डिजिटल ही नहीं AI क्रांति का अगुवा बनेगा भारत, खरबों निवेश कर रहीं दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां

Big Tech bets big on Indias AI future: भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के केंद्र के रूप में उभर रहा है। गूगल, AWS और माइक्रोसॉफ्ट अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं, जिससे नए अवसर और नौकरियां पैदा होंगी। भारत की डिजिटल क्षमता में सुधार होगा और यह वैश्विक AI अर्थव्यवस्था का प्रमुख खिलाड़ी बनेगा।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड12 Nov 2025, 09:08 PM IST
 भारत में एआई और डिजिटल क्रांति।
भारत में एआई और डिजिटल क्रांति।

Global Big Tech Investment In India: भारत तेजी से वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। गूगल, अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) और माइक्रोसॉफ्ट जैसे वैश्विक तकनीकी दिग्गज देश में अरबों डॉलर के निवेश कर रहे हैं। यह निवेश न केवल भारत की डिजिटल क्षमता को नई मजबूती देगा, बल्कि देश को दुनिया के 'AI इंजन रूम' के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

1. भारत में ग्लोबल बिग टेक का बड़ा दांव

गूगल: अक्टूबर 2025 में गूगल ने भारत में अपना अब तक का सबसे बड़ा निवेश घोषित किया। कंपनी आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 15 अरब डॉलर (करीब 1329.24 अरब रुपये) की लागत से एक विशाल AI और डेटा हब स्थापित करेगी। यह केंद्र गूगल के 12 देशों में फैले वैश्विक AI नेटवर्क का हिस्सा होगा।

विशाखापत्तनम में बनने वाला यह गीगावाट-स्केल डेटा सेंटर कैंपस 2026 से 2030 के बीच चालू होगा। यह नवीकरणीय ऊर्जा, AI इन्फ्रास्ट्रक्चर और एक नए सबसी केबल गेटवे को एकीकृत करेगा। गूगल के मुताबिक, यह परियोजना एक लाख से अधिक नौकरियां पैदा करेगी और जनरेटिव AI जैसे एडवांस्ड वर्कलोड के लिए आवश्यक रीयल टाइम कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।

अमेजन वेब सर्विसेज (AWS): AWS ने भारत में 2030 तक 12.7 अरब डॉलर (करीब 1125.43 अरब रुपये) निवेश करने का वादा किया है। इसमें अकेले महाराष्ट्र में 8.3 अरब डॉलर (करीब 735.51 अरब रुपये) का निवेश शामिल है। यह निवेश तेजी से बढ़ते भारतीय उद्यम बाजार और AI स्टार्टअप्स की मांग को पूरा करने के लिए लचीला, लो-लेटेंसी क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा। AWS का अनुमान है कि इसके विस्तार से दशक के अंत तक 81 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी।

माइक्रोसॉफ्ट: माइक्रोसॉफ्ट ने भी भारत में अपने अब तक के सबसे बड़े विस्तार की घोषणा की है। कंपनी अगले दो वर्षों में 3 अरब डॉलर (करीब 265.85 अरब रुपये) का निवेश करेगी। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंदोक के अनुसार, 'भारत वैश्विक AI परिवर्तन के केंद्र में है। हमारे पास पैमाना, प्रतिभा और महत्वाकांक्षा, तीनों हैं।'

माइक्रोसॉफ्ट का निवेश तीन स्तंभों पर आधारित है। पहला- इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार। इसका एक उदाहरण इंडिया साउथ सेंट्रल डेटा सेंटर है जो 2026 में चालू होगा। दूसरा- कौशल विकास। इसके तहत, वर्ष 2030 तक 1 करोड़ भारतीयों को AI कौशल में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य। और तीसरा- इकोसिस्टम एंपावरमेंट जिसके तहत स्टार्टअप्स, डिजिटल नेटिव्स और उद्यमों के साथ साझेदारी की योजना है।

कंपनी पहले ही 56 साथ भारतीयों को AI स्किल में प्रशिक्षित कर चुकी है। माइक्रोसॉफ्ट अभी फिजिक्स वाला, अपोलो हॉस्पिटल्स और महिंद्रा ग्रुप जैसे भारतीय संगठनों के साथ AI सॉल्युशंस पर काम कर रही है।

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2. भारत का बदलता डिजिटल लैंडस्केप

एक समय भारत को दुनिया का 'IT बैक ऑफिस' कहा जाता था, पर अब वह वैश्विक AI अर्थव्यवस्था का 'इंजन रूम' बनता जा रहा है। IT सर्विसेज की लहर ने भारत को 300 अरब डॉलर (करीब 26584.86 अरब रुपये) का उद्योग और 60 लाख नौकरियां दी थीं। लेकिन मौजूदा AI लहर की अगुवाई अब ग्लोबल बिग टेक कंपनियां कर रही हैं, जो भारत की डेटा क्षमता, प्रतिभा, और मांग पर भरोसा कर रही हैं। बेंगलुरु स्थित कंसल्टेंसी अनअर्थइनसाइट के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है और 2030 तक 1.2 अरब इंटरनेट यूजर्स का घर होगा। यही वह आधार है जो देश को AI इनोवेशन की अगली लहर में अग्रणी बना सकता है।

3. क्यों भारत बन रहा है AI का केंद्र?

