
Gold ETF vs Physical Gold: भारत में सोने की कीमतें (Gold Prices) लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। मिडिल-ईस्ट संकट की वजह से पैदा हुई ग्लोबल अनिश्चितता, डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों और ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती की वजह से गोल्ड फिलहाल निवेश का पसंदीदा ठिकाना बन गया है। पिछले एक साल में सोने की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में शादी-विवाह के समय सोना खरीदना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।
इस मुद्दे को संसद में उठाया गया और सरकार से सवाल पूछा गया कि क्या फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ETF के लिए अलग-अलग नियम या रेट्स तय किए जा सकते हैं ताकि फिजिकल गोल्ड खरीदने वालों को प्राइस वॉलेटिलिटी से कुछ राहत मिल सके। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, राज्यसभा में सांसद रामजी लाल सुमन ने सवाल उठाया कि “क्या सरकार फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ETF के लिए अलग-अलग नियम या रेट्स तय करने पर विचार करेगी ताकि फिजिकल गोल्ड खरीदने वालों को कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से बचाया जा सके?”
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया है कि गोल्ड ETF की कीमतें सीधे फिजिकल गोल्ड से जुड़ी होती हैं। उन्होंने बताया कि गोल्ड ETF को SEBI (Mutual Funds) Regulations, 1996 के तहत लॉन्च और मैनेज किया जाता है। इन स्कीम्स का निवेश नियम यह है कि ये फिजिकल गोल्ड और एक्सचेंज ट्रेडेड गोल्ड डेरिवेटिव्स में निवेश करती हैं। ऐसे में ETF की कीमत फिजिकल गोल्ड पर ही निर्भर करती है। अगर फिजिकल गोल्ड महंगा होगा तो ETF का रिटर्न भी उसी अनुपात में बढ़ेगा और गिरावट की स्थिति में ETF पर भी वैसा ही असर पड़ेगा।
संसद में सरकार के बयान से साफ है कि फिलहाल फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ETF के लिए अलग-अलग नियम बनाने की कोई योजना नहीं है। दोनों की कीमतें गहराई से जुड़ी हैं और इनका उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। निवेशकों और खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि चाहे फिजिकल गोल्ड हो या ETF, दोनों पर सोने की ग्लोबल प्राइस का सीधा असर पड़ता है। ऐसे में निवेशक अपनी जरूरत और सुविधा के हिसाब से विकल्प चुन सकते हैं। परंपरा और भावनात्मक मूल्य के लिए फिजिकल गोल्ड सही है, वहीं सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के लिहाज से गोल्ड ETF एक आधुनिक विकल्प बनकर उभरा है।
फिजिकल गोल्ड यानी ईंट, सिक्के या गहनों के रूप में खरीदा गया सोना है। यह परंपरागत रूप से निवेश और खरीद का सबसे लोकप्रिय साधन रहा है। दूसरी ओर, गोल्ड ETF (Exchange Traded Fund) म्यूचुअल फंड की एक स्कीम होती है जिसमें निवेशक शेयरों की तरह डिमैट अकाउंट से निवेश करते हैं। यह डिजिटल फॉर्म में सोना खरीदने का आसान विकल्प है जिसमें निवेशकों को गोल्ड की सुरक्षा या मेकिंग चार्जेज की चिंता नहीं करनी पड़ती।
चूंकि ये एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) हैं, इन्हें आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है। आप स्टॉक मार्केट में इन्हें आसानी से खरीद या बेच सकते हैं, जिससे आप जब चाहें इन्हें खुले बाजार में बेचकर अधिकतम लाभ कमा सकते हैं।
फिजिकल गोल्ड के विपरीत एक्सचेंज ट्रेडेड यूनिट्स की कोई स्टोरेज कॉस्ट नहीं होती है। चूंकि ईटीएफ आपके डिमैट खाते से जुड़े होते हैं, आप अपने प्रॉफिट को बैंक में रख सकते हैं।
जब आप ईटीएफ के रूप में डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं, तो आपको सोने के आभूषण की मेकिंग कॉस्ट की चिंता नहीं करनी पड़ती। आमतौर पर सोने के आभूषण की मेकिंग कॉस्ट 15-20 फीसदी तक हो सकती है।
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