Union Budget: बही खाता से टैबलेट तक बजट का सफर, कोरोना काल में बदल गया बजट का स्वरूप, डिटेल में जानें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। 2019 से 2025 तक उनके बजट स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुधारों और गरीब-युवा-महिला-किसानों पर केंद्रित रहे, जो भारत की बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं और विकास की दिशा को दर्शाते हैं।

Manali Rastogi
अपडेटेड1 Feb 2026, 11:15 AM IST
बही खाता से टैबलेट तक बजट का सफर, कोरोना काल में बदल गया बजट का स्वरूप, डिटेल में जानें
बही खाता से टैबलेट तक बजट का सफर, कोरोना काल में बदल गया बजट का स्वरूप, डिटेल में जानें(Money SHARMA / AFP)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। यह बजट कई मायनों में खास होगा, क्योंकि यह रविवार को पेश किया जाएगा, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगा।

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वित्त वर्ष 2026-27 (अप्रैल 2026 से मार्च 2027) के लिए यह बजट आर्थिक विकास को बनाए रखने, वित्तीय अनुशासन कायम रखने और वैश्विक व्यापार चुनौतियों, जैसे संभावित अमेरिकी टैरिफ, से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के उपायों पर केंद्रित रहेगा।

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29 जनवरी को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने के बाद उद्योग और कारोबार जगत ने बजट 2026 से अपनी उम्मीदें सामने रखी हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, टेलीकॉम सुधार और मैन्युफैक्चरिंग को समर्थन प्रमुख हैं। यह बजट भी पिछले चार वर्षों की तरह पेपरलेस होगा।

2019: लाल ‘बही-खाता’ से इतिहास

2019 में निर्मला सीतारमण स्वतंत्र भारत की दूसरी महिला वित्त मंत्री बनीं जिन्होंने बजट पेश किया, और पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री रहीं। उनका भाषण 2 घंटे 17 मिनट का था, जो उस समय सबसे लंबा था। उन्होंने उर्दू, हिंदी और तमिल की पंक्तियां पढ़ीं और पहली बार चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल रंग का ‘बही-खाता’ इस्तेमाल किया। उन्होंने पैन और आधार को आपस में जोड़ने की घोषणा भी की।

2020: सबसे लंबा बजट भाषण

2020 में उन्होंने करीब 2 घंटे 40 मिनट का सबसे लंबा बजट भाषण दिया। तबीयत खराब होने के कारण उन्हें अंत में भाषण छोटा करना पड़ा। इस बजट में नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और नई आयकर व्यवस्था जैसे बड़े सुधार शामिल थे।

2021: स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

2021 के बजट में स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी गई। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। बजट छह स्तंभों पर आधारित था, जिनमें स्वास्थ्य, समावेशी विकास, नवाचार और न्यूनतम सरकार जैसे विषय शामिल थे।

2022: अमृत काल का खाका

2022 का बजट अगले 25 वर्षों के लिए अर्थव्यवस्था का रोडमैप बताया गया। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश का प्रावधान किया गया और कुल बजट आकार 39.45 लाख करोड़ रुपये रहा।

2023: सप्तऋषि विजन

2023 के बजट में ‘सप्तऋषि’ की अवधारणा पेश की गई, जिसमें समावेशी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित विकास और युवाओं की शक्ति जैसे सात लक्ष्य शामिल थे। यह पहली बार था जब एक महिला वित्त मंत्री ने महिला राष्ट्रपति को बजट सौंपा।

2024: सातवां बजट और नया रिकॉर्ड

2024 में अंतरिम बजट का भाषण सिर्फ 56 मिनट का था। बाद में उन्होंने सातवां बजट पेश कर मोरारजी देसाई का रिकॉर्ड तोड़ा। इस बजट में महिलाओं, गरीबों, युवाओं और किसानों पर ध्यान दिया गया।

2025: गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी पर फोकस

2025 के बजट में गरीब, युवा, किसान और महिलाओं को केंद्र में रखा गया। इसमें कर सुधार, शहरी विकास, वित्तीय क्षेत्र और ऊर्जा सुधारों पर जोर दिया गया। यह उनका अब तक का सबसे छोटा पूर्ण बजट भाषण रहा।

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