Explained: अमेरिकी प्रतिबंधों से उलट गई भारत-ईरान के व्यापार की कहानी, क्या मुसीबत बढ़ने वाली है?

US sanctions on Iran: अमेरिका की ओर से ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा से भारत की चिंताएं भी बढ़ी हैं। हालांकि, द्विपक्षीय व्यापार अब मुख्य रूप से खाद्यान्न एवं दवा जैसी मानवीय वस्तुओं तक सीमित है और सीधे तेल पर तात्कालिक प्रभाव कम होगा, फिर भी द्वितीयक प्रतिबंधों की चेतावनी भारत के लिए चिंताजनक है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड25 Aug 2026, 03:57 PM IST
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों को बढ़ना भारत के लिए भी परेशानी का सबब (सांकेतिक तस्वीर)
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों को बढ़ना भारत के लिए भी परेशानी का सबब (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों की सूची बढ़ाकर भारत के लिए और मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 24 अगस्त को 57 लोगों, संस्थाओं और कंपनियों पर प्रतिबंध की घोषणा की है। दूसरी ओर अमेरिकी गृह विभाग ने एक अलग प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें चार भारतीय कंपनियां और चार भारतीय नागिरकों को प्रतिबंधित सूची में दिखाया गया है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा की है जिसमें ईरान, चीन, हॉन्ग कॉन्ग, यूएई, सिंगापुर, मलेशिया, यूके, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, ग्रीस, यूक्रेन, सीरिया समेत कुछ फ्लैग-ऑफ-कन्वीनियंस देशों को निशाना बना गया है। मार्शल आइलैंड्स, बोत्सवाना, कैमरून, वानुआतू, गाम्बिया जैसे देश फ्लैग-ऑफ-कन्वीनियंस का हिस्सा हैं जिनके नाम पर दूसरे देशों के जहाजों का संचालन होता है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के सहयोगियों के साथ व्यापार या उनकी मदद करने वालों को भी कोप का भागी बनना पड़ेगा।

भारत की ये कंपनियां और लोग भी प्रतिबंधित

नामप्रकारभूमिका / आरोप
Sadashiva Overseas Limitedकंपनीफरवरी 2024–जून 2025 के बीच लगभग $69 मिलियन मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने का अमेरिकी आरोप; इनमें कुछ शिपमेंट पहले से प्रतिबंधित Bonjoure Commodity FZE से जुड़े बताए गए।
PP Softtech Private Limitedकंपनीजनवरी 2024–जून 2025 के बीच लगभग $25 मिलियन मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने का आरोप।
Prakrutees Infra Impex India Private Limitedकंपनीमई 2023–फरवरी 2026 के बीच लगभग $25 मिलियन मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने का आरोप; कुछ लेनदेन Bonjoure Commodity FZE से जुड़े बताए गए।
Portease Partners LLPकस्टम्स ब्रोकर (कंपनी)भारत में ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई शिपमेंट्स के आयात को सुविधा प्रदान करने का अमेरिकी आरोप।
Prashant Gargव्यक्ति (भारतीय नागरिक)PP Softtech Private Limited के डायरेक्टर; कंपनी से जुड़े ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के मामले में अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत नामित।
Indrismiya Ashrafmiya Shekhव्यक्ति (भारतीय नागरिक)Portease Partners LLP की designated partner; कंपनी द्वारा ईरानी पेट्रोकेमिकल शिपमेंट्स को भारत में लाने की सुविधा प्रदान करने के आरोप के संदर्भ में प्रतिबंधित।
Harish Ramchandra Rangiव्यक्ति (भारतीय नागरिक)Portease Partners LLP के designated partner; कंपनी द्वारा ईरानी पेट्रोकेमिकल शिपमेंट्स को भारत में लाने की सुविधा प्रदान करने के आरोप के संदर्भ में प्रतिबंधित।

भारत के ईरान के साथ व्यापार की स्थिति

ईरान के खिलाफ अमेरिका की बढ़ती कड़ाई के मद्देनजर भारत को चौकन्ना रहना लाजिमी है। हालांकि, भारत और ईरान के बीच औपचारिक व्यापार अब उस स्तर पर नहीं है जो अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले था। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 14,483.81 करोड़ रुपये का रहा। इसमें भारत का निर्यात 11,113.35 करोड़ रुपये जबकि आयात 3,325.45 करोड़ रुपये का रहा।

मानकमूल्य ( ₹ करोड़)YoY ग्रोथ
निर्यात (भारत → ईरान)11,113.35▲ 5.87%
आयात (भारत ← ईरान)3,325.45▼ 11.26%
कुल व्यापार14,438.81▲ 1.36%
व्यापार संतुलन#ERROR!—
भारत के कुल वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी0.13%—

वार्षिक आंकड़े (वित्त वर्ष 2025-26)

2018-19 में भारत-ईरान के बीच कुल 36,371.30 करोड़ रुपये व्यापार हुआ था जिसमें भारत ने ईरान को 5,685.62 करोड़ रुपये के माल भेजे थे जबकि ईरान से 30,685,68 करोड़ रुपये के सामान खरीदे थे। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद न केवल दोनों देशों के बीच का व्यापार घटा, बल्कि व्यापार की प्रकृत्ति भी उलट गई। अब भारत ईरान को ज्यादा निर्यात करता है और आयात कम हो गया है। इसका प्रमुख कारण है ईरान से तेल आयात में भारी कटौती।