गुरुग्राम स्थित कंसल्टेंसी नियोवे ग्लोबल के सीईओ प्रवीण भदाड़ा कहते हैं, 'भारत पैमाने, प्रतिभा और आर्थिक गहराई का एक दुर्लभ संयोजन है।' भारत अब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, जहां 1 अरब डॉलर से अधिक राजस्व वाली 170 सूचीबद्ध कंपनियां, 1 लाख से अधिक स्टार्टअप्स, और 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र (GCCs) मौजूद हैं। यानी भारत अब टेक वैल्यू चेन का 'किनारे पर खड़ा खिलाड़ी' नहीं, बल्कि 'केंद्रीय भूमिका वाला कप्तान' बन चुका है।

इन सबके अलावा रणनीतिक कारण भी अहम हैं। अनअर्थइनसाइट के सीईओ गौरव वासु बताते हैं कि नियामकीय और नीतिगत परिवर्तन भी निवेश को प्रेरित कर रहे हैं। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDPA) के तहत डेटा स्थानीयकरण अनिवार्य है। भारतनेट और स्मार्ट सिटीज मिशन जैसी सरकारी योजनाएं ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा रही हैं। भारत में भूमि और बिजली की लागत अमेरिका और यूरोप की तुलना में काफी कम है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति भारत को दीर्घकालिक निवेश का एक आकर्षक स्थल बना रहा है।

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4. बड़ी वैश्विक टेक कंपनियों के निवेश के बहुआयामी लाभ

बैन एंड कंपनी के इंडिया पार्टनर सैकत बनर्जी के अनुसार, 'ये निवेश क्लाउड-आधारित, एंटरप्राइज-ग्रेड AI अनुप्रयोगों के विकास में तेजी लाएंगे और पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को लाभ देंगे।' इन निवेशों से कई स्तरों पर फायदे होंगे। जैसे स्टार्टअप्स को सस्ती और स्केलेबल कंप्यूटिंग क्षमता मिलेगी, विश्वविद्यालयों को उच्च-प्रदर्शन रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, उद्यमों को कम लागत और तेज़ संचालन का लाभ होगा और सरकार को AI-सक्षम शासन और नीति निर्माण में सहायता मिलेगी।

भारत की नींव मजबूत

भारत के पास पहले से ही एक मजबूत नींव मौजूद है। आधार, UPI, ONDC, DigiLocker और DigiYatra जैसे डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भारत को एक 'लिविंग लैब' में बदल दिया है, जहां नई तकनीकों का परीक्षण और विस्तार संभव है।

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5. स्टार्टअप्स, शिक्षा और रोजगार पर असर

भारत में AI स्टार्टअप्स के लिए यह निवेश वरदान साबित हो सकता है। अब उन्हें कम लागत पर हाइपरस्केल कंप्यूटिंग तक पहुंच मिलेगी, जिससे वे बड़े मॉडल प्रशिक्षित कर सकेंगे और जनरेटिव AI उत्पाद लॉन्च कर पाएंगे। AWS और माइक्रोसॉफ्ट पहले से ही क्लाउड क्रेडिट, मेंटरशिप और AI फाउंडर्स प्रोग्राम के जरिए हजारों भारतीय उद्यमियों का समर्थन कर रहे हैं। अकादमिक क्षेत्र में भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा। विश्वविद्यालय अब भाषा प्रसंस्करण, AI मॉडलिंग और वैज्ञानिक सिमुलेशन में उन्नत अनुसंधान कर सकेंगे। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र को इंडिया AI मिशन के तहत बनने वाले AI प्रयोगशालाओं और उत्कृष्टता केंद्रों से फायदा होगा, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग को गहरा करेंगे।

6. एआई एज का अग्रदूत बनने की दिशा में भारत

भारत हर साल 25 लाख STEM (साइंस, टेक, इंजीनियरिंग, मैथ्स) स्नातक तैयार करता है और GitHub पर दुनिया के दूसरे सबसे बड़े डेवलपर समुदाय का घर है। यही कारण है कि माइक्रोसॉफ्ट के पुनीत चंदोक के शब्दों में, 'भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि नवाचार का प्रेरक, प्रतिभा का केंद्र और नीति नवप्रवर्तन (Policy Innovation) का अग्रदूत है।' AI युग में भारत वही भूमिका निभा सकता है जो 1990 और 2000 के दशक में उसने IT सर्विसेज के क्षेत्र में निभाई थी। आज जो निवेश हो रहे हैं, वे आने वाले दशक में भारत को वैश्विक AI लैंडस्केप के केंद्र में ला सकते हैं। एक ऐसा केंद्र, जहां से तकनीक, रोजगार और नवाचार की नई कहानी लिखी जाएगी।

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डिजिटल रिवॉल्युशन का लीडर बनने जा रहा है भारत

इतना तो कहा ही जा सकता है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और AWS जैसे वैश्विक दिग्गजों का भारत पर बढ़ता भरोसा यह संकेत देता है कि देश अब सिर्फ डिजिटल क्रांति का हिस्सा नहीं, बल्कि उसका नेतृत्वकर्ता बनने की ओर बढ़ रहा है। यदि नीतिगत स्थिरता, कौशल विकास और अवसंरचना विस्तार समान गति से जारी रहे, तो भारत का यह 'AI इंजन' न केवल घरेलू विकास को गति देगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल इकॉनमी का प्रमुख चालक बन जाएगा।

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