FY26 GDP growth: सरकार को नहीं मिल रहा है पर्याप्त टैक्स, पूरा हो पाएगा राजकोषीय घाटे का लक्ष्य?

Tax collection shortfall impact on Indian economy: टैक्स कलेक्शन में कमी और नॉमिनल जीडीपी की धीमी रफ्तार से राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, केयरएज रेटिंग्स ने FY26 में 7.5% की मजबूत आर्थिक विकास दर का भरोसा जताया है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड18 Dec 2025, 04:51 PM IST
टैक्स कलेक्शन के टार्गेट से चूक रही है सरकार। (सांकेतिक तस्वीर)
टैक्स कलेक्शन के टार्गेट से चूक रही है सरकार। (सांकेतिक तस्वीर)(Mint)

Revenue Deficit Target FY 26: भारत सरकार के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। टैक्स कलेक्शन बजट के अनुमानों से काफी पीछे चल रहा है और नॉमिनल जीडीपी की ग्रोथ भी उम्मीद के मुताबिक नहीं है। इसके बावजूद केयरएज रेटिंग्स का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती बनाए रखेगी। एजेंसी ने अगले वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ और निवेश को लेकर सकारात्मक उम्मीदें जताई हैं।

राजकोषीय घाटे की चिंता

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का टैक्स कलेक्शन फिलहाल बजट लक्ष्यों से पीछे है। वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में टैक्स कलेक्शन में केवल 4% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पूरे साल के लिए 12.5% का भारी-भरकम लक्ष्य रखा गया था। इसके साथ ही नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ भी 8.3% रहने का अनुमान है, जो बजट में तय किए गए 10.1% से काफी कम है। चूंकि ब्याज, वेतन और सब्सिडी जैसे खर्चों में कटौती करना मुश्किल है, इसलिए राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का सारा दबाव अब इन्फ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत व्यय पर आ सकता है।

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जीडीपी ग्रोथ और अर्थव्यवस्था की स्थिति

भले ही घाटे को लेकर चुनौतियां हों, लेकिन भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर आंकड़े उत्साहजनक हैं। केयरएज रेटिंग्स ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी 7.5% की दर से बढ़ेगी। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह दर 7% रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू निजी निवेश में सुधार और नए क्षेत्रों में निवेशकों की बढ़ती रुचि से इकोनॉमी को सहारा मिलेगा।

महंगाई और ब्याज दरों में राहत की उम्मीद

आम आदमी और बाजार के लिए राहत की बात यह है कि महंगाई के नरम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 में औसत महंगाई दर केवल 2.1% रह सकती है, जो अगले साल 4% तक सामान्य हो जाएगी। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का कहना है कि कम महंगाई, गिरती ब्याज दरें और टैक्स का कम बोझ भारत की विकास यात्रा को और रफ्तार देंगे।

विदेशी निवेश और नए क्षेत्रों में बढ़ता उत्साह

विदेशी निवेशक भारत को लेकर काफी गंभीर हैं और इसका असर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में दिख रहा है। खास तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), रीन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और AI जैसे सेक्टर्स में भारी निवेश आ रहा है। इसके अलावा, अगर भारत और अमेरिका के बीच कोई बड़ा व्यापारिक समझौता होता है, तो इससे विकास की गति और भी तेज हो सकती है। नए श्रम कानूनों जैसे सुधारों से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

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प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर एक नजर

केयरएज रेटिंग्स ने अर्थव्यवस्था के अन्य पैमानों पर भी अपनी राय दी है। इसके अनुसार...

राजकोषीय घाटा: FY26 में 4.4% और FY27 में इसके घटकर 4.2-4.3% तक आने की संभावना है।

चालू खाता घाटा (CAD): अगले दो सालों में यह जीडीपी का करीब 1% रह सकता है।

रुपये की स्थिति: FY27 के अंत तक डॉलर के मुकाबले रुपया 89-90 के स्तर पर पहुंच सकता है।

बॉन्ड यील्ड: FY26 के अंत तक 10 साल वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.4-6.6% के बीच रहने की उम्मीद है।

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