Pan Masala Tax 2026: सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में पान मसाला विनिर्माण पर लगाए गए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर से 14,000 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होने की उम्मीद है। पान मसाले पर एक फरवरी से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया गया है, जो 40 प्रतिशत जीएसटी के ऊपर अतिरिक्त है। इस उपकर की गणना पान मसाला बनाने वाली इकाइयों की उत्पादन क्षमता के आधार पर की जाएगी। 40 प्रतिशत जीएसटी को जोड़ने के बाद पान मसाले पर कुल कर भार 88 प्रतिशत ही रहेगा।
14,000 हजार करोड़ से भरेगी तिजोरी
बजट दस्तावेजों के अनुसार, सरकार को चालू वित्त वर्ष के शेष दो महीनों (फरवरी और मार्च) में स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर से 2,330 करोड़ रुपये और 2026-27 में 14,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। पान मसाले पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर को लेकर राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में कान, नाक एवं गला विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ पवन सिंघल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026-27 में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क और कर संरचना में वृद्धि करने का स्वागत किया हैं।
सरकार का कदम सही- डॉ सिंघल
राजस्थान स्टेट ईएनटी एसोसिएशन के सचिव डाॅ सिंघल ने केन्द्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताया और कहा कि सरकार के तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क एवं कर संरचना को बढ़ाने से इन उत्पादों की खपत में कमी आयेगी और इससे इन उत्पादों का सेवन करने वाले लोगों में भी कमी होगी। उन्होंने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे जहां इनके सेवन से होने वाले दुष्परिणामों में कमी के साथ इससे होने वाली मौतों में भी कमी आएगी।
तंबाकू से बढ़ती हैं बीमारियां
डाॅ सिंघल ने कहा कि राजस्थान सहित देशभर में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियों से करीब 14 लाख से अधिक तथा प्रदेश में 77 हजार से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार राज्य में तंबाकू एवं अन्य धूम्रपान उत्पादों से होने वाले रोगों से प्रतिवर्ष 77 हजार से अधिक लोगों की मौत हो जाती है और देशभर में 13.5 लाख एवं विश्वभर में 80 लाख लोगों की जान इससे जाती है। जबकि प्रदेशभर में 300 से अधिक बच्चे और देशभर में 5500 बच्चे प्रतिदिन तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरू करते हैं।