मानकमूल्य ( ₹ करोड़)YoY ग्रोथ209 देशों में रैंक
निर्यात1,414.50▼ 52.62%79वां
आयात8,403.85▲ 918.85%36वां
कुल व्यापार9,818.35▲ 157.67%51वां
व्यापार संतुलन−6,989.35 (भारत को घाटा)——

ताजा तिमाही आंकड़े (अप्रैल-जून 2026, बनाम अप्रैल-जून 2025)

अभी भारत-ईरान के बीच होने वाले व्यापार की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें ईरानी कच्चे तेल की भूमिका लगभग समाप्त हो चुकी है। बीते वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ईरान को मुख्यतः अनाज, चाय, कॉफी, मसाले, खाद्य, दवा जैसे उत्पाद बेचे थे। इसलिए आज अमेरिका की नई चेतावनी का तत्काल प्रभाव भारत की कच्चे तेल की खरीद पर 2018 जैसा नहीं होगा। प्रमुख रूप से खतरा भारतीय निर्यातकों, बैंकों, शिपिंग और ढुलाई वाली कंपनियों और चाबहार प्रॉजेक्ट पर है।

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ट्रंप प्रशासन में तेज हुईं प्रतिबंधों की कार्रवाइयां

ट्रंप प्रशासन ने 2025 से ईरान पर अधिकतम दबाव की रणनीति फिर तेज कर दी है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने फरवरी 2025 में ईरानी पेट्रोलियम की खरीद और ढुलाई से जुड़े नेटवर्क में भारतीय कंपनियों और टैंकरों के संचालन को भी प्रतिबंधित किया था।

अमेरिका ने फरवरी 2025 में ईरानी जहाजी बेड़ों पर अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा की थी तो अप्रैल 2025 में यूएई में रहने वाले भारतीय मूल के व्यापारी जुगविंदर सिंह ब्रार के जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया था कि ये जहाज अरबों-खरबों रुपये के ईरानी पेट्रोलियम की चोरी-छिपे ढुलाई करते हैं।

इस पृष्ठभूमि में 24 अगस्त, 2026 की अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की घोषणा को महज सामान्य कूटनीतिक चेतावनी नहीं मानना खतरे से खेलने जैसा होगा। हालांकि भारत सरकार के अनुसार अभी उन देशों पर अमेरिकी टैरिफ लागू नहीं हुआ है जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं, और तत्काल भारत को निशाना बनाते हुए किसी व्यापक प्रतिबंध की घोषना नहीं हुई है।

लेकिन बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका विदेशी वित्तीय संस्थानों और अन्य देशों की ईरान संबंधी गतिविधियों पर द्वितियक प्रतिबंध लगाने की क्षमता रखता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार बीते वित्त वर्ष में भारत-ईरान के बीच व्यापार का अधिकांश हिस्सा मानवीय आवश्यकताओं की वस्तुओं का था जिन पर प्रतिबंध लागू नहीं होते।

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भारत की जीडीपी ग्रोथ पर रॉयटर्स का पोल

रॉयटर्स ने ही अपने ताजा सर्वे रिजल्ट में आशंका जताई है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि की दर घटकर 7.1 प्रतिशत रह सकती है। ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही में बाधा भारत के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है क्योंकि देश अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का 80 प्रतिशत के आसपास विदेशों से आयात करता है। यही वजह है कि भारत ने ईरान युद्ध से जुड़ी गतिविधियों पर पैनी नजर बना रखी है।

संसद के मानसून सत्र के दौरान 24 जुलाई को सपा सांसद धर्मेन्द्र यादव के प्रश्न पर विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने भी लोकसभा में यही स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि सरकार उन सभी भू-राजनीतिक घटनाओं पर बारीकी से नजर रखती है, जिनका भारत के राष्ट्रीय हितों पर असर पड़ता है तथा द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत के हितों की रक्षा के लिए उचित उत्तर देती है।

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भारत को ऊर्जा सुरक्षा की चिंता

विदेश राज्यमंत्री के बयान से स्पष्ट झलकता है कि भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा को लेकर किस कदर चिंतित है। सिंह ने कहा था, 'भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस मामले पर एक सुविचारित और सूक्ष्म रुख अपनाया है, जिसका उद्देश्य देश में ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा तथा व्यापक पश्चिम एशियाई क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है।' उन्होंने आगे कहा, ‘भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध नौवहन की स्वतंत्रता तथा ऊर्जा और वाणिज्य के सुरक्षित प्रवाह को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।’

वैसे भी भारत और ईरान पड़ोसी देश होने के नाते एक-दूसरे से करीबी से जुड़े हैं। पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर मौजूदा पीए नरेंद्र मोदी तक कुल सात प्रधानमंत्रियों ने ईरान का दौरा किया है। वहीं, ईरान के छह राष्ट्रपति भारत दौरे पर आ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22-23 मई, 2016 को ईरान दौरे पर थे जबकि तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी 15 से 17 फरवरी, 2018 के दो दिवसीय दौरे पर भारत आए थे।

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