
GDP Growth: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिका के हाई टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) का कहना है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक विकास दर घटकर 7 फीसदी रह सकती है, जो पिछली तिमाही में 7.8 प्रतिशत थी। वृद्धि दर में इस कमी का प्रमुख कारण सरकारी खर्च में सुस्ती को माना गया है। वहीं एसबीआई की एक रिपोर्ट में दूसरी तिमाही के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है।
भारतीय स्टेट बैंक का कहना है कि ग्रामीण उपभोग, निवेश में वृद्धि और जीएसटी कटौती की वजह से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है। वहीं ICRA ने कहा कि दूसरी तिमाही में कम सरकारी पूंजीगत व्यय चिंता का विषय हो सकता है।
इक्रा ने बताया कि दूसरी तिमाही में सेवा और कृषि क्षेत्र में हल्की गिरावट आ सकती है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण और अनुकूल तुलनात्मक आधार के चलते औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत रहने की उम्मीद है। इससे तिमाही की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। एजेंसी ने अपने बयान में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर के 7 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में यह 7.8 फीसदी रही थी। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में वृद्धि दर 5.6 फीसदी दर्ज की गई थी।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सरकारी खर्च में सालाना आधार पर कम वृद्धि, पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में GDP और GVA (सकल मूल्य वर्धन) की रफ्तार पर प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि त्योहारों की शुरुआत से जुड़े माल भंडारण, जीएसटी रेट युक्तिकरण से बढ़ी मांग और शुल्क लागू होने से पहले अमेरिका को निर्यात में तेज़ी से विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। इसके चलते चार तिमाहियों के बाद उद्योग का जीवीए वृद्धि दर, सेवा क्षेत्र को पीछे छोड़ने की संभावना है।
इससे पहले रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings & Research - Ind-Ra) ने अपने ताजा अनुमान में कहा था कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की GDP 7.2% की दर से बढ़ सकती है। एजेंसी ने कहा कि इस वृद्धि का मुख्य कारण निजी खपत होगा। बता दें कि अप्रैल-जून में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर पांच तिमाहियों में सबसे तेज 7.8 फीसदी रही थी, जबकि 2024-25 की दूसरी तिमाही में यह 5.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी थी।
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