिसिजन इंडस्ट्री कंपनी, जिसे फॉक्सकॉन के नाम से जाना जाता है, ने बेंगलुरु के पास देवनहल्ली में अपनी नई आईफोन असेंबली यूनिट के लिए सिर्फ आठ से नौ महीनों में करीब 30,000 कर्मचारियों को भर्ती किया है। यह अब तक भारत में किसी भी फैक्ट्री द्वारा किया गया सबसे तेज विस्तार माना जा रहा है।
इस तेजी से साफ है कि एप्पल चीन के अलावा दूसरे देशों में भी अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहता है। यह फैक्ट्री करीब 300 एकड़ में फैली हुई है और यहां काम करने वालों में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। ज्यादातर कर्मचारी 19 से 24 साल की उम्र के हैं और इनमें से कई पहली बार नौकरी कर रहे हैं।
इस यूनिट में अप्रैल और मई के दौरान आईफोन 16 का ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हुआ था और अब यहां आईफोन 17 प्रो मैक्स के नए मॉडल बनाए जा रहे हैं। फैक्ट्री में बनने वाले 80 प्रतिशत से ज्यादा फोन विदेशों में भेजे जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अगले साल पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद यहां कर्मचारियों की संख्या 50,000 तक हो सकती है।
महिलाओं के रहने के लिए छह बड़े हॉस्टल बनाए गए हैं, जिनमें से कुछ पहले ही चालू हो चुके हैं और बाकी पर काम तेजी से चल रहा है।
आने वाले समय में इस फैक्ट्री का और विस्तार किया जाएगा। इसके बाद यहां एक ही जगह पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या भारत के किसी भी सरकारी या निजी संस्थान से ज्यादा हो सकती है। पड़ोसी राज्यों से आने वाली प्रवासी महिलाओं को भी यहां रोजगार मिला है।
भविष्य में यह परिसर एक छोटे शहर की तरह विकसित किया जाएगा, जहां रहने की सुविधा, स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल और मनोरंजन के साधन उपलब्ध होंगे।
अनुमान के मुताबिक, कर्मचारियों को मुफ्त रहने की सुविधा और सस्ते भोजन के साथ औसतन करीब 18,000 रुपये महीना वेतन मिलता है, जो महिलाओं के लिए ब्लू कॉलर नौकरियों में काफी अच्छा माना जाता है।
दुनिया की सबसे बड़ी आईफोन बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन इस प्रोजेक्ट में करीब 20,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। पूरी तरह शुरू होने के बाद यह फैक्ट्री उत्पादन क्षमता और रोजगार दोनों के मामले में भारत की सबसे बड़ी फैक्ट्री बन सकती है। इसका प्रोडक्शन एरिया करीब 2.5 लाख वर्ग फुट है, जो देश की सबसे बड़ी फैक्ट्रियों में शामिल है।
यह यूनिट तमिलनाडु में मौजूद फॉक्सकॉन की पहली आईफोन फैक्ट्री से भी बड़ी होगी, जहां अभी करीब 41,000 लोग काम करते हैं। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, इतनी बड़ी फैक्ट्री की स्थापना मोदी सरकार के मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयासों की बड़ी सफलता है।
इस परियोजना से जुड़े लोगों का कहना है कि भविष्य में यहां करीब 12 आईफोन असेंबली लाइनें चलेंगी, जबकि फिलहाल लगभग चार लाइनें ही काम कर रही हैं।
एप्पल धीरे धीरे आईफोन का उत्पादन चीन से भारत की ओर शिफ्ट कर रहा है। इसमें 2021 में शुरू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना ने बड़ी भूमिका निभाई है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत में एप्पल का काम सरकार और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी का उदाहरण है। चार साल पहले इतनी तेजी से विस्तार की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
आज भारत एप्पल की वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन चुका है। अब सभी आईफोन मॉडल भारत में ही प्रोडक्शन की शुरुआत से बनाए जा रहे हैं और दुनिया भर में निर्यात किए जा रहे हैं। एप्पल ने भारत में अपनी सप्लाई चेन को भी मजबूत किया है और अब लगभग 45 स्थानीय कंपनियां इसके साथ काम कर रही हैं।
एप्पल अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर कर्मचारियों की ट्रेनिंग और स्थानीय सप्लायरों को सपोर्ट करता है। नई भर्ती की गई महिलाओं को, जो ज्यादातर हाई स्कूल या पॉलिटेक्निक पास होती हैं, आईफोन की प्रोडक्शन लाइन में शामिल करने से पहले छह हफ्तों की ट्रेनिंग दी जाती है।
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