
भारत सरकार ने बुधवार को निर्यातकों के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं। एक तरफ निर्यात संवर्धन मिशन को मंजूरी दी गई है, तो दूसरी तरफ 20,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना भी शुरू की गई है। इन कदमों का मकसद है भारतीय निर्यातकों को वैश्विक चुनौतियों से बचाना और उन्हें नए बाजारों में मजबूत बनाना।
सरकार ने 25,060 करोड़ रुपये के खर्च से निर्यात संवर्धन मिशन को मंजूरी दी है। यह मिशन इस वित्त वर्ष से शुरू होकर छह साल तक चलेगा।
निर्यात प्रोत्साहन (10,401 करोड़ रुपये): इसमें ब्याज सहायता, फैक्टरिंग, गारंटी आधारित कर्ज, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड और नए बाजारों में विविधीकरण के लिए ऋण सहायता शामिल है।
निर्यात दिशा (14,659 करोड़ रुपये): इसमें गैर-वित्तीय मदद दी जाएगी जैसे गुणवत्ता और अनुपालन सहायता, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग, व्यापार मेलों में भागीदारी, लॉजिस्टिक और क्षमता निर्माण।
इस मिशन का खास ध्यान वस्त्र, चमड़ा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद जैसे सेक्टरों पर होगा, जो हाल ही में वैश्विक शुल्क वृद्धि से प्रभावित हुए हैं।
इससे एमएसएमई के लिए किफायती व्यापार वित्त तक पहुंच आसान होगी। साथ ही अनुपालन और प्रमाणन सहायता से निर्यात की पूरी तैयारी हो सकेगी और भारतीय उत्पादों की बाजार पहुंच बेहतर होगी।
यह मिशन उन संरचनात्मक चुनौतियों को हल करने के लिए बनाया गया है जो भारतीय निर्यात को रोकती हैं जैसे सीमित और महंगा कर्ज, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन की ऊँची लागत और कमजोर ब्रांडिंग।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) इस मिशन को लागू करेगा। आवेदन से लेकर वितरण तक की सारी प्रक्रिया एक अलग डिजिटल मंच पर होगी, जो मौजूदा व्यापार प्रणालियों से जुड़ा रहेगा।
सरकार ने निर्यातकों के लिए 20,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना (CGSE) भी मंजूर की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह योजना एनसीजीटीसी और वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से लागू होगी।
नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) सदस्य वित्तीय संस्थानों को 100% गारंटी कवरेज देगी। इससे पात्र निर्यातकों, खासकर MSMEs को अतिरिक्त ऋण सुविधा मिलेगी। बिना किसी गारंटी के कर्ज मिलने से पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी और कारोबार सुचारू रूप से चलेगा।
इस योजना से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और नए बाजारों में विविधीकरण को समर्थन मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है भारत को 1000 अरब डॉलर के निर्यात तक पहुंचाना।
भारत की अर्थव्यवस्था में निर्यात का हिस्सा लगभग 21% है और यह विदेशी मुद्रा भंडार में भी बड़ा योगदान देता है। निर्यात आधारित उद्योगों में 4.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है, जिनमें MSMEs का योगदान लगभग 45% है।
सरकार के ये दोनों फैसले निर्यात संवर्धन मिशन और ऋण गारंटी योजना भारतीय निर्यातकों को मजबूती देंगे। इससे न सिर्फ व्यापार आसान होगा बल्कि भारत के आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।