LPG Supply: राज्यों को अब पहले से ज्यादा मिलेगी गैस! 23 मार्च से बढ़ेगा LPG आवंटन, जानें किसे मिलेगी प्राथमिकता?

LPG Allocation increased: केंद्र सरकार ने 23 मार्च से राज्यों के लिए गैस आवंटन बढ़ाकर 50% करने का फैसला किया है। होटल, ढाबे, डेयरी और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता मिलेगी। कमर्शियल ग्राहकों के लिए रजिस्ट्रेशन और PNG आवेदन अनिवार्य होगा।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड21 Mar 2026, 08:16 PM IST
राज्यों को अब पहले से ज्यादा गैस मिलेगी, 23 मार्च से बढ़ेगा LPG आवंटन
राज्यों को अब पहले से ज्यादा गैस मिलेगी, 23 मार्च से बढ़ेगा LPG आवंटन(ANI)

LPG Supply: पिछले कुछ समय से गैस सप्लाई को लेकर जो दबाव बना हुआ था, उसके बीच अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए थोड़ी राहत वाली खबर आई है। केंद्र सरकार ने एलपीजी आवंटन बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि जरूरी सेवाओं और आम जरूरतों से जुड़े सेक्टरों पर दबाव कुछ कम हो सके।

23 मार्च से लागू होगी नई व्यवस्था

पेट्रोलियम सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को चिट्ठी लिखकर जानकारी दी है कि 23 मार्च 2026 से गैस की सप्लाई में 20 प्रतिशत का अतिरिक्त इजाफा किया जा रहा है। इससे कुल सप्लाई अब 'प्री-क्राइसिस' लेवल (संकट से पहले के स्तर) के 50% तक पहुंच जाएगी। यानी जिन राज्यों को अभी सीमित मात्रा में गैस मिल रही थी, उन्हें अब कुछ और राहत मिलने वाली है।

पत्र में लिखा है, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि 23.3.26 से अगले नोटिफिकेशन तक, राज्य को और 20% दिया जा रहा है, जिससे कुल एलोकेशन संकट से पहले के लेवल का 50% हो जाएगा। 20% का एक्स्ट्रा एलोकेशन इन सेक्टर को प्रायोरिटी पर दिया जाएगा: रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग/डेयरी, राज्य सरकारों या लोकल बॉडी द्वारा खाने के लिए चलाई जाने वाली सब्सिडी वाली कैंटीन/आउटलेट, कम्युनिटी किचन, माइग्रेंट मजदूरों के लिए 5kg FTL, साथ ही यह पक्का करने के उपाय भी किए जाएंगे कि इसका कोई डायवर्जन न हो...”

इन क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता

अतिरिक्त 20% गैस की सप्लाई का फायदा हर किसी को नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा 'प्रायोरिटी सेक्टर्स' को मिलेगा। इनमें शामिल हैं:

  • खान-पान: होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और इंडस्ट्रियल कैंटीन।
  • डेयरी और फूड प्रोसेसिंग: दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की प्रोसेसिंग इकाइयां।
  • समाज कल्याण: राज्य सरकारों द्वारा चलाई जाने वाली रियायती कैंटीन और कम्युनिटी किचन।
  • मजदूर वर्ग: प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले 'फ्री ट्रेड एलपीजी' (FTL) सिलेंडर।

किसे मिलेगी गैस, उसके लिए क्या शर्त रखी गई?

सरकार ने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे सभी उपभोक्ताओं को पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा। तभी वे इस 50 प्रतिशत आवंटन के तहत एलपीजी पाने के पात्र होंगे।

सिर्फ इतना ही नहीं, इन उपभोक्ताओं को अपने-अपने शहर की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के पास पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के लिए भी आवेदन करना होगा। साथ ही उन्हें PNG सप्लाई लेने के लिए खुद को तैयार रखने की दिशा में जरूरी कदम उठाने होंगे।

पश्चिम एशिया से घटा आयात

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से 90% हिस्सा अब तक पश्चिम एशिया से आता था। लेकिन हालिया संकट के चलते वहां से आने वाली सप्लाई में भारी कमी आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने S&P कमोडिटीज एट सी (CAS) के हवाले से बताया कि 19 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में पश्चिम एशिया से केवल 89,000 टन गैस आई, जो जनवरी 2026 के बाद सबसे कम है।

दूसरी तरफ, वैकल्पिक क्षेत्रों से सप्लाई बढ़कर 1,76,000 टन हो गई, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका से आया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में भारत अमेरिका से लगभग 22 लाख टन एलपीजी आयात कर सकता है। हाल के दिनों में अमेरिका से आने वाले जहाजों की संख्या खाड़ी देशों के मुकाबले बढ़ गई है, जो भारत की एनर्जी सुरक्षा के लिए एक बड़ा बदलाव है।

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